ऐपशहर

2020 तक 5G की लॉन्चिंग मुश्किल, नेटवर्क ट्रायल प्लान भी नहीं तैयार

टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने IIT चेन्नई में 5G ट्रायल के लिए सेटअप तैयार किया है, जिसका मकसद इंडस्ट्री को तेज रफ्तार वाले नेटवर्क की जल्द शुरुआत करने में मदद करना है

इकनॉमिक टाइम्स 3 Oct 2019, 9:37 am

हाइलाइट्स

  • 2020 तक देश में 5G टेक्नॉलजी का इस्तेमाल शुरू करने की योजना को झटका लगता दिख रहा है
  • डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) ने नेटवर्क ट्रायल का प्लान अभी तक तैयार नहीं किया है
  • टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने IIT चेन्नई में 5G ट्रायल के लिए सेटअप तैयार किया है
  • इसका मकसद इंडस्ट्री को तेज रफ्तार वाले नेटवर्क की जल्द शुरुआत करने में मदद करना है
सारी खबरें हाइलाइट्स में पढ़ने के लिए ऐप डाउनलोड करें
मुंतजिर अब्बास, नई दिल्ली
सरकार की 2020 तक देश में 5G टेक्नॉलजी का इस्तेमाल शुरू करने की योजना असफल होती नजर आ रही है। इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) ने नेटवर्क ट्रायल का प्लान अभी तक तैयार नहीं किया है। इसके लिए जून में 100 दिनों की डेडलाइन तय की गई थी, जो गुजर चुकी है।
सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) के डायरेक्टर जनरल राजन एस मैथ्यूज ने बताया, 'सभी प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करते हुए 5G की ऐंड-टू-ऐंड टेस्टिंग नहीं की गई है।' COAI वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और रिलायंस जियो की नुमाइंदगी करती है।

टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने IIT चेन्नई में 5G ट्रायल के लिए सेटअप तैयार किया है, जिसका मकसद इंडस्ट्री को तेज रफ्तार वाले नेटवर्क की जल्द शुरुआत करने में मदद करना है। मैथ्यूज ने बताया, 'सरकार से अनुमति मिलने और स्पेक्ट्रम एलोकेशन के बाद ही फील्ड ट्रायल की शुरुआत हो सकती है।' इस खबर को लेकर टेलीकॉम डिपार्टमेंट से पूछे गए सवालों का जवाब नहीं मिला।

3 जून को टेलीकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि वह 100 दिनों के अंदर 5G का ट्रायल शुरू करने पर जोर देंगे। इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स ने बताया कि 2018 में सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों और उनके वेंडर पार्टनर्स को 2019 तक देश से जुड़े 5G के केस पेश करने को कहा था। हालांकि, नवंबर 2018 में वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल व रिलायंस जियो और उनके टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के संयुक्त प्रस्ताव पेश करने के बाद भी अब तक प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया है। मैथ्यूज ने कहा, 'हमें 3.3-3.6 GHz के रेडियो वेव की पूरी जानकारी चाहिए। ऐंड-टू-ऐंड हैंडसेट टेस्ट इसी आधार पर किया जाएगा।'

जून के मध्य में डिजिटल कम्युनिकेशन्स कमीशन (DCC) ने 5G ट्रायल के लिए स्पेक्ट्रम से जुड़े नियमों को मंजूरी दी थी। इसका प्रस्ताव DoT की बनाई और IIT कानपुर के डायरेक्टर अभय करंदिकर के नेतृत्व वाली कमेटी ने पेश किया था। ट्रायल के लिए 5G एयरवेव एक साल के लिए कंपनियों को दिया जाएगा। यह अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। इसके साथ एक्सपेरिमेंटल और टेक्नोलॉजी ट्रायल लाइसेंस भी एलोकेट किए जाएंगे, जिनकी फीस 5,000 रुपये प्रति ट्रायल रखी गई है। DoT ने तब कहा था कि स्पेक्ट्रम का आवंटन जल्द होगा, लेकिन अभी तक ब तक इस पर काम नहीं किया गया है।

फिनलैंड की टेलीकॉम इक्विपमेंट कंपनी नोकिया ने बताया कि 5G ट्रायल की शुरुआत 2019 की दूसरी छमाही में होगी। चीन की हुआवे को भी ट्रायल की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि चाइनीज कंपनी को इसमें शामिल होने की इजाजत मिलेगी या नहीं, इस पर सरकार ने अपना रुख अभी तक साफ नहीं किया है।

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग