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पहले साल में उसे 4 करोड़ का इंक्रीमेंट देना... हिमालय का वो योगी जिसके इशारे पर दनादन फैसले करती गईं NSE की पूर्व एमडी

चित्रा रामकृष्ण (Chitra Ramkrishna) अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक एनएसई (NSE) की एमडी एवं सीईओ थीं। चित्रा बाबा को शिरोमणी बुलाती थी और बाबा उन्हें चितसोम बुलाते थे। रामकृष्ण के अनुसार यह अज्ञात व्यक्ति या योगी कथित रूप से एक आध्यात्मिक शक्ति थी, जो अपनी इच्छानुसार कहीं भी प्रकट हो सकती थी।

Pawan Jayaswal | Edited byपवन जायसवाल | टाइम्स न्यूज नेटवर्क 13 Feb 2022, 11:02 am

हाइलाइट्स

  • हिमालय के योगी से कभी नहीं मिली थीं चित्रा रामकृष्ण
  • सिर्फ मेल आईडी पर होती थी बातचीत
  • चित्रा बाबा को शिरोमणी कहकर बुलाती थी
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नवभारतटाइम्स.कॉम Chitra Ramakrishna
एक बाबा से निर्देश लेती थीं एनएसई की पूर्व एमडी
नई दिल्ली: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ( National Stock Exchange) के संस्थापक सदस्यों में से एक और एनएसई (NSE) की पूर्व एमडी व सीईओ चित्रा रामकृष्ण (Chitra Ramkrishna) काफी सुर्खियों में हैं। रामकृष्ण कई वर्षों से अपने महत्वपूर्ण कारोबारी फैसलों में एक बाबा से सलाह ले रही थीं। एक ऐसा बाबा (योगी), जो हिमालय में रहता था और तीन वेदों के नाम वाली एक मेल आईडी का इस्तेमाल करता था। यह बाबा मेल पर रामकृष्ण को निर्देश देता था और फैसले हो जाते थे। खास बात यह है कि रामकृष्ण इस योगी से कभी मिली ही नहीं, लेकिन वह करीब 20 वर्षों से इस योगी से मेल पर बातचीत कर रही थीं।
बाबा की हर बात मानती थीं रामकृष्ण
रामकृष्ण ने यह स्वीकार किया है कि वह इस अनाम बाबा से कभी नहीं मिली। उनका कहना है कि वे मेल आईडी rigyajursama@outlook.com पर उनसे करीब 20 वर्षों से संपर्क में थीं। बाबा की इस मेल आईडी में ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के आगे के दो अक्षर हैं। रामकृष्ण ने कुछ अत्यधिक महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट और बिजनस से जुड़े फैसलों में इस बाबा से निर्देश लिए। इन कई निर्देशों में से एक में बाबा ने चित्रा से आनंद सुब्रमण्यम को एक्सचेंज में समूह परिचालन अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक का सलाहकार नियुक्त करने के लिए कहा था। इसके साथ ही बाबा ने सुब्रमण्यम की नियुक्ति के पहले साल में ही उसे तीन इंक्रीमेंट देने का भी निर्देश दिया था। यह चार करोड़ रुपये था। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि उसकी सभी अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं फर्स्ट क्लास में हो और एमडी से अगला केबिन उसी का हो। यही नहीं, रामकृष्ण परफॉर्मेंस अप्रेजल की रेटिंग देते हुए भी बाबा से सलाह लेती थी और सुब्रमण्यम को हमेशा A+ रेटिंग देती थीं।
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गोपनीय मामलों तक हो गई थी पहुंच
इस तरह भले ही सुब्रमण्यम भारत के सबसे बड़े एक्सचेंज के 'प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्ति' के रूप में चिह्नित नहीं थे, लेकिन उनकी पहुंच एनएसई के सबसे गोपनीय मामलों तक हो गई थी। इन सब बातों का खुलासा बाजार नियामक सेबी (Sebi) द्वारा की गई जांच से हुआ है। सेबी ने अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 के बीच रामकृष्ण, उनके पूर्ववर्ती रवि नारायण और एनएसई के कुछ अन्य प्रमुख अधिकारियों द्वारा किये गए कार्यों की जांच की है। सेबी ने इस जांच की रिपोर्ट शुक्रवार को अपनी वेबसाइट पर जारी की। एनएसई की रिपोर्ट से सामने आया कि रामकृष्ण एनएसई का पांच वर्षों का कारोबारी अनुमान, वित्तीय स्थिति, डिविडेंड रेश्यो, कारोबारी योजनाएं, बोर्ड का एजेंडा, विचार-विमर्श और अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी बाबा से साझा करती थीं।

बाबा को बुलाती थीं शिरोमणी
रामकृष्ण अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक एनएसई की एमडी एवं सीईओ थीं। चित्रा बाबा को शिरोमणी बुलाती थी और बाबा उन्हें चितसोम बुलाते थे। रामकृष्ण के अनुसार यह अज्ञात व्यक्ति या योगी कथित रूप से एक आध्यात्मिक शक्ति थी, जो अपनी इच्छानुसार कहीं भी प्रकट हो सकती थी।

सेबी ने लगाया बड़ा जुर्माना
सेबी ने अपने 190 पन्नों के आदेश में पाया कि बाबा ने उन्हें सुब्रमण्यम को नियुक्त करने के लिए निर्देशित किया। इस मामले में कार्रवाई करते हुए सेबी ने रामकृष्ण और सुब्रमण्यन के साथ ही एनएसई और उसके पूर्व प्रबंध निदेशक तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि नारायण तथा अन्य पर भी जुर्माना लगाया। नियामक ने रामकृष्ण पर तीन करोड़ रुपये, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, नारायण और सुब्रमण्यन पर दो-दो करोड़ रुपये तथा वी आर नरसिम्हन पर छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही रामकृष्ण और सुब्रमण्यन को तीन साल की अवधि के लिए किसी भी बाजार ढांचागत संस्थान या सेबी के साथ पंजीकृत किसी भी मध्यस्थ के साथ जुड़ने को लेकर रोक लगायी गयी है। इसके अलावा नियामक ने एनएसई को कोई भी नया उत्पाद पेश करने से छह महीने के लिये रोक दिया।

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