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सरकार ने RIL और पार्टनर्स पर 1700 करोड़ की पेनल्टी लगाई

सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी पार्टनर्स पर 26.4 करोड़ डॉलर यानी लगभग 1700 करोड़ रुपये की नई पेनल्टी लगाई है। यह जुर्माना 2015-16 के दौरान केजी-डी6 फील्ड्स से तय मात्रा से कम नैचुरल गैस का उत्पादन करने के लिए लगाया गया है...

पीटीआई 16 Aug 2017, 12:51 pm
नई दिल्ली
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RIL के चेयरमैन मुकेश अंबानी (फाइल फोटो)

सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी पार्टनर्स पर 26.4 करोड़ डॉलर यानी लगभग 1700 करोड़ रुपये की नई पेनल्टी लगाई है। यह जुर्माना 2015-16 के दौरान केजी-डी6 फील्ड्स से तय मात्रा से कम नैचरल गैस का उत्पादन करने के लिए लगाया गया है। ऑइल मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि अब कुल जुर्माना 3.02 अरब डॉलर का हो गया है। यह पूरा जुर्माना पहली अप्रैल 2010 से छह वर्षों तक टारगेट से कम प्रॉडक्शन करने के लिए लगाया गया है। इसके तहत इन कंपनियों को कॉस्ट रिकवरी नहीं करने दी जाएगी।

प्रॉडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, आरआईएल और उसकी पार्टनर्स ब्रिटेन की बीपी पीएलसी और कनाडा की निको रिसोर्सेज को यह इजाजत है कि सरकार के साथ मुनाफा साझा करने से पहले वे गैस बिक्री से मिली रकम से पूरा पूंजीगत और कामकाजी खर्च घटा लें। इन कंपनियों को कॉस्ट रिकवरी न करने देने से प्रॉफिट में सरकार का हिस्सा बढ़ेगा। अधिकारी ने बताया कि सरकार ने कॉस्ट रिकवरी की इजाजत न देने के बाद प्रॉफिट शेयर के रूप में 17.5 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त दावा किया है।

ईस्टर्न ऑफशोर केजी-डी6 की धीरूभाई-1 और 3 गैस फील्ड में 80 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर्स पर डे का गैस प्रॉडक्शन होने का अनुमान था, लेकिन 2011-12 में असल उत्पादन केवल 35.33 एमएमएससीएमडी, 2012-13 में 20.88 एमएमएससीएमडी और 2013-14 में 9.77 एमएमएससीएमडी रहा। बाद के वर्षों में उत्पादन लगातार घटता रहा और अब 4 एमएमएससीएमडी से कम है।

आरआईएल और बीपी को भेजी गईं ईमेल्स का जवाब नहीं आया। दोनों कंपनियों ने पिछले वर्षों में कॉस्ट रिकवरी न करने देने के कदम को चुनौती दी है और इस कदम को रद्द करने की मांग करते हुए इंटरनैशनल आर्बिट्रेशन भी शुरू किया है। कंपनियों की दलील है कि पीएससी में ऐसी किसी सजा का प्रावधान नहीं है।

सरकार ने 2010-11 के लिए 45.7 करोड़ डॉलर, 2011-12 के लिए 54.8 करोड़ डॉलर, 2012-13 के लिए 79.2 करोड़ डॉलर, 2013-14 के लिए 57.9 करोड़ डॉलर और 2014-15 के लिए 38 करोड़ डॉलर की कॉस्ट रिकवरी पर रोक लगाई है। अब 2015-16 में उत्पादन टारगेट से कम रहने के लिए 26.4 करोड़ डॉलर की कॉस्ट रिकवरी रोकी गई है।

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