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अटके एक्सपोर्ट पर फास्ट गियर में आई सरकार

जीएसटी लागू होने के बाद से एक्सपोर्ट शिपमेंट में आ रही गिरावट और हैंडीक्राफ्ट क्लस्टर्स में काम लगभग बंद होने पर सरकार ...

इकनॉमिक टाइम्स 10 Jul 2017, 9:00 am

नई दिल्ली

जीएसटी लागू होने के बाद से एक्सपोर्ट शिपमेंट में आ रही गिरावट और हैंडीक्राफ्ट क्लस्टर्स में काम लगभग बंद होने पर सरकार अब हाई अलर्ट मोड में दिख रही है। सभी विभाग यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि छोटे निर्यातकों के कंसाइनमेंट छोटी-मोटी औपचारिकताओं की वजह से न रुकने पाएं। रविवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम (सीबीईसी) के साथ ही एयरपोर्ट और इनलैंड डिपो के शीर्ष अधिकारियों ने निर्यातकों को भरोसा दिलाया कि कुछ दिनों के भीतर ही शिपमेंट की सभी बाधाएं दूर कर ली जाएंगी।

जीएसटी नॉर्म्स के चलते शिपमेंट में रुकावट और लाखों कारीगरों का काम ठप पड़ने की खबरों के बीच एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) ने रविवार को करीब 300 निर्यातकों और शीर्ष अधिकारियों की अर्जेंट ओपन हाउस मीटिंग कराई। सीबीईसी के कमिश्नर प्रदीप गोयल ने कहा कि 7 जुलाई को जारी संशोधित नोटिफिकेशन में साफ किया जा चुका है कि बिना टैक्स निर्यात करने के लिए बॉन्ड या बैंक गारंटी भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लेटर ऑफ अंडरटेकिंग ही काफी होगा। ड्यूटी ड्रॉ बैक और दूसरे सेगमेंट में रुकावट की शिकायतें आ रही हैं, लेकिन अब सभी विभागों को कहा गया है कि गैरजरूरी कागजी औपचारिकता की वजह से कोई कंसाइनमेंट न रोकें। आईजीआई एयरपोर्ट के कमिश्नर (कस्टम) सुनील सिन्हा और तुगलकाबाद इनलैंड डिपो के कमिश्नर संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी ओर से व्यक्तिगत शिकायतों को तेजी से निपटाने की व्यवस्था की जा रही है।

ईपीसीएच के चेयरमैन ओ पी प्रहलादका ने बताया कि 1 जुलाई के बाद से लाखों कारीगर और वर्क कॉन्ट्रैक्टर कुछ तकनीकी वजहों से काम नहीं कर पा रहे हैं। ज्यादातर कारीगरों का टर्नओवर 20 लाख रुपये से कम है, लेकिन उनकी सप्लाई इंटरस्टेट है। ऐसे में उन्हें जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेना होगा। इसी तरह एग्जिबिशन में माल लाना और ले जाना अब टैक्सेबल सप्लाई मानी जाएगी, चाहे एक भी पीस बिके या नहीं। एग्जिबिटर्स को उस राज्य में कैजुअल रजिस्ट्रेशन भी लेना पड़ेगा।

ईपीसीएच के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि सभी जोन और क्लस्टर्स में उथल-पुथल की शिकायतों के बाद यह मीटिंग बुलानी पड़ी है। अकेले हैंडीक्राफ्ट सेक्टर से ही करीब 70 लाख कारीगर और 11,000 मैन्युफैक्चरर जुड़े हैं। कई चरणों में काम होने के चलते अब हर चरण के लिए अलग कंप्लायंस की जरूरत भी पड़ सकती है। एक्सपोर्ट एसोसिएशंस ने जीएसटी काउंसिल को भेजे एक ज्ञापन में कहा है कि अब तक सभी राज्यों में टैक्स फ्री रहे हैंडीक्राफ्ट को 12, 18 और 28 पर्सेंट के टैक्स स्लैब में लाना उचित नहीं है। कम से कम 5000 रुपये तक के हैंडीक्राफ्ट टैक्स हों, जबकि बाकी पर 5 पर्सेंट रेट तय हो।

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