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कैश की सप्लाई कम हुई, एटीएम में नहीं मिल रहा कैश

अगर आपको पिछले कुछ दिनों से एटीएम में कैश नहीं मिल रहा है तो यह दिक्कत सिर्फ आपके इलाके में ही नहीं है। देशभर में लोगों को इसका सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कैश की सप्लाई कम हो गई है।

इकनॉमिक टाइम्स 5 Apr 2017, 8:29 am
प्रतीक भक्त, मुंबई
नवभारतटाइम्स.कॉम cash in short supply note crunch returns
कैश की सप्लाई कम हुई, एटीएम में नहीं मिल रहा कैश

अगर आपको पिछले कुछ दिनों से एटीएम में कैश नहीं मिल रहा है तो यह दिक्कत सिर्फ आपके इलाके में ही नहीं है। देशभर में लोगों को इसका सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कैश की सप्लाई कम हो गई है। इससे लोगों के मन में नोटबंदी वाले दौर की याद ताजा हो गई है। वैसे तो 60 पर्सेंट एटीएम काम कर रहे हैं, लेकिन उनमें पूरा कैश नहीं डाला जा रहा है। इसलिए एटीएम में कैश जल्द खत्म हो जाता है और फिर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


इंडस्ट्री एग्जिक्युटिव्स का कहना है कि नए साल से कैश की सप्लाई सुधरी थी, लेकिन उसके बाद स्थिति और बेहतर नहीं हुई है। देश की बड़ी एटीएम मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में से एक के सीईओ ने बताया, 'हम एटीएम में 70 पर्सेंट कपैसिटी से कम कैश डाल रहे हैं। 100 रुपये के नोटों की सप्लाई को लेकर चिंता है। हमें 100 रुपये के बहुत नोट नहीं मिल रहे हैं, जिसे एटीएम में डाला जा सके।'

एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष खत्म होने और लोगों के सैलरी निकालने की वजह से अभी कैश की मांग बढ़ गई है। कैश लॉजिस्टिक्स कंपनी में कैश ट्रांसपोर्ट और एटीएम मैनेजमेंट का जिम्मा संभालने वाले एक और टॉप एग्जिक्यूटिव ने बताया, 'हर साल इस वक्त कैश की सप्लाई बढ़ती है ताकि लोगों की मांग पूरी की जा सके। इस साल पहले की तरह ही मांग है, लेकिन कैश सप्लाई में सुधार नहीं हुआ है। इससे देश के कई इलाकों में कैश की कमी हो गई है।'

उन्होंने बताया, 'आमतौर पर हम देखते आए हैं कि मार्च महीने में 35 पर्सेंट कैश आखिरी हफ्ते में आता है। इस साल वैसा नहीं हुआ।' इंडस्ट्री एग्जिक्युटिव्स ने यह भी बताया कि एक एटीएम में 30 लाख रुपये डाले जा सकते हैं, लेकिन उनकी पूरी कपैसिटी का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। मशीनों में 10 लाख रुपये से कम रकम डाली जा रही है इसलिए सामान्य की तुलना में उनका कैश जल्द खत्म हो जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के डेटा से पता चलता है कि मार्च महीने में सर्कुलेशन में 11.3 लाख करोड़ की करेंसी थी, जबकि पिछले साल इस समय 15.9 लाख करोड़ रुपये सिस्टम में थे।

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