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बैंकों को सस्ता करना चाहिए लोन: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

आरबीआई ने कंपनियों और लोगों के लिए कर्ज सस्ता करने का जिम्मा बैंकों पर डाल दिया है। आरबीआई ने बुधवार को कहा कि उसने पॉलिसी रेट्स में अब तक जितनी कमी की है, उतनी कमी बैंकों ने लेंडिंग रेट्स में नहीं की है।

इकनॉमिक टाइम्स 9 Feb 2017, 10:09 am
मुंबई
नवभारतटाइम्स.कॉम banks should decrease the loan rates says rbi
बैंकों को सस्ता करना चाहिए लोन: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

आरबीआई ने कंपनियों और लोगों के लिए कर्ज सस्ता करने का जिम्मा बैंकों पर डाल दिया है। आरबीआई ने बुधवार को कहा कि उसने पॉलिसी रेट्स में अब तक जितनी कमी की है, उतनी कमी बैंकों ने लेंडिंग रेट्स में नहीं की है।

मॉनिटरी पॉलिसी स्टेटमेंट जारी करने के बाद आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने लेंडिंग रेट्स घटाने का जिम्मा बैंकों पर डाला। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'लेंडिंग रेट्स घटने की अब भी गुंजाइश है क्योंकि हमारे पॉलिसी रेट्स जनवरी 2015 से अब तक 80 से 85 बेसिस पॉइंट्स कम हो चुके हैं।' पटेल ने यह बात इस सवाल के जवाब में कही कि क्या उन्हें बैंकों से कर्ज सस्ता करने की उम्मीद है। बुधवार को आरबीआई ने पॉलिसी रेट्स को 6.25 पर्सेंट पर ही बनाए रखा।

पटेल के इस कॉमेंट से पहले के कुछ सप्ताहों में कई बैंकों ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट में कमी की है। एमसीएलआर वह फ्लोर रेट होता है, जिस पर बैंक सबसे अच्छी साख वाले अपने ग्राहकों को लोन देते हैं। एसबीआई ने 1 जनवरी से अपने एमसीएलआर को 90 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 8.90 पर्सेंट कर दिया है।

एसबीआई चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने ईटी से कहा, 'मुझे नहीं पता गवर्नर किस बैंक की बात कर रहे थे। एसबीआई ने तो एमसीएलआर में 200 बेसिस पॉइंट्स कमी कर दी है, जो 175 बेसिस पॉइंट्स के कट से ज्यादा है।' उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बैंक डिपॉजिट्स की रकम निकलने और क्रेडिट में तेजी आने के आधार पर डिपॉजिट रेट्स पर फैसला करेंगे।

आरबीआई के डेप्यूटी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा, 'नोटबंदी के कारण बैंकों के पास जमा रकम बढ़ी है, लिहाजा लेंडिंग रेट्स को घटना चाहिए और पॉलिसी रेट्स का असर दिखा है।'

ऐक्सिस बैंक के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर राजीव आनंद ने कहा, 'रेट कट करने का मामला फंड्स की कॉस्ट कम रहने से जुड़ा होता है। नोटबंदी के दौरान CASA डिपॉजिट्स में कम लागत वाला पैसा बड़ी मात्रा में आया, जिसे चलते दरें घटनी शुरू हुईं। अगर कल यह कम लागत वाली रकम बाहर जाने लगे तो रेट कट करना मुश्किल हो जाएगा।'

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