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सरकार का ई-मार्केटप्लेस चलाने में फ्लिपकार्ट, ऐमजॉन ने दिखाई दिलचस्पी

ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट भारत सरकार के ई-मार्केटप्लेस पोर्टल (GeM) को ऑपरेट करने की संभावना तलाश रही हैं। सरकारी मंत्रालय और डिपार्टमेंट्स इस मार्केटप्लेस के जरिए लैपटॉप, एसी से लेकर फर्नीचर और यहां तक कि रोजमर्रा की स्टेशनरी जैसी जरूरत का सामान खरीदेंगे।

इकनॉमिक टाइम्स 24 May 2017, 8:17 am
कृतिका सुनेजा/सुरभि अग्रवाल, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम gem

ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट भारत सरकार के ई-मार्केटप्लेस पोर्टल (GeM) को ऑपरेट करने की संभावना तलाश रही हैं। सरकारी मंत्रालय और डिपार्टमेंट्स इस मार्केटप्लेस के जरिए लैपटॉप, एसी से लेकर फर्नीचर और यहां तक कि रोजमर्रा की स्टेशनरी जैसी जरूरत का सामान खरीदेंगे। सरकार चाहती है कि फूल और टैक्सी सर्विस जैसी चीजें भी ई-मार्केटप्लेस पर ऑफर की जाएं। पिछले साल अगस्त में GeM को लॉन्च किया गया था। इसका मकसद सरकारी मंत्रालयों और विभागों की खरीदारी को पारदर्शी बनाना है।

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अनुमान के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारें हर साल 5-7 लाख करोड़ रुपये के सामान हर साल खरीदती हैं। जिस कंपनी को ई-मार्केटप्लेस ऑपरेट करने के लिए चुना जाएगा, उसे कुल वैल्यू का 0.5 पर्सेंट तक कमिशन मिल सकता है। कई सूत्रों ने बताया कि फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन ने इस मार्केटप्लेस के कॉन्ट्रैक्ट में दिलचस्पी दिखाई है, जिसके लिए हाल ही में सरकार ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) किया था। सरकार की तरफ से बोली से पहले बुलाई गई मीटिंग में दोनों कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। RFP जमा करने की तारीख 1 जून तय की गई है।

फ्लिपकार्ट इस मार्केटप्लेस की टेक्नॉलजी रिक्वायरमेंट को पूरा करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट के साथ हाथ मिला सकती है क्योंकि RFP में आईटी और ई-कॉमर्स कंपनियों को मिलकर बोली लगाने की आजादी दी गई है। खबर है कि सॉफ्टवेयर और सर्विसेज कंपनियां टीसीएस, एक्सेंचर और विप्रो भी 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट में दिलचस्पी दिखा रही हैं। इस कॉन्ट्रैक्ट की अवधि दो साल और बढ़ाई भी जा सकती है। सूत्रों ने बताया कि एमेजॉन इसके लिए क्लाउड सर्विस देने में दिलचस्पी ले रही है। उसने बोली लगाने के लिए अमेरिकी पैरेंट फर्म से इजाजत भी ले ली है।

एक बड़ी टेक्नॉलजी कंपनी के एग्जिक्यूटिव ने बताया कि प्रॉजेक्ट अच्छी तरह चल रहा है और फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है। उन्होंने बताया, ‘फ्लिपकार्ट लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर है। वह इस काम को समझती है। ऐमजॉन भी इसमें इंटरेस्ट ले रही है।’ इन कंपनियों को किसी टेक्नोलॉजी वेंडर से पार्टनरशिप करनी पड़ेगी क्योंकि वे अपना प्लेटफॉर्म सरकार को ऑफर नहीं कर सकतीं।

ऑफिशल ने बताया, ‘अगर सभी सरकारी डिपार्टमेंट्स इस मार्केटप्लेस से खरीदारी करते हैं तो यह कंपनियों के लिए बड़ा मौका है। यह प्रोजेक्ट 900 से 1,000 करोड़ रुपये की बिजनस ऑपर्च्युनिटी हो सकती है।’ सरकार के ई-मार्केटप्लेस पर 21,000 प्रॉडक्ट्स और 17 सेवाएं अभी ऑफर की जा रही हैं। अभी सरकार खुद ही इसे ऑपरेट कर रही है। पिछले साल अगस्त से इस साल 30 अप्रैल के बीच इस मार्केटप्लेस से 454 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई है।

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