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NBFC के लिए लिक्विडिटी पर RBI और सरकार में होगा टकराव!

आरबीआई बोर्ड की बैठक में नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों (NBFC) को पैसा मुहैया कराने के लिए एक खास इंतजाम करने की जरूरत पर केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच टकराव हो सकता है। एक सूत्र ने कहा, 'हाउजिंग सेल्स लगभग रुक गई है। पहले बैंक क्रेडिट से इनकार किया जा रहा था, अब एनबीएफसी ने भी रोक दिया है।'

इकनॉमिक टाइम्स 19 Nov 2018, 8:54 am
दीपशिखा सिकरवार, जोएल रेबेलो/नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम gov and rbi may clash over nbfc liquidity
NBFC के लिए लिक्विडिटी पर RBI और सरकार में होगा टकराव!

आरबीआई बोर्ड की सोमवार को होने वाली बैठक में नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों (NBFC) को पैसा मुहैया कराने के लिए एक खास इंतजाम करने की जरूरत पर केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच टकराव हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, लिक्विडिटी क्रंच यानी लेनदेन लायक नकदी की कमी के कारण NBFC के कर्ज देना करीब-करीब बंद कर देने से चिंतित सरकार यह गतिरोध तोड़ना चाहती है, जिसके कारण माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज को दिक्कत हो रही है, जहां लाखों लोग काम करते हैं।

एक सूत्र ने कहा, 'हाउजिंग सेल्स लगभग रुक गई है। पहले बैंक क्रेडिट से इनकार किया जा रहा था, अब एनबीएफसी ने भी रोक दिया है।' गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाला 18 सदस्यों का बोर्ड मुंबई में बैठक करेगा। इसमें लिक्विडिटी की मौजूदा स्थिति, आरबीआई के प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन के दायरे में आए बैंकों के लिए कर्ज देने के नियमों को नरम करने और सरकार को आरबीआई का अतिरिक्त रिजर्व ट्रांसफर करने सहित कई मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इनमें से कई मुद्दे 24 अक्टूबर की पिछली मीटिंग में सुलझ नहीं सके थे। तब बताया गया था कि आरबीआई अपने रुख पर अड़ा हुआ है।

सरकार और आरबीआई के संबंध पिछले कुछ महीनों में खराब हुए हैं। केंद्र ने तो आरबीआई को आरबीआई ऐक्ट के सेक्शन 7 का हवाला भी दे दिया था। इस सेक्शन का उपयोग पहले कभी नहीं किया गया है। यह सेक्शन सरकार को जनहित का हवाला देकर आरबीआई को निर्देश देने की ताकत देता है। बताया जा रहा है कि आरबीआई ने एसबीआई और एचडीएफसी बैंक के बयानों का हवाला देकर अनौपचारिक रूप से सरकार से कहा है कि लिक्विडिटी की कोई समस्या नहीं है। हालांकि, केंद्र का मानना है कि आरबीआई स्थिति को जमीनी हालात का पता नहीं है।

आरबीआई यह दलील दे सकता है कि बाजार में घबराहट के बावजूद कोई डिफॉल्ट नहीं हुआ है और इसे देखते हुए नियमों में बदलाव की जरूरत नहीं है। वह यह भी कह सकता है कि NBFC के लिए स्पेशल विंडो जैसे कदमों से इकॉनमी को मदद मिलने के बजाए यह मेसेज जाएगा कि कोई गंभीर संकट है जिससे प्रतिकूल परिणाम मिल सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह साफ कर दिया है कि पॉलिसीमेकर्स को ग्रोथ बढ़ाने के लिए फौरी तौर पर उपाय नहीं करने चाहिए, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि लिक्विडिटी की तंगी से इकनॉमिक ग्रोथ प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

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