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कई को-ऑपरेटिव बैंकों के पास डिपॉजिट से कम निकली असल रकम

एक को-ऑपरेटिव बैंक ने कागज पर 242 करोड़ का डिपॉजिट दिखाया, उसके पास वास्तविक रकम 100 करोड़...

इकनॉमिक टाइम्स 20 Jan 2017, 9:05 am
दीपशिखा सिकरवार, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम demonetization actual amount of many cooperative banks turned out to be less from deposits shown
कई को-ऑपरेटिव बैंकों के पास डिपॉजिट से कम निकली असल रकम

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नोटबंदी के बाद को-ऑपरेटिव बैंकों का एक गड़बड़झाला पकड़ा है। इन बैंकों के बही-खातों में जो डिपॉजिट दिखाया गया है, उनके पास 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट उससे कम हैं। जयपुर, राजकोट और पुणे के कई को-ऑपरेटिव बैंकों में ऐसी गड़बड़ी का पता चला है। इससे लग रहा है कि यह समस्या काफी बड़ी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच करने वाली शाखा ने इस गड़बड़ी की जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को भी दी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एक बड़े अधिकारी ने बताया, ‘ऐसे कई मामलों का पता चला है, जिनमें कागज पर जो डिपॉजिट दिखाया गया है, वास्तविक नोट उससे कम हैं।’

उन्होंने बताया कि यह मामला तब पकड़ में आया, जब इनकम टैक्स अधिकारियों ने एक सर्वे किया और कैश ले जा रही एक वैन को पकड़ा। यह वैन को-ऑपरेटिव बैंक की थी। एक बैंक में कागज पर 242 करोड़ रुपये का डिपॉजिट दिखाया गया, जबकि उसके पास 100 करोड़ रुपये से भी कम के नोट थे। अब तक ऐसी गड़बड़ी को-ऑपरेटिव बैंकों में ही दिखी है, लेकिन इनकम टैक्स अधिकारी कमर्शल बैंकों के डिपॉजिट और विदड्रॉल डेटा की पड़ताल कर रहे हैं। यह पता लगाने के लिए यह काम किया जा रहा है कि कहीं इस रास्ते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए तो नहीं हुआ।

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माना जा रहा है कि काला धन रखने वालों ने लॉन्ड्रिंग के लिए कई रास्ते अपनाए होंगे। नोटबंदी से को-ऑपरेटिव बैंकों को अलग रखा गया था। हालांकि, एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट की ऐसी कई रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें नोटबंदी के बाद को-ऑपरेटिव और दूसरे बैंकों में बड़ी संख्या में बैंक खाते खोलने और उनमें रकम जमा कराए जाने का जिक्र है।

आरबीआई ने अब तक यह नहीं बताया है कि नोटबंदी के बाद पुरानी करेंसी में कितना पैसा बैंकों में जमा कराया गया है। वह इस डेटा की जांच कर रहा है। रिजर्व बैंक को इसमें डबल काउंटिंग और नकली करेंसी का भी पता लगाना है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल बुधवार को वित्तीय मामलों की संसदीय समिति के सामने पेश हुए थे। इस दौरान उन्होंने डिपॉजिट के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया।

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नोटबंदी का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को किया था। उन्होंने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों में 15.44 लाख करोड़ रुपये की रकम को अमान्य घोषित किया था। सरकार ने पुराने नोट बैंकों में जमा कराने के लिए 30 दिसंबर की डेडलाइन दी थी। बैंकों से हर उस खाते की जानकारी मांगी गई है, जिसमें 9 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच 2.5 लाख रुपये से अधिक रकम जमा की गई है। वहीं, किसी खाते में साल में 10 लाख रुपये से अधिक रकम जमा होने और क्रेडिट कार्ड बकाया के लिए 1 लाख रुपये के कैश पेमेंट की डिटेल भी मांगी गई है। अधिकारी ने बताया कि ऐसे कई मामलों का पता चला है कि जहां नो योर कस्टमर नियम की अनदेखी कर खाते खोले गए थे।

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