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ऑटो कंपनियों के लिए फीकी रही दिवाली

तेल की बढ़ी कीमतों, महंगे ब्याज दर, इंश्योरेंस लागत में बढ़ोतरी और शेयर मार्केट में उथल-पुथल से कंज्यूमर्स सेंटीमेंट पर बुरा असर पड़ा।

इकनॉमिक टाइम्स 12 Nov 2018, 10:28 am
शर्मिष्ठा मुखर्जी/केतन ठक्कर, नई दिल्ली/मुंबई
नवभारतटाइम्स.कॉम diwali-sale

देश के प्रमुख वीइकल्स मैन्युफैक्चरर के लिए पिछले कुछ साल में यह सबसे खराब दिवाली रही। तेल की बढ़ी कीमतों, महंगे ब्याज दर, इंश्योरेंस लागत में बढ़ोतरी और शेयर मार्केट में उथल-पुथल के चलते कंज्यूमर्स शोरूम से दूर रहे। ईटी ने जिन मैन्युफैक्चरर और डीलर्स से बात की, उन्होंने बताया कि धनतेरस और दिवाली के लिए डीलर्स स्टॉक बढ़ा रहे थे, जिसके चलते पिछले महीने होलसेल आंकड़ों में तेजी दिखी थी। हालांकि, ग्राउंड लेवल पर ऑटो कंपनियों को सुस्ती का सामना करना पड़ रहा है।

इंडस्ट्री के आकलन के मुताबिक, इस फेस्टिव सीजन (नवरात्र से दिवाली तक) में टू-वीलर्स की रिटेल सेल्स में 10 से 12 पर्सेंट की गिरावट आई है। वहीं, पैसेंजर वीइकल्स की रिटेल मांग में 0-5 पर्सेंट कमी का अनुमान है। हेवी कमर्शियल वीइकल्स की सेल्स बढ़ाने के लिए कंपनियों को भारी छूट देनी पड़ी।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के डायरेक्टर निकुंज सांघी ने बताया, 'यह फेस्टिव सीजन मंदा रहा है। कंपनियों ने दिवाली और धनतेरस में भारी सेल्स की उम्मीद के चलते स्टॉक बढ़ाया था, जिसका असर अक्टूबर के होलसेल आंकड़ों में देखा जा सकता है। हालांकि, अगर छोटे कमर्शियल वीइकल्स (एक टन से छोटे वजन वाले) को छोड़ दें, तो दूसरी कैटिगरी में रिटेल मांग कमजोर रही है।' पारंपरिक रूप से फेस्टिव सीजन के दौरान ऑटो कंपनियों की रिटेल सेल्स में करीब 20 पर्सेंट की बढ़ोतरी होती रही है।

ह्यूंदै मोटर इंडिया के नेशनल सेल्स हेड विकास जैन ने बताया कि नवरात्रि और दशहरे के दौरान कुछ तेजी दिखी थी, लेकिन इंडस्ट्री के लिए इस साल दिवाली फीकी रही है। उन्होंने बताया, 'नई सैंट्रो की वजह से हमने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन इंडस्ट्री के नजरिए से यह नवंबर थोड़ा और अच्छा हो सकता था। डीलरों के पास काफी स्टॉक जमा हो गया है।'


वहीं, टोयोटा किर्लोस्कर के जैन एन राजा ने कहा कि खरीदारी को लेकर माहौल कमजोर हुआ है और लोग सावधानी बरते रहे हैं, जिससे मांग प्रभावित हुई है। विकास जैन की तरह ही राजा ने भी कहा कि नवरात्रि के दौरान तेजी आई थी, लेकिन इसके बावजूद नवंबर के पहले 8 से 10 दिनों में रिटेल सेल्स 15-20 पर्सेंट कम रही। राजा ने बताया, 'देश के बाकी इलाकों के मुकाबले उत्तरी और पश्चिमी भारत में मांग बेहतर रही। हालांकि, मार्केट में एक तरह की अनिश्चितता है, जो सेल्स को प्रभावित कर रही है।'

एक प्रमुख पैसेंजर वीइकल्स मेकर के एक एग्जिक्युटिव ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा शेयर मार्केट में गिरावट के चलते मंथली सैलरी पर निर्भर प्रोफेशनल्स और छोटे बिजनसमैन की सेविंग्स में आई कमी ने भी बुरा असर डाला है। फेस्टिव सीजन में हमारी रिटेल सेल्स फ्लैट रहने की संभावना है।'

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