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घटते मार्केट शेयर से बजाज ऑटो की हवा निकली

[ आशुतोष आर श्याम | ईटीआईजी ]ऑटोमोटिव सेक्टर में बजाज ऑटो के शेयरों को खरीदकर रखने में निवेशकों की दिलचस्पी घट सकती है। देश की दिग्गज मोटरसाइकिल ...

इकनॉमिक टाइम्स 25 Jul 2017, 7:42 am

[ आशुतोष आर श्याम | ईटीआईजी ]

ऑटोमोटिव सेक्टर में बजाज ऑटो के शेयरों को खरीदकर रखने में निवेशकों की दिलचस्पी घट सकती है। देश की दिग्गज मोटरसाइकिल कंपनी का जून क्वॉर्टर का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस कमजोर रहा है। कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ बहुत कम रही है और मीडियम टर्म में पॉजिटिव वॉल्यूम ट्रिगर भी नजर नहीं आ रहा है।

डोमेस्टिक मोटरसाइकिल मार्केट में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी लगातार घट रही है। रॉ मैटीरियल के दाम में बढ़ोतरी के चलते मार्जिन भी अब घट रहा है। बजाज ऑटो ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में लो सिंगल डिजिट प्रॉफिट ग्रोथ का अनुमान दिया है। इससे बाजार उसके वैल्यूएशन को घटाकर हिस्टोरिकल P/E 16 से कम कर सकता है।

डोमेस्टिक मोटरसाइकिल सेगमेंट की ग्रोथ में 22 पर्सेंट सालाना और थ्रीव्हीलर में 30 पर्सेंट सालाना की गिरावट के चलते जून क्वॉर्टर में कंपनी के वॉल्यूम में 11 पर्सेंट की तेज गिरावट आई। कुछ अंदरूनी और कुछ बाहरी वजहों से कंपनी के वॉल्यूम में गिरावट का जोर ज्यादा रहा।

जहां तक बाहरी कारणों की बात है तो जीएसटी लागू होने से पहले डीलर्स की तरफ से उठान कम होने के चलते होलसेल डिमांड घट गई। जीएसटी में पुराने स्टॉक पर इनपुट क्रेडिट नहीं मिलने के चलते डीलर्स को ~32 करोड़ का लॉस हुआ। यह नुकसान कंपनी को अपने खाते में डालना पड़ा। हालांकि, कंपनी मैनेजमेंट ने डिमांड रिबाउंड होने की उम्मीद जताई है।

कंपनी बाहरी कारणों के चलते डिमांड में आई गिरावट से तो अगले कुछ महीनों में उबर जाएगी, लेकिन उसके लिए बड़ी चिंता मार्केट शेयर में लगातार आ रही गिरावट है। फिस्कल ईयर 2017 की पहली तिमाही में कंपनी का 18 पर्सेंट मार्केट शेयर घटकर इस फिस्कल के पहले क्वॉर्टर में 14 पर्सेंट रह गया।

इकनॉमी सेगमेंट में दो क्वॉर्टर पहले कंपनी अपनी जो बाजार हिस्सेदारी वापस हासिल करने में कामयाब रही थी, वह फिर धीरे-धीरे हाथ से निकल रही है। इस सेगमेंट में कंपनी का मार्केट शेयर 25.3 पर्सेंट जून 2017 क्वॉर्टर में रह गया, जो साल भर पहले 35.1 था। यहां तक कि प्रीमियम सेगमेंट भी रॉयल एनफील्ड के चलते कॉम्पिटिटिव हो गया है, जहां बजाज ऑटो दो साल पहले मार्केट लीडर थी।

पिछले पांच साल में डोमेस्टिक मार्केट में कंपनी का वॉल्यूम तीन मौकों पर नेगेटिव रहा है और बाकी दो साल इसकी ग्रोथ लो सिंगल डिजिट में रही। मौजूदा फिस्कल ईयर में बजाज ऑटो का कोई नया ब्रांड लाने का प्लान नहीं है। इसे देखते हुए डोमेस्टिक मोटरसाइकिल मार्केट में कंपनी की ग्रोथ लो सिंगल डिजिट में रह सकती है।

थ्रीव्हीलर बिजनेस में भी कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ उत्साह बढ़ाने वाली नहीं रही है। बेहतरीन मार्जिन वाले इस सेगमेंट में कंपनी की डिमांड अब भी कमजोर है। यह सेगमेंट अब भी डीमॉनेटाइजेशन की मार से पूरी तरह नहीं उबर पाया है, लेकिन महाराष्ट्र और दिल्ली में 40,000 व्हीकल्स के लिए नए लाइसेंस से वॉल्यूम ग्रोथ को सपोर्ट मिल सकता है।

बाजार के जानकारों का अनुमान है कि मौजूदा फिस्कल ईयर में कंपनी का वॉल्यूम फ्लैट रह सकता है या इसमें मामूली गिरावट हो सकती है। एक्सपोर्ट मार्केट में 21 पर्सेंट रेवेन्यू ग्रोथ कंपनी का बड़ा सहारा है। कंपनी को लगभग 45 पर्सेंट रेवेन्यू एक्सपोर्ट मार्केट से मिलता है।

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