ऐपशहर

'सरप्राइज होगा UP चुनाव में BJP का हार जाना'

2014 के आम चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 2017 में भी यूपी में बीजेपी की कठिन नहीं लगती। आम चुनाव का विधानसभावार विश्लेषण करें तो बीजेपी ने 403 में से 328 यानी 81 पर्सेंट विधानसभा सीटों में जीत दर्ज की थी। यदि बीजेपी ऐसा करती है तो एक बार फिर वह बंपर जीत हासिल करेगी।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 6 Jan 2017, 12:12 pm
प्रवीण चक्रवर्ती
नवभारतटाइम्स.कॉम bjp not winning uttar pradesh would be a surprise
'सरप्राइज होगा UP चुनाव में BJP का हार जाना'

चुनाव आयोग की ओर से 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों का बिगुल बजाए जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक यूपी को बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण बताने लगे हैं। प्रत्याशियों के चयन को लेकर समाजवादी पार्टी में अब तक काफी विवाद हो चुका है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मोदी सरकार ने यूपी चुनावों को ध्यान में रखते हुए ही नोटबंदी का फैसला लिया है। 2014 के आम चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 2017 में भी यूपी में बीजेपी की कठिन नहीं लगती। आम चुनाव का विधानसभावार विश्लेषण करें तो बीजेपी ने 403 में से 328 यानी 81 पर्सेंट विधानसभा सीटों में जीत दर्ज की थी। यदि बीजेपी ऐसा करती है तो एक बार फिर वह बंपर जीत हासिल करेगी।

पढ़ें: BSP की दूसरी लिस्ट में 27 दलित, 23 मुस्लिम

उत्तर प्रदेश का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां हमेशा चतुष्कोणीय मुकाबला रहा है और जीत के लिए किसी दल को महज 25 से 30 पर्सेंट वोट की जरूरत रहती है। आम चुनाव में बीजेपी ने 324 सीटों पर 30 पर्सेंट से अधिक वोट हासिल किए थे। 253 सीटों पर यह आंकड़ा 40 पर्सेंट से अधिक था और 94 सीटों पर तो बीजेपी को 50 पर्सेंट से भी अधिक वोट मिले थे। 2012 में समाजवादी पार्टी को महज 15 सीटों पर ही 50 पर्सेंट से अधिक वोट मिले थे। 2014 में बीएसपी और एसपी को संयुक्त रूप से मिले वोटों से अधिक वोट बीजेपी को मिले थे। ऐसे में यह अनुमान निकाला जा सकता है कि 2014 के तीन साल बाद भी बीजेपी कम से कम जीत की राह तो तय कर ही सकती है।

यह भी पढ़ें: अखिलेश अगले हफ्ते कांग्रेस से करेंगे गठबंधन?

यदि बीजेपी को इन विधानसभा चुनावों में 200 से कम सीटें मिलती है और वह राज्य की सत्ता से दूर रहती है तो इसका सीधा अर्थ होगा कि उसके 15 पर्सेंट वोटर्स ने दूसरी पार्टी पर भरोसा जताया। यदि कोई दो विपक्षी पार्टियां एक साथ आती हैं तो बीजेपी को 2014 में मिले वोटों में 10 पर्सेंट का नुकसान झेलना पड़ेगा। यदि ऐसा होता है तो बीजेपी को 200 से कम सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है। 2015 में बिहार में बीजेपी को 2014 के मुकाबले 4 पर्सेंट कम वोट मिले थे और करारी हार झेलनी पड़ गई थी। इस तरह यदि यूपी में बीजेपी बिहार की तुलना में 4 गुना खराब प्रदर्शन करे, तभी हार का सामना करना पड़ेगा।

हालांकि इस विश्लेषण के खिलाफ एक तर्क यह है कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वोटर अलग ट्रेंड के साथ वोटिंग करते हैं। यह एक ऐसा मिथक है, जिसे चुनावों में हमेशा इस्तेमाल किया जाता रहा है। आमतौर पर लोग राज्य और देश के चुनावों में मतदान के वक्त दोनों सरकारों के कामकाज का भी आकलन करते हैं। इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यदि आम चुनाव के साथ किसी राज्य के विधानसभा चुनाव होते हैं तो करीब 77 पर्सेंट वोटर एक ही पार्टी को दोनों जगह वोट करते हैं। इसके बाद भी यदि कोई कहता है कि मतदाता आम चुनाव से अलग ट्रेंड पर चलकर विधानसभा चुनाव में वोट करेंगे, तब भी सिर्फ यही एक वजह बीजेपी की हार का कारण नहीं बन सकती है।

(प्रवीण चक्रवर्ती, आईडीएफसी इंस्टिट्यूट में पॉलिटिकल इकॉनमी के फेलो हैं।)

अगला लेख

Assembly electionsकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर