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सभी पुराने टैक्स मामलों का होगा वन-टाइम सेटलमेंट!

सेंट्रल एक्साइज और वैल्यू एडेड टैक्स से जुड़े सभी पुराने मुद्दों के एक बारे में निपटारे पर विचार किया जा सकता है। इससे गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के रास्ते में आ रही मुश्किलें दूर हो जाएंगी। GST काउंसिल 4 अगस्त को होने वाली...

इकनॉमिक टाइम्स 3 Aug 2018, 8:34 am
दीपशिखा सिकरवार, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम Untitled-1-Recovered

सेंट्रल एक्साइज और वैल्यू ऐडेड टैक्स से जुड़े सभी पुराने मुद्दों के एक बारे में निपटारे पर विचार किया जा सकता है। इससे गुड्स ऐड सर्विसेज टैक्स (GST) के रास्ते में आ रही मुश्किलें दूर हो जाएंगी। GST काउंसिल 4 अगस्त को होने वाली अपनी मीटिंग में इस प्रपोजल पर विचार करेगी।

अगर इसे मंजूरी मिलती है तो अधिकारी टैक्स से जुड़े पुराने मुद्दों से निपटने के बजाय GST कंप्लायंस पर ध्यान दे सकेंगे। इससे सरकार को एकमुश्त बड़ा रेवेन्यू भी मिल सकता है। प्रपोजल के अनुसार, इस स्कीम में असेसमेंट के साथ एरियर शामिल होंगे। देश में पिछले वर्ष 1 जुलाई से GST को लागू किया गया था। इसने सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, काउंटरवेलिंग ड्यूटी, वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), एंट्री टैक्स और परचेज टैक्स जैसे कई टैक्स की जगह ली थी। देश भर में VAT सिस्टम समान नहीं था और प्रत्येक राज्य के अपने कानून और प्रक्रियाएं थीं। व्यापारियों को प्रत्येक राज्य के VAT सिस्टम के अनुसार रिटर्न भरनी पड़ती थी।

इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने बताया कि हर राज्य में हरेक डीलर के लिए 2-3 VAT असेसमेंट बकाया है। इस वजह से कंपनियों को नए GST कानून और कंप्लायंस के साथ ही VAT के पुराने असेसमेंट को पूरा करने के लिए भी जूझना पड़ रहा है। टैक्स से जुड़े अधिकतर कर्मचारी अब GST में शिफ्ट हो गए हैं और पुराने टैक्स सिस्टम से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए बहुत कम कर्मचारी बचे हैं। इस वजह से भी टैक्स से जुड़े पुराने मामले अटक रहे हैं।

KPMG के पार्टनर (इनडायरेक्ट टैक्स), हरप्रीत सिंह ने बताया, 'देश भर में मौजूदगी रखने वाली FMCG और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स की कंपनियों के प्रत्येक राज्य में कम से कम 2-3 असेसमेंट लंबित हैं। इस वजह से 20 राज्य में बिजनेस रखने वाली किसी कंपनी के बकाया VAT असेसमेंट की कुल संख्या 40 से अधिक है।'

सरकार टैक्स से जुड़े विवाद और कानूनी मामले कम करना चाहती है। इसी वजह से सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) के साथ ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज की ओर से अपील दायर करने की वित्तीय सीमाओं को बढ़ाया गया है। CBIC अब ट्राइब्यूनल से 18 पर्सेंट, हाई कोर्ट से 22 पर्सेंट और सुप्रीम कोर्ट से 21 पर्सेंट मामले वापस लेगी। CBIC ने अपने अधिकारियों को पुराने मामलों का जल्द निपटारा करने और GST सिस्टम पर ध्यान देने का निर्देश दिया है। सरकार टैक्स से जुड़े पुराने मामलों के समाधन के लिए पेनल्टी और इंटरेस्ट में छूट दे सकती है।

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