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50 करोड़ से ज्यादा के डिफॉल्टर्स पर क्या कार्रवाई हुई, CIC ने सरकार-RBI से मांगा जवाब

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने कहा है कि 50 करोड़ रुपये से ज्यादा बैंक लोन के विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी फाइनैंस मिनिस्ट्री, मिनिस्ट्री फॉर स्टैटिस्टिक्स ऐंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन और आरबीआई...

इकनॉमिक टाइम्स 30 Aug 2018, 9:13 am
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम Untitled-1

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने कहा है कि 50 करोड़ रुपये से ज्यादा बैंक लोन के विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी फाइनैंस मिनिस्ट्री, मिनिस्ट्री फॉर स्टैटिस्टिक्स ऐंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन और आरबीआई को सार्वजनिक करनी चाहिए। सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा कि किसानों मामूली रकम पर डिफॉल्ट करते हैं तो उनके नाम सार्वजनिक किए जाते हैं। वहीं, 50 करोड़ से ज्यादा पर डिफॉल्ट करने वालों को छूट दे दी जाती है।

उन्होंने कहा कि 50 करोड़ रुपये से ज्यादा लोन का डिफॉल्ट करने वालों को वन टाइम सेटलमेंट के नाम पर ब्याज माफी और कई तरह की दूसरी सुविधाएं और बड़ी रियायतें दी जाती हैं और इज्जत बचाने के लिए उनके नाम भी पब्लिक से छिपाए जाते हैं। आयोग ने कहा कि 1998 से 2018 के बीच 30,000 से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी की क्योंकि वे कर्ज चुका पाने में नाकाम रहने के कारण शर्मिंदा थे।

आचार्युलु ने कहा, 'वो खेत में ही जिए और वहीं मरे, उन्हें धरती माता पर भरोसा था। उन्होंने उन 7000 अमीरों, पढ़े-लिखे उद्योगपतियों की तरह धरती माता को नहीं छोड़ा, जिन्होंने देश के हजारों करोड़ रुपये लूटे।' उन्होंने अपने ऑर्डर में कहा कि आरटीआई एक्ट के सेक्शन 4(1)(c) के प्रोएक्टिव डिस्क्लोजर क्लॉज के मुताबिक सभी सरकारी विभागों के लिए जरूरी है कि वे जनता को प्रभावित करनेवाले अहम पॉलिसी बनाते या फैसलों का ऐलान करते समय सभी तथ्यों को सार्वजनिक करें, जबकि 4(1)(d) के मुताबिक उन्हें प्रभावित लोगों को अपने प्रशासनिक और अर्धन्यायिक फैसलों की वजह के बारे में बताना होगा।

सूचना आयुक्त ने कहा कि फाइनैंस मिनिस्ट्री, मिनिस्ट्री फॉर स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन और आरबीआई की 'जिम्मेदारी' बनती है कि वे 50 करोड़ रुपये या ज्यादा की रकम के डिफॉल्टर्स से निपटने की अपनी पॉलिसी के बारे में पब्लिक को समय-समय पर बताते रहें। उन्होंने यह भी बताना चाहिए कि वे उनसे किस तरह निपटना चाहते हैं और देश का पैसा और उसकी अर्थव्यवस्था को कैसे बचाना चाहते हैं। उनके मुताबिक इस बारे में आरबीआई ने यह दलील दी थी कि बैंकिंग सिस्टम के रेगुलेटर और सुपरवाइजर के तौर पर जनहित में सूचनाएं सार्वजनिक करने को लेकर उसके पास विवेकाधिकार है। उसने सूचना सार्वजनिक करने से मना करने के लिए सेक्शन 8(1) का हवाला दिया।

आचार्युलु ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई की सभी दलीलों को खारिज करते हुए उसे डिस्क्लोजर के लिए सीआईसी की तरफ से जारी सभी आदेशों का पालन करने का ऑर्डर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के मद्देनजर आरबीआई के पास मांगी गई सूचना देने के सिवा कोई चारा नहीं बचता।' उन्होंने कहा कि आरबीआई ने बैंकों को 25 लाख रुपये के विलफुल डिफॉल्टर्स की लिस्ट तैयार करने का अधिकार दिया है और यह भी पक्का किया है कि किसी जेनुइन लोन वाले का नाम विलफुल डिफॉल्टर्स की लिस्ट में पब्लिश नहीं किया जाएगा तो फिर 50 करोड़ या ज्यादा के विलफुल डिफॉल्टर का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा सकता।

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