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अब किराना दुकानदार भी नहीं कर पाएंगे टैक्स चोरी

जीएसटी की व्यवस्था के तहत बड़े कारोबारियों के साथ ही किराना स्टोर चलाने वाले छोटे कारोबारी भी टैक्स के दायरे से नहीं बच सकेंगे। जीएसटी में प्रत्येक व्यवसाय के खरीददार की जीएसटी पंजीकरण संख्या को जीएसटी डाटाबेस में अपडेट करने की जरूरत होगी ताकि हर बिक्री और खरीद का पता लगाया जा सके।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 29 Jun 2017, 5:40 pm
सिद्धार्थ, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम Kirana Store

अगर आप नकद भुगतान करते हैं तो देश के सबसे महंगे बाजारों में से एक दिल्ली के खान मार्केट का एक अग्रणी फोटो स्टूडियो आपसे सर्विस टैक्स नहीं लेगा। वहीं कार्ड से भुगतान करने पर आपको 15% सर्विस टैक्स चुकाना होगा। जीएसटी से टैक्स चोरी रोकने की सरकार की कोशिशों के बावजूद इस पर लगाम कसने की संभावना कम ही दिख रही है। कंसल्टेंसी फर्म ईवाई में इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर बिपिन सप्रा ने कहा, 'सलून्स जैसी बी2सी सेवाएं टैक्स चोरी कर सकती हैं, लेकिन जब भी लेनदेन में कोई गड़बड़ी होगी तो ऑनलाइन फाइलिंग सिस्टम उसे पकड़ लेगा।'

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जीएसटी के तहत 20 लाख रुपये से अधिक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारी के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। इससे बचने के छोटे ट्रांजैक्शंस का तरीका अपना सकते हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह बहुत अासान नहीं होगा। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के तहत नई प्रणाली को एक साथ रखा गया है, जिसमें एक विक्रेता के द्वारा सभी चालान अपलोड करते ही 'इनवॉइस मैचिंग' शुरू हो जाएगी। सप्रा ने बताया कि यह बी2सी लेनदेन में भी होगा, जैसा की किराना दुकानों में भी यह प्रणाली लागू होगी। डीलर स्टोर से संबंधित बिक्री चालान अपलोड किए जाने पर सरकार उन्हें ट्रैक कर सकती है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी डिजाइन में टैक्स चोरी के लिए बहुत कम मौके छोड़े गए हैं। डेलॉइटे के सीनियर डायरेक्टर एमएस मणि ने बताया, 'जीएसटी में प्रत्येक व्यवसाय के खरीददार की जीएसटी पंजीकरण संख्या को जीएसटी डाटाबेस में अपडेट करने की जरूरत होगी ताकि हर बिक्री और खरीद का पता लगाया जा सके। आसान शब्दों में कहें तो जीएसटी में प्रत्येक लेनदेन पर टैक्स एकत्र किया जाएगा और भुगतान किया जाएगा, जिससे चोरी को रोकने में मदद मिलेगी।'

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टैक्स रिटर्न फाइलिंग की इस नई व्यवस्था के तहत मासिक, तिमाही और सालाना रिटर्न की जरूरत होगी। इसके अलावा जीएसटी के साथ इनवॉइस मैचिंग को लेकर चिंता जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इससे कारोबारियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। एक राज्य के पूर्व वित्त सचिव ने कहा कि जब राज्य सरकारों ने वैल्यू ऐडेड टैक्स (VAT) को शुरू करने के बाद स्व-घोषणा की प्रणाली में कदम रखा, तब कैग ने इसमे बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताते हुए इनवॉइस मिलान की व्यवस्था की सिफारिश की थी।

टैक्स अधिकारियों ने कहा कि व्यापारियों द्वारा जीएसटी के विरोध का यह भी एक कारण है। एक अधिकारी ने बताया कि सिस्टम फूलप्रूफ है, इसलिए लोगों को पता है कि नेट से बचने में मुश्किल होगी। इससे पहले, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बंटे हुए टैक्सों के कारण व्यवसाय टैक्स चोरी के साथ चल रहे थे।

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