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आरबीआई के नए क्यूआर कोड नियमों से बदलेगी पेमेंट व्यवस्था की तस्वीर

क्यूआर कोड आधारित भुगतान व्यवस्था में आप अपने फोन को एक स्टिकर पर लगाते हैं और आपका पेमेंट तुरंत हो जाता है। इसे दुकानदारों को डिजिटल पेमेंट्स की व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते सबसे कम लागत के विकल्प के रूप में देखा जाता है। इसके लिए पॉइंट ऑफ सेल (पोओएस) मशीन की तरह कोई अपफ्रंट कॉस्ट नहीं देनी पड़ती है। इसमें मर्चेंट डिस्काउंट रेट पेमेंट के दूसरे विकल्पों से कम है। क्या है इसके फायदे आइए जानते हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम 28 Oct 2020, 12:10 pm
अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजा नियमों के बाद इन क्यूआर कोड को मल्टीपल पेमेंट ऐप्लिकेशंस को स्वीकार करना होगा। पिछले सप्ता आरबीआई ने इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड्स को अनिवार्य बनाने की तरफ एक कदम बढ़ाया। अभी दो इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड्स -भारत क्यूआर और यूपीआई क्यूआर- उपलब्ध हैं। ये जारी रहेंगे। किसी भी proprietary codes को मार्च 2022 तक चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना होगा और किसी भी नए क्यूआर कोड को सभी पेमेंट्स ऑप्शंस को स्वीकार करना होगा।
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आरबीआई के नए क्यूआर कोड नियमों से बदलेगी पेमेंट व्यवस्था की तस्वीर



इस्तेमाल करना होगा आसान

आरबीआई ने 22 अक्टूबर को पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स (पीएसओ) के पेमेंट ट्रांजैक्शन के नया proprietary QR code लॉन्च करने पर पाबंदी लगा दी और उन्हें कम से कम एक इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड में स्विच करने को कहा है। इससे समान क्यूआर कोड मल्टीपल पेमेंट ऐप्स में काम कर सकेगा। आरबीआई के इन दिशानिर्देशों का मकसद देश में डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार करना है।

क्यूआर को क्या है?

क्यूआर कोड टू-डाइमेंशनल मशीन रीडेबल बारकोड होते हैं जिसका इस्तेमाल पॉइंट ऑफ सेल पर मोबाइल पेमेंट्स के लिए किया जाता है। क्यूआर कोड में काफी जानकारी स्टोर की जा सकती है। जापान की कंपनी डेंसो वेव ने 1990 के दशक में क्यूआर कोड का विकास किया था।

क्या है जरूरत

एक क्लोज्ड लूप क्यूआर सिस्टम केवल अपने डिप्लॉयर पर मोबाइल ऐप से पेमेंट स्वीकार करता है। यह थर्ड पार्टी पेमेंट ऐप्स और बैंकों को बीच प्रिंसिपल ऑफ इंटरऑपरेबिलिटी के खिलाफ है जो युनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) इकोसिस्टम को संचालित करता है। इतना ही नहीं, पेमेंट कंपनियां और बैंक भी अब कॉन्टेक्टलेस कार्ड पेमेंट्स स्वीकार के लिए क्यूआर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए वे भारत क्यूआर का इस्तेमाल कर रहे हैं जो एनपीसीआई, वीजा और मास्टरकार्ड के बीच एक स्वीकार्य सॉल्यूशन है। इसमें मर्चेंट्स को अपनी जानकारी साझा किए बिना बिलों को भुगतान किया जाता है।

जारी रहेंगे यूपीआई और भारत क्यूआर

केंद्रीय बैंक ने एक अधिसूचना में कहा कि यूपीआई क्यूआर और भारत क्यूआर अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगे। इसमें कहा गया है कि proprietary QR codes इस्तेमाल करने वाले पीएसओ एक या उससे अधिक इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड में शिफ्ट कर जाएंगे। यह प्रक्रिया 31 मार्च 2022 तक पूरी हो जानी चाहिए।

एफिशएंसी बढ़ेगी

आरबीआई का कहना है कि इन फैसलों से पेमेंट स्वीकार करने की व्यवस्था मजबूत होगी और इंटरऑपरेबिलिटी से यूजर्स को सुविधा होगी। भारत में क्यूआर कोड पेमेंट सिस्टम्स मोटे तौर पर तीन तरह के अलग-अलग क्यूआर कोड पेमेंट्स को सपोर्ट करता है। इनमें भारत क्यूआर, यूपीआई क्यूआर और Proprietary QR शामिल हैं।

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