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Harsh Goenka ने पटरी पर सामान बेचने वाले लोगों से उद्यमियों को कौन सा सबक सीखने की सलाह दी?

entrepreneurship: बड़ी कंपनियों के साथ दिक्कत यह है कि वह अगर अपने प्रोडक्ट पर 5 फ़ीसदी डिस्काउंट ऑफर करना चाहते हैं, तो उसके लिए उन्हें बोर्ड की मीटिंग का इंतजार करना पड़ता है।

Authored byAmit Tyagi | नवभारतटाइम्स.कॉम 16 Dec 2021, 4:02 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम हर्ष.

Harsh Goenka News: बिजनेसमैन हर्ष गोयनका (Harsh Goenka) ट्विटर पर काफी एक्टिव हैं। वह कभी किसी के पॉजिटिव कोट शेयर करते हैं, कभी किसी बात या कंपनी पर तंज कसते हुए नजर आते हैं, कभी देश-दुनिया के किसी लेटेस्ट अपडेट पर अपना पॉइंट रखते हैं, कभी कुछ दिलचस्प शेयर करते हैं तो कभी कुछ खास टिप्स देते हैं। इस बार आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने अपने ट्विटर हैंडल से बिजनेस करने को लेकर एक मंत्र शेयर किया है।

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देश के दिग्गज उद्योगपति हर्ष गोयनका ने असंगठित क्षेत्र में उद्यमिता को लेकर एक वीडियो शेयर किया है। हर्ष गोयनका ने एक वीडियो शेयर किया है जिस वीडियो में नासिक एंटरप्रेन्योर्स फोरम में एक वक्ता गुलाब का फूल बेचने वाले एक बच्चे का उदाहरण दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि बच्चा ₹7 में गुलाब का फूल खरीद कर उसे ₹10 में बेचता है। अपने कामकाज में फूल बेचने के लिए तय की जाने वाली कीमत वह बच्चा खुद तय करता है। उद्यमिता के लिए यह जरूरी है कि आप में फैसले लेने की क्षमता हो और आप समय पर उपयुक्त फैसला ले सकें।



वक्ता ने कहा कि अपनी लागत पर वह बालक 30 फीसदी मुनाफा कमा रहा है। अगर शाम को उसे लग लगे कि अब उसका फूल नहीं बिकने वाला है या बच जाएगा, तो वह आपको 50 फ़ीसदी डिस्काउंट भी दे सकता है।

फैसले करने की आजादी

उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों के साथ दिक्कत यह है कि वह अगर अपने प्रोडक्ट पर 5 फ़ीसदी डिस्काउंट ऑफर करना चाहते हैं, तो उसके लिए उन्हें बोर्ड की मीटिंग का इंतजार करना पड़ता है। यह प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि कई बार डिस्काउंट घोषित करने की इजाजत मांगने वाला व्यक्ति ही तंग होकर प्रस्ताव को छोड़ देता है।

तुरंत फैसला लेना महत्वपूर्ण

उन्होंने कहा कि सड़क पर सामान बेचने वाले लोगों के पास त्वरित फैसले लेने की क्षमता होती है, उसकी तुलना में बड़ी कंपनियों में फैसले लेने में काफी देर हो सकती है। किसी त्योहार के मसले पर सड़क पर खड़े होकर सामान बेचने वाले लोग अपना प्रोडक्ट लाइन से लेकर काफी चीजें बदल देते हैं।

ग्राहकों की मांग के हिसाब से बदलाव

जो व्यक्ति गर्मी के दिनों में सूती कपड़े बेच रहा होता है, वह ठंड आते ही स्वेटर, कंबल, स्वीट शर्ट और मफलर-टोपी जैसे प्रोडक्ट बेचने लगता है। इस प्रक्रिया में शामिल सभी चीजें बहुत आसानी से बदल जाती हैं और वह बंदा एक-दो दिन के ब्रेक के बाद अपनी नई दुकान लगा लेता है, जिस पर नए मौसम के हिसाब से सामान बिकने लगता है।

साल में कई बार बदलता है प्रोडक्ट लाइन

बहुत से लोग जो त्योहारी सीजन में सड़क या पटरी पर दुकान लगाते हैं इस साल में 15-16 बार अपने प्रोडक्ट लाइन, शॉपिंग सोर्स, कस्टमर ट्रेंड आदि में बदलाव करते हैं। अगर बड़ी कंपनियों की बात करें तो बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्ट को बदलने में 5 से 7 साल का समय लगाती है।

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लेखक के बारे में
Amit Tyagi
बिजनेस रिपोर्टिंग में 15 साल से अधिक का अनुभव. दिल्ली के लोकल मार्केट से लेकर एनसीआर से इंडस्ट्रियल क्लस्टर और एसएमई से लेकर रियल एस्टेट कारोबार तक की रिपोर्टिंग. साल 2014 से डिजिटल या न्यू मीडिया में बिजनेस, सक्सेस स्टोरी, मनी-मैटर, ट्रेंडिंग स्टोरी से जुड़ा कामकाज.... और पढ़ें

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