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सप्ताह का ज्ञान: हाथों में है लालिमा तो चिंता की नहीं कोई बात, आनंद से व्यतीत होगा जीवन

दोस्त विरोधियों सा आचरण करते हों, शरीर में आलस्य रहता हो, हथियार रखने की भावना प्रबल होती हो, बात-बात में दिमाग गरम हो जाता हो, दिन में कामुक खयाल आते हों और बहुत सारे सेक्स संबंधों से जुड़ने का जी करता हो, तो यह कुंडली में मंगल के खराब होने का संकेत है।

Edited byपराग शर्मा | नवभारत टाइम्स 7 Aug 2022, 10:16 am
सप्ताह का ज्ञान
नवभारतटाइम्स.कॉम palmistry
धन-समृद्धि देती है हाथों में ऐसी रेखाएं...

यदि भाई से संबंध खराब रहता हो, दोस्त विरोधियों सा आचरण करते हों, शरीर में आलस्य रहता हो, हथियार रखने की भावना प्रबल होती हो, अपराधी हीरो की तरह अच्छे लगते हों, बात-बात में दिमाग गरम हो जाता हो, दिन में कामुक खयाल आते हों और बहुत सारे सेक्स संबंधों से जुड़ने का जी करता हो, तो यह कुंडली में मंगल के खराब होने का संकेत है। ऐसे लोगों को प्रेम विवाह से पहले अपने फैसले पर गहरा चिंतन मनन जरूर कर लेना चाहिए।

बात पते की
(लग्न में सूर्य)

सूर्य यदि लग्न यानी प्रथम भाव में हो, तो शरीर में बल देता है। चूंकि, सूर्य संपूर्ण सौर मंडल का नेतृत्व करता हैं, अतएव सूर्य के लग्न में होने से व्यक्ति में भी नेतृत्व के गुण का संचार होने लगता है। ऐसे लोग कठिन से कठिन समय में भी अविचलित होकर अद्‌भुत नेतृत्व देते हैं। ऐसे लोग धार्मिक विचारों वाले होते हैं और स्वतंत्र रूप से अपना कार्य करने के इच्छुक होते हैं। ये पुरुषार्थी व उत्साही होने के साथ विचारों से धार्मिक होते हैं। लग्न का सूर्य इन्हें आत्मविश्वासी, उदार तथा स्वाभिमानी बनाता है। इनके स्वभाव में क्रोध व उग्रता का समावेश होता है। इन लोगों में ऊर्जा की अधिकता होती है। ये लोग उच्च विचारों वाले व न्यायप्रिय होते हैं। इनका मनोबल कमजोर व देह भारी होती है। इनकी देह में आलस्य और विकार की भी आशंका बनी रहती है। साहस व चातुर्य इनमें कूट-कूटकर भरा होता है। इनमें पित्त की अधिकता होती है। सूर्य की सप्तम दृष्टि से इनके जीवनसाथी से मतभेद प्रकट हो सकते हैं। अगर, सूर्य लग्न में शत्रु राशि में हो, तो अपयश व दुःख प्रदायक होता है।

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प्रश्न: गृहक्लेश का वास्तु से कोई संबंध है क्या? -ललिता शुक्ला
उत्तर: सद्‌गुरुश्री कहते हैं, हां, गृहक्लेश का वास्तु से सीधा संबंध है। वास्तु के नियमानुसार दक्षिण पूर्व यानि आग्नेय कोण पर जल या जलीय रंगों की मौजूदगी और इस कोण का नीचे होना या यहां गड्ढा होना घरेलू झगड़ों का कारण हो सकता है। उत्तर-पूर्व यानी ईशान्य कोण में अग्नि, आग्नेय पदार्थ अथवा अग्नि के रंगों की मौजूदगी घरेलू किट-किट को जन्म देती है। इसके साथ द्वार वेध (मुख्य द्वार के आगे कोई बाधा), पश्चिम दिशा का हल्का और प्रकाशवान होना, घर के मुख्य द्वार पर सूखे हुए तोरण या सफाई की कमी, उत्तर-पूर्व में भारी वस्तु का होने, उत्तर-पूर्व में गंदगी का होना भी घरेलू झमेलों के सूत्र छिपे हो सकते हैं।

प्रश्न: छठें भाव में चंद्रमा खराब होता है या अच्छा? -विजय शिर्धोंकर
उत्तर: सद्‌गुरुश्री कहते हैं कि जन्म कुंडली के षष्ठ भाव में चंद्रमा की उपस्थिति व्यक्ति को अतिविचारशील, संवेदनशील, स्वप्नदृष्टा, कल्पनाशील व भावुक बनाती है। लेकिन, अति संवेदनशीलता व अधिक भावुकता से इन लोगों का व्यक्तित्व नाटकीय, रूखा व एकतरफा, होकर इनके भौतिक लाभ और सफलता पर नकारात्मक असर डालता है। कई बार उद्यम के अभाव में इन्हें उचित परिणाम नहीं मिल पाता है। पर, इनके भीतर अपार मानसिक व आंतरिक क्षमता पाई जाती है। इन्हें धन के जोखिम से बचना चाहिए तथा सट्टे या फ्यूचर ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए, अन्यथा फायदा नहीं, नुकसान होगा।

प्रश्न: हथेली में यदि लालिमा अधिक हो, तो ज्योतिष में इसका क्या अर्थ है? क्या यह चिंता की बात है? -कल्याणी लोहार
उत्तर: सद्‌गुरुश्री कहते हैं कि हथेली और हस्त रेखाओं का अध्ययन ज्योतिष नहीं, सामुद्रिक शास्त्र यानि हस्त रेखा विज्ञान का विषय है। सामुद्रिक शास्त्र में रक्त वर्ण यानी लाल रंग की हथेली को ऐश्वर्य का पर्याय माना जाता है। जिनकी हथेली में लालिमा ज्यादा हो, उनके जीवन में अन्य लोगों की अपेक्षा संघर्ष कम और आनंद अधिक होता है। उनका भौतिक जीवन आनंद की छांव में बीतता है। अतः आपको इनसे बचने के किसी उपाय की आवश्यकता नहीं है।

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प्रश्न: मुझे किसी ने बताया है कि उ नाम के लोग जीवन में कुछ नहीं कर पाते? क्या यह सच है? -उमेश बोरिचा
उत्तर: नहीं, यह सही नहीं है। सद्‌गुरुश्री कहते हैं कि उ नाम के लोग अपार बौद्धिक क्षमता से परिपूर्ण होते हैं। ये नए और अनोखे विचारों के धनी होते हैं। मौलिक विचारों के कारण ये करियर में नए सोपान चढ़ते हैं। ये लोगों का दिल जीतने की कला में प्रवीण व जिंदादिल होते हैं। ये बड़ी-बड़ी उपलब्धियों की अपेक्षा छोटी-छोटी बातों में अपनी खुशियां तलाशते हैं। ये रिश्तों के लेकर बहुत सजग होते हैं। ये संबंधों में मिलावट पसंद नहीं करते हैं। भावुकता इनका गुण और अवगुण दोनों है। जज्बाती होने के कारण इन पर बार-बार अकारण क्रोध हावी हो जाता है। हरदिल अजीज होने के साथ ये बेहद अनुशासित और गंभीर भी नजर आते हैं, पर दिल से ये बेहद कोमल होते हैं। ये दूसरों की सलाह का बहुत सम्मान करते हैं और किसी भी अनुशंसा के अनुकरण का प्रयास करते हैं। ये अभिमान से दूर रहते हैं।

अगर, आप भी सद्गुरु स्वामी आनंदजी से अपने सवालों के जवाब जानना चाहते हैं या किसी समस्या का समाधान चाहते हैं तो अपनी जन्मतिथ‍ि, जन्म समय और जन्म स्थान के साथ अपना सवाल saddgurushri@gmail.com पर मेल कर सकते हैं। सद्‌गुरुश्री (डा. स्वामी आनंदजी)
लेखक के बारे में
पराग शर्मा
"पराग शर्मा धार्मिक विषयों और रेमेडियल ज्योतिष पर 7 साल से भी अधिक समय से काम कर रहे हैं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर इन्होंने गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से यह प्रतिकूल ग्रह दशाओं और परेशानी में चल रहे लोगों को उचित सलाह देकर उन्हें संकट से निकलने में मदद करते हैं। खाली समय में राजनीतिक और धार्मिक विषयों पर अध्ययन और चिंतन करना पराग को बहुत पसंद है। शोर शराबे की बजाय एकांत में ध्यान करना भी पसंद है, इसलिए जब कभी भी पराग को खाली एकांत समय मिलता है, आत्मचिंतन करते हैं और कहानी एवं कविताएं लिखते हैं।"... और पढ़ें

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