ऐपशहर

मोदी शासन के तहत कोल माइंस ऑक्शन में CAG ने गिनाईं खामियां

देश के कंट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल ने पिछले साल एनडीए सरकार की ओर से कराई गई कोयला खदानों की ई-नीलामी में गड़बड़ियां पकड़ी हैं। CAG का कहना है कि जॉइंट वेंचर्स या सब्सिडियरीज के जरिए कॉरपोरेट ग्रुप्स के कई बोलियां दाखिल करने से यह सुनिश्चित नहीं हुआ कि पहले दो चरणों में प्रतिस्पर्द्धा का ठीक-ठाक स्तर हासिल हुआ।

पीटीआई 26 Jul 2016, 6:42 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम cag picks holes in coal mines auction by nda govt
मोदी शासन के तहत कोल माइंस ऑक्शन में CAG ने गिनाईं खामियां


देश के कंट्रोलर ऐंड ऑडिटर जनरल ने पिछले साल एनडीए सरकार की ओर से कराई गई कोयला खदानों की ई-नीलामी में गड़बड़ियां पकड़ी हैं। CAG का कहना है कि जॉइंट वेंचर्स या सब्सिडियरीज के जरिए कॉरपोरेट ग्रुप्स के कई बोलियां दाखिल करने से यह सुनिश्चित नहीं हुआ कि पहले दो चरणों में प्रतिस्पर्द्धा का ठीक-ठाक स्तर हासिल हुआ।

संसद में मंगलवार को रखी गई एक रिपोर्ट में CAG ने कहा कि जॉइंट वेंचर्स और सब्सिडियरीज के जरिए कॉरपोरेट ग्रुप्स की ओर से कई बोलियां दाखिल किए जाने से 11 कोल ब्लॉक्स की नीलामी में हो सकता है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा सुनिश्चित न हो सकी हो। इसमें कहा गया, 'ऑडिट से भरोसे के साथ यह बात नहीं कही जा सकती है कि पहले दो चरणों में 11 कोल ब्लॉक्स की नीलामी के दौरान कॉम्पिटिशन का ठीक-ठाक स्तर हासिल हुआ।'

CAG ने कहा है कि 29 में से 11 कोल माइंस का ई-ऑक्शन पहले चरण में कराया गया था और दूसरे चरण में ई-ऑक्शन के चरण के कई क्वॉलिफाइड बिडर्स एक ही कंपनी/पैरंट सब्सिडियरी कंपनी/जॉइंट वेंचर के थे। इसमें कहा गया है कि स्टैंडर्ड टेंडर डॉक्युमेंट ने जॉइंट वेंचर्स की भागदारी की इजाजत दी थी और इसके साथ ही ई-ऑक्शन में हिस्सा ले सकने वाले क्वॉलिफाइड बिडर्स की संख्या सीमित कर दी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे में ऑडिट में भरोसे के साथ यह नहीं कहा जा सकता था कि पहले दो चरणों में 11 कोल माइंस की नीलामी की स्टेज 2 बिडिंग के दौरान प्रतियोगिता का ठीक-ठाक स्तर हासिल किया गया था।

इसमें कहा गया है कि तीसरी किस्त में कोल मिनिस्ट्री ने जॉइंट वेंचर के पार्टिसिपेशन के क्लॉज में बदलाव किया ताकि भागीदारी बढ़ाई जा सके। इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया में एक अधिकारी ने कहा कि क्वॉलिफाइड बिडर्स में केवल 6 पर्सेंट जॉइंट वेंचर कंपनियां थीं और केवल एक सफल बिडर जेवी कंपनी थी, जिससे साफ होता है कि इस प्रावधान ने कॉम्पिटिशन की राह में बाधा नहीं डाली थी।

अधिकारी ने कहा, 'दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑक्शन के इस प्रावधान को सही माना है। उसने कहा है कि यह प्रक्रिया न तो मनमानी थी, न बेतुकी और न ही इसे किसी खास बिडर को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया था।'

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग