ऐपशहर

Eid al-Adha 2022 Date : बकरीद आज , क्यों मनाते हैं, क्या है नियम जानें

Eid al-Adha Bakra Eid 2022 : इस साल बकरीद का त्योहार 10 जुलाई यानी आज मनाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। तो आइए जानते हैं बकरीद को लेकर क्या मान्यताएंं है इसका महत्व क्या है और कुर्बानी के नियम क्या होते हैं। जानें बकरीद के बारे में सभी जरूरी जानकारी।

Edited byआयुषी त्यागी | नवभारतटाइम्स.कॉम 10 Jul 2022, 8:09 am
इस्लाम धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक बकरीद को ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक ईद उल अजहा का पर्व इस साल 10 जुलाई यानी आज मनाया जा रहा है। बकरीद को मुस्लिम समाज के लोग त्याग और कुर्बानी के तौर पर मनाते हैं। बकरीद मनाने के पीछे हजरत इब्राहिम के जीवन से जुड़ी एक बड़ी घटना है। तो आइए जानते हैं बकरीद क्यों मनाते हैं क्या है इसके नियम और इतिहास...
नवभारतटाइम्स.कॉम bakra eid 2022


बकरीद मनाने की मान्यता
इस्लाम धर्म की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हजरत इब्राहिम अल्लाह के पैगंबर थे। वह खुदा में पूरा विश्वास रखते थे। ऐसा कहा जाता है कि एक बार पैगंबर ने हजरत इब्राहिम से कहा कि वह अपने प्यार और विश्वास को साबित करने के लिए सबसे प्यारी चीज का त्याग करें। पैगंबर की बात सुनकर उन्होंने अपने इकलौते बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया। जैसे ही इब्राहिम अपने बेटे को मारने वाले थे तभी अल्लाह ने अपने दूत भेजकर बेटे को एक बकरे में बदल दिया। तभी से बकरीद का त्योहार मनाया जाता है।

तीन हिस्सों में होता है बंटवारा
बकरीद के दिन जिस बकरे की कुर्बानी दी जाती है उसे तीन भागों में बांटा जाता है। जिसका पहला हिस्सा अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को दिया जाता है। दूसरा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों और तीसरा परिवार के लोगो को दिया जाता है।

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक हर साल दो बार ईद मनाई जाती है। एक ईद उल जुहा और दूसरा ईद उल फितर। ईद उल फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। इसे रमजान को खत्म करते हुए मनाया जाता है। मीठी ईद के करीब 70 दिनों बाद बकरीद मनाई जाती है।

ईद की कुर्बानी के नियम
  • कुर्बानी का पहला नियम है कि जिसके पास 613 से 614 ग्राम चांदी हो या इतनी चांदी की कीमत के बराबर धन हो सिर्फ उन्हीं लोगों को कुर्बानी देनी चाहिए।
  • जो व्यक्ति पहले से ही कर्ज में हो वह कुर्बानी नहीं दा सकता है।
  • जो व्यक्ति अपनी कमाई में से ढाई फीसदी हिस्सा दान देता हो साथ ही समाज की भलाई के लिए धन के साथ हमेशा आगे रहता हो उसे कुर्बानी देना जरुरी नहीं है।
  • ऐसे पशु जिसे शारीरिक बीमारी हो, सींग या काम का अधिकतर भाग टूटा हो और छोटे पशु की कुर्बानी नहीं दी जा सकती है।
  • इसके अलावा ईद की नमाज के बाद ही मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है।
नोट : यह तमाम जानकारी जनरुचि को ध्यान में रखकर दी जा रहा है। कंटेंट का उद्देश्य मात्र आपको बेहतर सलाह देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।
लेखक के बारे में
आयुषी त्यागी
आयुषी त्यागी को मीडिया के विभिन्न संस्थानों में इनका 6 साल का कार्यानुभव रहा है। ज्योतिष और धर्म पर बीते 2 सालों से काम का अनुभव है। इन्होंने वैदिक ज्योतिष, अंकज्योतिष और टैरो के साथ हस्तरेखा और वास्तु एवं फेंगशुई पर भी अध्ययन किया है और अपने ज्ञान और अनुभव से लोगों को उचित ज्योतिषीय उपाय बताकर परेशानियों से निकलने में सहायता करती है। इसके अलावा इन्होंने राजनीतिक विषयों पर पर भी मीडिया संस्थानों में काम किया है। खाली समय में धर्म-ग्रंथों का अध्ययन और चिंतन करने के साथ ही यात्रा और संगीत का भी आनंद लेती हैं।... और पढ़ें

अगला लेख

Astroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर