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Healthcare Sector: कितनी बड़ी होती जा रही है भारत की हेल्थकेयर इंडस्ट्री, महामारी के दौरान दिखे क्या बदलाव

हेल्थकेयर (Healthcare) के तहत अस्पताल, मेडिकल डिवाइसेज, क्लीनिकल ट्रायल्स, आउटसोर्सिंग, टेलिमेडिसिन, मेडिकल टूरिज्म, हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इक्विपमेंट आते हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम 20 Apr 2021, 6:36 pm
हेल्थकेयर (Healthcare) यानी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, रेवेन्यु और रोजगार दोनों ही मामलों में भारत का सबसे बड़ा क्षेत्र है। हेल्थकेयर के तहत अस्पताल, मेडिकल डिवाइसेज, क्लीनिकल ट्रायल्स, आउटसोर्सिंग, टेलिमेडिसिन, मेडिकल टूरिज्म, हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इक्विपमेंट आते हैं। भारत का हेल्थकेयर सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और कोविड19 महामारी के आने के बाद से हेल्थकेयर सेक्टर पर सभी का ध्यान है।
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Healthcare Sector: कितनी बड़ी होती जा रही है भारत की हेल्थकेयर इंडस्ट्री, महामारी के दौरान दिखे क्या बदलाव


भारतीय हेल्थकेयर डिलीवरी सिस्टम दो प्रमुख हिस्सों में बंटा हुआ है- पब्लिक और प्राइवेट। पब्लिक या सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम में प्रमुख शहरों में मौजूद सीमित द्वितीयक और तृतीयक केयर इंस्टीट्यूशंस शामिल हैं। पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर्स के रूप में बेसिक हेल्थकेयर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देता है। प्राइवेट हेल्थकेयर सिस्टम अधिकांशत: द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थ श्रेणी केयर इंस्टीट्यूशंस उपलब्ध कराता है। इस सिस्टम का ज्यादा ध्यान मेट्रो और टीयर 1 व टीयर 2 शहरों पर है।

​2020 तक बढ़कर 280 अरब डॉलर हो जाने का था अनुमान

भारत का प्रतिस्पर्धी लाभ इसके अच्छी ट्रेनिंग प्राप्त मेडिकल प्रोफेशनल्स में निहित है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हेल्थकेयर की गुणवत्ता और पहुंच के मामले में भारत 195 देशों की सूची में 145वें स्थान पर है। साल 2008 में भारत का हेल्थकेयर सेक्टर महज 45 अरब डॉलर का था। साल 2016 में यह बढ़कर 140 अरब डॉलर का हो गया। इंडियन हेल्थकेयर सेक्टर का साइज 2020 तक बढ़कर 280 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान जताया गया था।

​2022 तक हो जाएगा 372 अरब डॉलर का

30 मार्च 2021 को नीति आयोग द्वारा जारी की गई एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा भारत के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक बन गई है और वर्ष 2022 में इसके 372 अरब अमरीकी डॉलर का हो जाने की उम्मीद है। नीति आयोग की रिपोर्ट ने दवाइयों, अस्पतालों, चिकित्सा उपकरणों, नए युग की प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों और घरेलू स्वास्थ्य समाधानों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के कई अवसरों की एक श्रृंखला की रूपरेखा तैयार की है।

​22% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा

नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में स्वास्थ्य सेवा उद्योग वर्ष 2016 के बाद से लगभग 22% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। इस दर से वर्ष 2022 में इसके 372 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। देश के स्वास्थ्य सेवा बाजार का 80% हिस्सा भारतीय अस्पताल उद्योग है। वर्ष 2016-2017 में, भारतीय अस्पताल उद्योग का मूल्य 61.79 अरब डॉलर था। इसके 2023 तक 132 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

निवेश और रोजगार

भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में विदेशी निवेश भी जारी है। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड (DPIIT) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से लेकर सितंबर 2020 तक ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स सेक्टर के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 16.87 अरब डॉलर रहा था। भारत में हेल्थकेयर सेक्टर में FDI प्रवाह वर्ष 2011 में 9.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2016 में 12750 लाख अमरीकी डॉलर हो गया था। हेल्थकेयर सेक्टर में रोजगार की बात करें तो नीति आयोग की रिपोर्ट में ‘भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के अवसर’ शीर्षक से यह उल्लेख किया गया है कि देश के हेल्थकेयर सेक्टर में वर्ष 2017 से वर्ष 2022 के बीच 27 लाख रोजगार सृजित करने की क्षमता है।

​महामारी के आने के बाद दिखे ये बदलाव

महामारी के पैर पसारने के बाद भारत के हेल्‍थकेयर सेक्‍टर में कई तरह के बदलाव देखने को मिले। वर्चुअल केयर और रिमोट मेडिसिन वक्‍त की मांग बन गए, टेलीकसल्‍टेशन की अहमियत बढ़ी। अस्‍पतालों में जाने वाले लोगों की संख्‍या काफी कम हुई और होम बेस्‍ड केयर को बढ़ावा मिला। कभी एक भी पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट नहीं बनाने वाला भारत इसकी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग करने वाले हब के रूप में उभरा।

कोरोना की महामारी के दस्‍तक देने के कुछ ही महीनों के भीतर देश में रोजाना 4 लाख से ज्‍यादा पीपीई किट बनने लगे। इसी तरह के प्रयास फार्मास्‍युटिकल, लेबोरेटरी टेस्‍ट, एन-95/सर्जिकल मास्‍क, हैंड सैनिटाइजर और आवश्‍यक मेडिकल गैस बनाने में दिखाई दिए। सर्जिकल मास्‍कों की भारी मांग बढ़ने के बावजूद न तो इनकी कीमतें बढ़ी न इनकी किल्‍लत महसूस हुई। इसका श्रेय मैन्‍यूफैक्‍चरिंग को जाता है।

​पब्लिक हेल्थ पर खर्च बढ़ाकर GDP का 2.5% करने का प्लान

सरकार की योजना हेल्थकेयर सेक्टर पर खर्च को 2022 तक बढ़ाकर जीडीपी का 3 फीसदी करने की है। इसके अलावा सरकार की योजना पब्लिक हेल्थ पर खर्च को बढ़ाकर 2025 तक जीडीपी का 2.5 फीसदी करने की भी है। भारत की मेडिकल डिवाइसेज इंडस्ट्री, कंपनियों के लिए अवसरों से भरी हुई है। देश हाई एंड डायग्नोस्टिक सर्विसेज के लिए अग्रणी गंतव्यों में से एक है। भारत का हेल्थकेयर सेक्टर काफी डायवर्सिफाइड है और हर सेगमेंट में काफी अवसर हैं। भारत की हॉस्पिटल इंडस्ट्री के वित्त वर्ष 2022 तक बढ़कर 132.84 अरब डॉलर का हो जाने की उम्मीद है।

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