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महावीर जयंती: ईश्वर की नई पहचान

भगवान महावीर की 2615 वीं जयंती मनायी जा रही है। महावीर ने हमेशा ही जीवों को अहिंसा और अपरिग्रह का संदेश दिया।

नवभारतटाइम्स.कॉम 20 Apr 2016, 8:32 am
20 अप्रैल, बुधवार को भगवान महावीर की 2615वीं जयंती मनायी जा रही है। भगवान महावीर ने हमेशा ही जीवों को अहिंसा और अपरिग्रह का संदेश दिया। महावीर के विचारों में जीवों की रक्षा कर लेना मात्र अहिंसा नहीं है। किसी भी प्राणी को तकलीफ नहीं पहुंचाना मात्र अहिंसा नहीं है। बल्कि यदि किसी को हमारी मदद की आवश्यकता है और हम उसकी मदद करने में सक्षम हैं फिर भी हम उसकी सहायता न करें तो यह भी हिंसा है।
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महावीर जयंती: ईश्वर की नई पहचान


अब यहां यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आज से हजारों साल पहले तीर्थंकर महावीर ने मानवता का जो संदेश दिया था, क्या वह आज भी उतना ही प्रासंगिक और महत्वपूर्ण है। यह समझना जरूरी है कि उत्साह से लबरेज आज की युवा पीढ़ी भगवान महावीर के संदेशों को किस रूप में देखती है और युवाओं के सपने को साकार करने में इन संदेशों की क्या अहमियत है। आज के यूथ में न तो प्रतिभा की ही कोई कमी है और न ही आत्मविश्वास की। उसे जरूरत है, तो सकारात्मक प्रेरणा, सहयोग और सही दिशा की।

ऐसे में महावीर के जीवन दर्शन और उनके सिद्धांतो से उपजा उनका संदेश युवाओं को राह दिखाता है। महावीर की वाणी के तीन आधारभूत मूल्य- अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकान्त हैं। ये युवाओं को आज की भागमभाग और तनाव भरी जिंदगी में सुकून की राह दिखाते हैं। महावीर की अहिंसा केवल शारीरिक या बाहरी न होकर, मानसिक और भीतर के जीवन से भी जुड़ी है। दरअसल, जहां अन्य दर्शनों की अहिंसा समाप्त होती है, वहां जैन दर्शन की अहिंसा की शुरुआत होती है। महावीर मन-वचन-कर्म, किसी भी जरिए की गई हिंसा का निषेध करते हैं।

सबके विचारों का सम्मान

आज का युवा जटिलताओं और दबावों से मुक्त होकर स्वतंत्र और सहज जीवन जीना चाहता है। विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बंदिशों के दौर में महावीर का अनेकान्तवाद और स्यादवाद बेहद प्रासंगिक है। महावीर सत्य को सभी पहलुओं के साथ समझने का आह्वान करते हुए दूसरों के विचारों का सम्मान करने का संदेश देते हैं। अनेकान्त के जरिए युवा ढेरों ऊहापोह और उलझनों से छुटकारा पा सकते हैं। महावीर का अपरिग्रह का सिद्धांत भी न केवल बाहरी परिग्रहों, बल्कि मन के विकारों और तनावों को भी त्यागने को संदेश देता है। महावीर कहते हैं- हर जीव अपने पुरुषार्थ से मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

जियो और जीने दो

महावीर ईश्वर को जगत के निर्माता या संहारक के रूप में न देखकर, एक आदर्श व्यक्ति के रूप में देखते हैं, जिसने इन्द्रियों पर विजय पा कर निर्वाण प्राप्त कर लिया है। हर प्राणी अनन्त गुणों वाला है। महावीर का यह कथन युवाओं को उत्साह और आत्मविश्वास से भर देता है। महावीर विश्व को क्षमा और विश्व शांति का अनूठा संदेश देते हैं। उनका 'जियो और जीने दो' का संदेश आज विश्व भर के लिए मार्गदर्शक बन कर उभरा है।

- निशांत जैन निश्चल

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