ऐपशहर

ट्रंप की घोषणा से भारतीय आईटी कंपनियों में बेचैनी, रविशंकर प्रसाद बोले- अमेरिका को भी फायदा

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ‘अमेरिकी उत्पाद खरीदो-अमेरिकी लोगों को रोजगार दो’ की घोषणा से 150 अरब डॉलर के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग में बेचैनी है। भारतीय आईटी कंपनियां अब यह इंतजार कर रही हैं कि कैसे नया प्रशासन आउटसोर्सिंग और कुशल श्रमबल की आवाजाही को लेकर नीतियां बनाता है।

भाषा 22 Jan 2017, 6:55 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम indian it companies worry after donald trump pledge buy american hire american
ट्रंप की घोषणा से भारतीय आईटी कंपनियों में बेचैनी, रविशंकर प्रसाद बोले- अमेरिका को भी फायदा

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ‘अमेरिकी उत्पाद खरीदो-अमेरिकी लोगों को रोजगार दो’ की घोषणा से 150 अरब डॉलर के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग में बेचैनी है। भारतीय आईटी कंपनियां अब यह इंतजार कर रही हैं कि कैसे नया प्रशासन आउटसोर्सिंग और कुशल श्रमबल की आवाजाही को लेकर नीतियां बनाता है।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के साथ उसका अर्थपूर्ण गठजोड़ जारी रहेगा। भारत के आईटी निर्यात में अमेरिका का हिस्सा 60 फीसदी है। ऐसे में उद्योग और सरकार अपने पहुंच कार्यक्रम के तहत यह बताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे कि कैसे भारतीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में भूमिका निभाई है। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि कैसे भारतीय कंपनियों ने अरबों डॉलर के करों का भुगतान किया है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का सृजन किया है।

पढ़ें: यह ट्रंप मंत्र भारतीय इकॉनमी के लिए झटका

ट्रंप के राष्ट्रपति पद के लिए शपथ लेने से कुछ घंटे पहले पीटीआई भाषा से साक्षात्कार में प्रसाद ने कहा, ‘भारतीय आईटी कंपनियों की उपस्थिति 80 देशों के 200 शहरों में है। इन कंपनियों ने अमेरिका के लिए काफी मूल्यवर्धन किया है। लाखों लोगों को नौकरियां दी हैं। इनमें अमेरिकी भी शामिल हैं। जहां तक मेरी समझ है इन कंपनियों ने वहां अरबों डॉलर का टैक्स दिया है। भारतीय कंपनियों ने टैक्स के अलावा वहां रोजगार भी दिया है।’

आईटी मंत्री प्रसाद ने कहा, ‘भारत ट्रंप सरकार के साथ अर्थपूर्ण संपर्क चाहता है। हम भारतीय कंपनियों के बारे में ट्रंप के विचारों का इंतजार कर रहे हैं। हमने अपने विचार उन्हें बता दिए हैं। आगे भी हम ऐसा करना जारी रखेंगे।’ नास्कॉम के अध्यक्ष आर. चंद्रशेखर ने कहा कि ट्रंप भारत के अनुकूल हैं। चूंकि वह खुद उद्योगपति हैं इसलिए कारोबारी वास्तविकताओं को समझते हैं। उन्होंने आगाह किया कि नए प्रशासन को किसी अंकुश की वजह से अमेरिका के अंदर रोजगार सृजन पर प्रतिकूल असर की उन्हें काफी सावधानी से समीक्षा करनी होगी।

ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट प्रतिबद्धता से संरक्षणवादी नीतियों को लेकर चिंता बढ़ी है और इससे भारतीय आईटी उद्योग में बेचैनी है। इससे पहले इसी महीने अमेरिकी संसद में दो सांसदों ने एच-1बी वीजा को लक्ष्य कर एक विधेयक पेश किया है। इन सांसदों का कहना है कि इससे कार्य वीजा के दुरपयोग को रोका जा सकेगा। इन्फोसिस के प्रमुख विशाल सिक्का ने कहा कि ट्रंप खुद उद्यमी और कारोबारी नेता हैं। निकट भविष्य में वीजा और एच-1बी वीजा नीतियों में कुछ बदलाव हो सकता है।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने भी कहा है कि वह अपने कारोबारी मॉडल में बदलाव कर अग्रसारी तरीके से इन चिंताओं को दूर करने का प्रयास कर रही है। ग्रेहाउंड रिसर्च के मुख्य विश्लेषण एवं सीईओ संचित गोगिया ने कहा कि बेहतर कौशल वाली नौकरियां मसलन कोडिंग और रखरखाव पर असर नहीं होगा, क्योंकि इनमें दक्ष लोगों की कमी है।

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग