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349 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स की लागत 2 लाख करोड़ रुपये बढ़ी

देश में 150 करोड़ रुपये प्रत्येक से अधिक के 349 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कॉस्ट लगभग 2 लाख करोड़ रुपये बढ़ी है...

पीटीआई 19 Feb 2018, 8:04 am

नई दिल्ली

नवभारतटाइम्स.कॉम 349 infrastructure projects cost rs 2 lakh crore more
349 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स की लागत 2 लाख करोड़ रुपये बढ़ी

देश में 150 करोड़ रुपये प्रत्येक से अधिक के 349 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कॉस्ट लगभग 2 लाख करोड़ रुपये बढ़ी है। इसके पीछे प्रोजेक्ट में देरी और अन्य कारण हैं। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स 150 करोड़ रुपये और इससे अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी करती है।

मिनिस्ट्री की अक्टूबर 2017 के लिए नई रिपोर्ट में बताया गया है, '1,283 प्रोजेक्ट्स को लागू करने की कुल वास्तविक कॉस्ट 15,58,352.33 करोड़ रुपये थी और इन्हें पूरा करने की अनुमानित कॉस्ट 17,59,443.87 करोड़ रुपये होने की संभावना है। यह वास्तविक कुल कॉस्ट में 12.90 पर्सेंट या 2,01,091.54 करोड़ रुपये की वृद्धि है।' इन 1,283 प्रोजेक्ट्स में से 349 की कॉस्ट और 302 को पूरा करने का समय बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स पर अक्टूबर 2017 तक खर्च 6,59,009.46 करोड़ रुपये था, जो अनुमानित कॉस्ट का 37.46 पर्सेंट है।

रिपोर्ट में बताया गया है, 'कुल 1,283 प्रोजेक्ट्स में से 12 पूरे हो गए हैं और 34 नए प्रोजेक्ट्स को शुरू किया गया है। इनमें से 13 प्रोजेक्ट्स अपने निर्धारित समय से आगे चल रहे हैं, 317 समय पर हैं, 302 देरी से चल रहे हैं और 349 प्रोजेक्ट्स की कॉस्ट बढ़ी है और 105 प्रोजेक्ट्स के लिए कॉस्ट और समय दोनों बढ़े हैं।' हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर देरी को प्रोजेक्ट पूरा करने के नए संशोधित कार्यक्रम के अनुसार देखा जाए तो देरी से चलने वाले प्रोजेक्ट्स की संख्या घटकर 258 रह जाएगी।

651 प्रोजेक्ट्स के लिए वास्तविक/अनुमानित शुरुआत की तिथि की जानकारी नहीं दी गई थी और मिनिस्ट्री ने यह तिथि बताने को कहा है जिससे इन प्रोजेक्ट्स की प्रगति की निगरानी की जा सके। रिपोर्ट में बताया गया है कि देरी से चल रहे 302 प्रोजेक्ट्स में से 49 प्रोजेक्ट में 1-12 महीने, 66 प्रोजेक्ट में 13-24 महीने, 108 प्रोजेक्ट में 25-60 महीने और 79 प्रोजेक्ट में 61 महीने और इससे अधिक की देरी हुई है। देरी के पीछे लैंड एक्विजिशन में अधिक समय लगना, फॉरेस्ट क्लीयरेंस, इक्विपमेंट की सप्लाई, में देरी, फंड की कमी, कानूनी मामले और कानून और व्यवस्था की स्थिति जैसे कारण हैं।

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