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Mutual Fund: म्यूचुअल फंड में करते हैं निवेश, जानते हैं निकासी पर कितना देना होगा टैक्स?

नया वित्त वर्ष (New Financial Year) शुरू हो गया है। इधर दिल्ली में लॉकडाउन (Lockdown in Delhi) भी लग गया है। अन्य जगह भी बंदिशें लग गई हैं। ऐसी हालत में लोगों की आमदनी पर भी संकट है। ऐसे में लोग अपनी पुरानी जमा-पूंजी को निकाल कर काम चला रहे हैं। कुछ लोग म्यूचुअल फंड के किए गए निवेश को भी निकाल (Mutual Fund withdrawal) रहे हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम 20 Apr 2021, 12:10 pm
आप भी अगर म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) से पैसे निकाल रहे हैं तो थोड़ा ठहर जाएं। म्यूचुअल फंड को भुनाने (Mutual Fund Withdrawal) से पहले इस पर लगने वाले इनकम टैक्स (Income Tax) का भी गणित समझ लें। क्योंकि म्यूचुअल फंड में इक्विटी (Equity) और डेट (Debt) के लिए टैक्स देनदारी अलग-अलग होती है। दरअसल, टैक्स के गणित में अक्सर लोग फंस जाते हैं। इसलिए आप इस बारीकी को समझने के लिए इसे जरूर पढ़ें:-
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Mutual Fund: म्यूचुअल फंड में करते हैं निवेश, जानते हैं निकासी पर कितना देना होगा टैक्स?


किस हिसाब से लगता है म्यूचुअल फंड पर टैक्स

टैक्सेशन के हिसाब से म्यूचुअल फंड की दो हिस्सों में बांटा जाता है। पहले हिस्से में इक्विटी ऑरिएंटेड फंड्स आते हैं तो दूसरे में अन्य सभी म्यूचुअल फंड्स आते हैं। यदि कोई म्यूचुअल फंड मैनेजर फंड की राशि का 65 फीसदी निवेश शेयर बाजार में लिस्टेड घरेलू कंपनी में कर रहे हैं तो ऐसे स्कीम इक्विटी ऑरिएंटेड स्कीम मपने जाते हैं। इनमें एक साल से ज्यादा वक्त तक आप यदि निवेश किए रहते हैं तो यह लांग टर्म इंवेस्टमेंट माना जाएगा। लेकिन यदि साल भर मतलब 12 महीने से पहले ही उसे भुना लिया तो इसे शार्ट टर्म इंवेस्टमेंट माना जाएगा। इक्विटी ऑरिएटेंड स्कीम के अलावा अन्य सभी म्यूचुअल फंड की स्कीम दूसरी श्रेणी में आते हैं। इनमें डेट, लिक्विड, शॉर्ट टर्म डेट, इनकम फंड्स, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान आते हैं। गोल्ड ETF, गोल्ड सेविंग्स फंड, इंटरनेशनल फंड भी इसमें शामिल होते हैं। इस श्रेणी में निवेश तीन साल या 36 महीने तक रहता है तो यह लांग टर्म माना जाएगा। 36 महीने से पहले यदि आपने उसे भुना लिया तो यह शार्ट टर्म इंवेस्टमेंट माना जाएगा।

होल्डिंग पीरियड की गणना कैसे होती है

कोई भी निवेशक जब SIP या STP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो हर SIP/STP एक नया निवेश माना जाता है। यहां कर अधिकारी टैक्सेशन के लिए यूनिट अलोटमेंट की तारीख देखते हैं। मान लिया जाए कि सिप के जरिए आपके खाते से हर महीने की 10 तारीख को पैसे कटता है। लेकिन यदि 10 तारीख शनिवार है तो आपको यूनिट का आवंटन 13 तारीख को हुआ तो आपके होल्डिंग पीरियड की गणना 13 तारीख से शुरू होगी। आप इसकी जानकारी अपने डीमैट अकाउंट से भी ले सकते हैं।

कैसे होती है शार्ट टर्म टैक्स की गणना

STCG यानी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स की गणना भी दो अलग-अलग श्रेणी में की जाती है। इक्विटी ऑरिएंटेड स्कीम पर 15 फीसदी टैक्स लगता है। दूसरी श्रेणी के फंड्स से मुनाफे पर टैक्स देना होता है। इन फंड्स से मुनाफा आपकी नियमित कमाई मानी जाती है। ऐसे में इन पर टैक्स आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से लगेगा। यदि आपका टैक्स स्लैब 30 फीसदी वाला है तो आपको 30 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना होगा। यदि आपका टैक्स स्लैब 10 फीसदी के हिसाब वाला है तो आपको 10 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना होगा।

कैसे होती है लांग टर्म टैक्स की गणना

म्यूचुअल फंड की इक्विटी ऑरिएंटेड स्कीम पर एक लाख तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स फ्री होता है। यदि आपका कैपिटल गेन एक लाख रुपये से ज्यादा का है तो आपको इनकम टैक्स भरना होगा। इसमें एक लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी पर 10 फीसदी का इनकम टैक्स लगेगा। हालांकि, इस श्रेणी में भी टैक्स की छूट मिलती है। लेकिन इसमें टैक्स की छूट तभी मिलेगी, जबकि इसमें STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) भरा गया हो।

डिविडेंड पर टैक्स

केंद्रीय बजट 2020 में किए गए संशोधनों के अनुसार, किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम द्वारा दिए गए लाभांश पर क्लासिकल मैनर से कर लगाया जाता है। मतलब कि निवेशकों द्वारा प्राप्त लाभांश को उनकी कर योग्य आय में जोड़ा जाता है और उनके संबंधित आयकर स्लैब दरों पर कर लगाया जाता है। पहले, लाभांश निवेशकों के हाथों में कर-मुक्त थे क्योंकि कंपनियों को लाभांश के रूप में निवेशकों के साथ अपने मुनाफे को साझा करने से पहले डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) का भुगतान करना पड़ता था। उस दौर में निवेशकों के हाथों प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक के लाभांश (घरेलू कंपनियों से प्राप्त) कर मुक्त थे।

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