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करेंसी नोटों से कोरोना फैलने पर सरकार की चुप्पी, कैट ने खड़ा किया सवाल

बीते छह महीने में अनेक बार याद दिलाने के बावजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और सम्बंधित संस्थान जानकारी दे नहीं पा रहे हैं। जबकि कोरोना के प्रकोप को देखते हुए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 19 Sep 2020, 6:53 pm

हाइलाइट्स

  • क्या, करेंसी नोटों से भी कोरोना फैलता है, इस सवाल पर सरकार चुप है
  • बार-बार लिखने के बाद भी 6 महीने से स्वास्थ्य मंत्री और ICMR से कोई जवाब नहीं मिल रहा
  • इससे लोग जागरूक नहीं हो पा रहे हैं और वे जाने-अनजाने में कोरोना फैलाने में वाहक बन रहे हैं
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नवभारतटाइम्स.कॉम करेंसी नोटों पर कोराना वायरस? (File Photo)
करेंसी नोटों पर कोराना वायरस? (File Photo)
नई दिल्ली
क्या, करेंसी नोटों (Currency Note) से भी कोरोना (Corona) फैलता है? इस सवाल पर सरकार चुप है। क्योंकि पिछले छह महीने में कई बार याद दिलाने के बावजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और इससे संबंधित संस्थान चुप हैं। यह कहना है छोटे व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का। इससे लोग जागरूक नहीं हो पा रहे हैं और वे जाने-अनजाने में कोरोना फैलाने में वाहक बन रहे हैं।
लोगों से स्वास्थ्य से जुड़ा है मसला
कैट (CAIT) द्वारा यहां जारी एक बयान में कहा गया है कि कोरोना के कारण सरकार के मंत्रियों और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी विभागों पर काम का बोझ ज़्यादा है, यह बात सही है। लेकिन यदि राष्ट्रीय स्तर की कोई महत्वपूर्ण संस्था कोरोना से निपटने के लिए सरकार की मदद करने के लिए कोई तार्किक जानकारी मांगे, तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि बीते छह महीने में अनेकों बार याद दिलाने के बावजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और सम्बंधित संस्थान जानकारी दे नहीं पा रहे हैं। जबकि, कोरोना के प्रकोप को देखते हुए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।

9 मार्च 2020 को ही पूछा था सवाल
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने 9 मार्च 2020 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को एक पत्र भेजकर पूछा था, कि क्या कोरोना करेंसी नोटों के ज़रिए फैल सकता है। इसके बाद 18 मार्च, 2020 को कैट ने एक अन्य पत्र इंडियन काउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के निदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव को पत्र भेज कर यही सवाल उनसे भी किया था। लेकिन, 6 महीने बीत जाने के बाद भी इतने महत्वपूर्ण सवाल का जवाब नहीं मिला है। जबकि यह मसला न केवल देश के करोड़ों व्यापारियों बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है।

कई शोधों से हुआ है साबित
देश में अनेक जगह और विदेशों में अनेक देशों में इस विषय पर अनेक अध्ययन रिपोर्ट में यह साबित हुआ है कि करेन्सी नोटों के द्वारा किसी भी प्रकार का संक्रमण तेज़ी से फैलता हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि नोटों की सतह सूखी होने के कारण किसी भी प्रकार का वाइरस या बैकटेरिया लम्बे समय तक उस पर रह सकता है। करेंसी नोटों का लेन- देन बड़ी मात्रा में अनेक अनजान लोगों के बीच होता है तो इस शृंखला में कौन व्यक्ति किस रोग से पीड़ित है, यह पता ही नहीं चलता। इस कारण से करेंसी नोटों के द्वारा संक्रमण जल्दी होने की आशंका रहती है। भारत में नकदी का प्रचलन बहुत ज्यादा है और इस दृष्टि से व्यापारियों को इससे बहुत अधिक खतरा है।

भारत में भी हुआ है शोध
कैट का कहना है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी , लखनऊ, जर्नल ऑफ़ करेंट माइक्रो बायोलोज़ी एंड ऐपलायड साइयन्स, इंटर्नैशनल जर्नल ऑफ़ फ़ार्मा एंड बायो साइयन्स, इंटर्नैशनल जर्नल ऑफ़ एडवॉन्स रिसर्च आदि ने भी अपनी अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है कि करेन्सी नोट के ज़रिए संक्रमण होता है। इस दृष्टि से कोरोना काल में करेन्सी का इस्तेमाल सावधानिपूर्वक किया जाना ज़रूरी है। लेकिन, इस मामले पर सरकार की चुप्पी बेहद आश्चर्यजनक है। कैट ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन से मांग की है कि वो मामले की गंभीरता को देखते हुए यह स्पष्ट करें की क्या करेंसी नोटों के जरिये कोरोना अथवा अन्य वाइरस या बैक्टीरिया फैलता है अथवा नहीं।

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