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विदेशी एंप्लॉयी की सैलरी पर FEMA के घेरे में आ सकती हैं MNC

[ दीपशिखा सिकरवार | नई दिल्ली ]जिन मल्टीनेशनल कंपनियों ने इंडिया में काम करने वाले विदेशी एंप्लॉयीज को दी गई सैलरी पर सर्विस टैक्स लगाने के सरकार ...

नवभारतटाइम्स.कॉम 21 Apr 2016, 9:00 am

[ दीपशिखा सिकरवार | नई दिल्ली ]

जिन मल्टीनेशनल कंपनियों ने इंडिया में काम करने वाले विदेशी एंप्लॉयीज को दी गई सैलरी पर सर्विस टैक्स लगाने के सरकार के फैसले को चुनौती दी है, उनको इससे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। वे कंपनियां मनी लॉउंड्रिंग और दूसरे ऐसे मामलों से निपटने के लिए बनाए गए कानून फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत स्क्रूटनी के दायरे में आ सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम विदेशी निवेश को हतोत्साहित कर सकता है जबकि सरकार अपने इकनॉमिक प्रोग्राम के तहत फॉरेन इनवेस्टमेंट अट्रैक्ट करने की कोशिश में जुटी हुई है।

एक सरकारी सूत्र ने कहा कि इंडिया में काम करने वाले किसी भी एंप्लॉयी को FEMA के तहत फॉरेन करेंसी में पेमेंट देने की इजाजत नहीं है। उन्होंने बताया कि सर्विस टैक्स अथॉरिटीज ने पहले ही इन मामलों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के पास भेज दिया है। टैक्स अथॉरिटीज की दलील है कि इन कंपनियों ने फंड ट्रांसफर करने से पहले RBI की परमिशन लेने के वक्त शायद पेमेंट को सैलरी मद में नहीं दिखाया होगा। सूत्र ने कहा, 'अथॉरिटीज को यह पता लगाना होगा कि ये ट्रांसफर कैसे किए जा रहे हैं।'

आमतौर पर विदेशी एंप्लॉयी रखनेवाली कंपनियां उनकी सैलरी का एक हिस्सा इंडिया में चुकाती हैं और बाकी रकम उसके मूल देश में दी जाती है। बाद में उस रकम को इंडियन यूनिट पेरेंट कंपनी को रीम्बर्स कर देती है।

टैक्स अथॉरिटीज ने फॉरेन पेरेंट कंपनियों को हुई अदायगी को कड़ाई से चेक करने के बाद दलील दी थी कि उनको इन पर सर्विस टैक्स चुकाना होगा क्योंकि ये 'मैनपावर सप्लाई सर्विसेज' के दायरे में आते हैं। अथॉरिटीज का कहना था कि फॉरेन कंपनी इंडियन कंपनी को टैक्सेबल सर्विस दे रही है। सर्विस टैक्स इंडियन यूनिट की तरफ से फॉरेन पेरेंट कंपनी को दिए गए पेमेंट पर लगता है। ऐसा इसलिए कि इसको रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म में इंपोर्ट ऑफ सर्विस माना जाता है।

सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट के ऑडिट विंग ने कई कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कंपनियों ने यह दलील देकर इसको चुनौती दी थी कि ये पेमेंट इंडिया में काम करने वाले उनके खुद के एंप्लॉयी को दिए गए हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि मामले की व्याख्या की जानी चाहिए क्योंकि सरकार फॉरेन कैपिटल अट्रैक्ट करने की कोशिश में जुटी है और उसको कई सेक्टर में एक्सपर्टाइज की जरूरत है।

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