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Budget 2021-22: क्या होती है 'ऑफ बजट बॉरोइंग', जानिए सरकार क्यों और कैसे उठाती है बजट के बाहर से पैसे!

Budget 2021-22: सरकारें अपने फिस्कल डेफिसिट को बढ़ने से रोकने के लिए ऑफ बजट बॉरोइंग का सहारा लेती हैं। इसके जरिए सरकार सीधे पैसे ना उठाकर अपनी किसी एजेंसी के जरिए पैसों का इंतजाम करती है और अपने खर्चों को पूरा करती है। आइए इसके बारे में जानते हैं सब कुछ।

नवभारतटाइम्स.कॉम 27 Jan 2021, 1:26 pm

हाइलाइट्स

  • सरकारें अपने फिस्कल डेफिसिट को बढ़ने से रोकने के लिए ऑफ बजट बॉरोइंग का सहारा लेती हैं।
  • इसके जरिए सरकार सीधे पैसे ना उठाकर अपनी किसी एजेंसी के जरिए पैसों का इंतजाम करती है और अपने खर्चों को पूरा करती है।
  • अगर खर्चे सरकार की कमाई से अधिक हो जाते हैं तो उसे फिस्कल डेफिसिट या राजकोषीय घाटा कहते हैं।
  • वहीं अगर सरकार की कमाई उसके खर्चों से अधिक हो जाती है तो उसे फिस्कल सरप्लस कहते हैं।
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नई दिल्ली
Budget 2021-22: आगामी 1 फरवरी को देश का बजट पेश होगा। बजट से जुड़े कई तरह के टर्म होते हैं, जिनके बारे में हर किसी को पता होने चाहिए। बहुत सारे टर्म्स का तो अधिकतर लोग मतलब जानते भी हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी टर्म हैं, जो आज भी लोगों को कनफ्यूज करते हैं। ऐसा ही एक टर्म है ऑफ बजट बॉरोइंग, जिसे ऑफ बजट फाइनेंसिंग भी कहते हैं। इसका सीधा संबंध फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटे से होता है।
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  1. क्या होता है फिस्कल डेफिसिट?
    आसान भाषा में समझें ये सरकार के खर्चे और कमाई के बीच का अंतर है। अगर खर्चे सरकार की कमाई से अधिक हो जाते हैं तो उसे फिस्कल डेफिसिट या राजकोषीय घाटा कहते हैं। वहीं अगर सरकार की कमाई उसके खर्चों से अधिक हो जाती है तो उसे फिस्कल सरप्लस कहते हैं।
  2. अब जानिए ऑफ बजट बॉरोइंग किसे कहते हैं?
    जैसा कि नाम से ही समझ आ रही है कि ये बजट से बाहर होता है। यानी, ये वो कर्ज होता है, जो सरकार खुद नहीं लेती, लेकिन इसे सरकार के निर्देश पर किसी सरकारी काम या प्रोजेक्ट के लिए ही लिया जाता है। उदाहरण के लिए सरकार का एक बड़ा खर्च होता है फूड सब्सिडी देना। 2020-21 में सरकार ने कुल बिल 1,51,000 करोड़ में से सिर्फ 77,892 करोड़ का ही बिल दिया। बाकी का बिल नेशनल स्मॉल सेविंग फंड के जरिए चुकाया गया। यहां नेशनल स्मॉल सेविंग फंड के जरिए ऑफ बजट बॉरोइंग की गई।
  3. क्या होता है ऑफ बजट बॉरोइंग से फायदा?
    ऑफ बजट बॉरोइंग का फायदा फिस्कल डेफिसिट को कम करने में मिलता है, क्योंकि ऑफ बजट बॉरोइंग को फिस्कल डेफिसिट की कैल्कुलेशन में शामिल नहीं किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऑफ बजट बॉरोइंग सरकार की तरफ से अप्रत्यक्ष रूप से लिया हुआ लोन होता है। बता दें कि फिस्कल डेफिसिट जितना कम होता है, सरकारों को किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था से लोन लेने में उतना ही फायदा होता है, इसलिए हर सरकार इसे कम करने की कोशिश करती है और इसके लिए ऑफ बजट बॉरोइंग का सहारा भी लेती है।
  4. कैसे की जाती है ऑफ बजट बॉरोइंग?
    अगर सरकार को ऑफ बजट बॉरोइंग के जरिए पैसों का इंतजाम करना होता है तो वह किसी एजेंसी को बाजार से लोन के जरिए या फिर बॉन्ड जारी कर के पैसे उठाने के लिए कहती है। जैसा कि फूड सब्सिडी वाले उदाहरण में भी देखा गया कि फूड सब्सिडी का आधा बिल चुकाने के लिए सरकार ने नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड से ऑफ बजट बॉरोइंग की और अपने ऊपर पड़ने वाले बोझ को आधा कर दिया। यानी काम तो पूरा हुआ, लेकिन उसका बोझ दो जगह आधा-आधा बंट गया।

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