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Reliance Capital Resolution: रिलायंस कैपिटल में सिर्फ अनिल अंबानी ही नहीं आपका भी लगा है पैसा, कितनी हो सकेगी रिकवरी

रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है। केंद्रीय बैंक की तैयारी जल्द ही कर्ज में डूबी रिलांयस कैपिटल के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने की है।

Curated byरीतिका सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम 1 Dec 2021, 12:11 pm
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अनिल अंबानी (Anil Ambani) की अगुवाई वाले रिलायंस समूह की कंपनी रिलायंस कैपिटल लि. (Reliance Capital) के निदेशक मंडल को भंग कर चुका है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व कार्यकारी निदेशक नागेश्वर राव वाई को रिलायंस कैपिटल का प्रशासक (Administrator) नियुक्त किया गया है और उनकी मदद के लिए तीन सदस्यीय सलाहकार समिति भी बनाई गई है।
नवभारतटाइम्स.कॉम lic and epfo own reliance capital bonds worth an estimated rs 6000 6500 crore
Reliance Capital Resolution: रिलायंस कैपिटल में सिर्फ अनिल अंबानी ही नहीं आपका भी लगा है पैसा, कितनी हो सकेगी रिकवरी


रिलायंस कैपिटल की ओर से भुगतान में चूक और कंपनी संचालन के स्तर पर गंभीर खामियों को देखते हुए आरबीआई ने यह कदम उठाया है। रिलायंस कैपिटल पर जिन कंपनियों का उधार है, उनमें भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) भी शामिल हैं। दोनों कंपनियों के पास रिलायंस कैपिटल के 6000-6500 करोड़ रुपये के बॉन्ड/डिबेंचर हैं।

​रिलायंस कैपिटल के कुल कर्ज में बॉन्ड देनदारी का ​कितना हिस्सा

रिलायंस कैपिटल के डिबेंचर होल्डर्स, कंपनी के कुल कर्ज के 95 फीसदी को रिप्रेजेंट करते हैं। रिलायंस कैपिटल ने सितंबर माह में सालाना आम बैठक में शेयरधारकों को सूचित किया था कि कंपनी के ऊपर एकीकृत रूप से 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। विश्लेषकों के मुताबिक, ईपीएफओ के पास रिलायंस कैपिटल के 2500 करोड़ रुपये के डिबेंचर हैं। वहीं एलआईसी के पास रिलायंस कैपिटल और इसकी सब्सिडियरी रिलायंस होम फाइनेंस के 4700 करोड़ रुपये के डिबेंचर हैं। LIC और EPFO अगर रिलायंस कैपिटल के बॉन्ड को अभी बेचें तो उन्हें नुकसान होगा क्योंकि उन बॉन्ड्स की मौजूदा वैल्यू के मूल निवेश के 10वें हिस्से से भी कम होने का अनुमान है।

​कितनी रिकवरी की संभावना

इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिजॉल्यूशन प्रॉसेस के साथ रिलायंस कैपिटल के बॉन्डहोल्डर्स के लिए उनके निवेश की केवल आधी वसूली की संभावना है। हालांकि एलआईसी और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) समेत बड़े संस्थागत निवेशक के लिए आरकैप बॉन्ड से काफी रिकवरी की उम्मीद है। रिलायंस कैपिटल पर बॉन्ड के मामले में कुल बकाया लगभग 15,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। आरकैप इनवेस्टमेंट्स से जुड़े आधा दर्जन टॉप इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स ने ईटी को बताया कि इंश्योरेंस, ब्रोकिंग और एसेट रीकंस्ट्रक्शन जैसी ऑपरेटिंग सब्सिडियरीज में कुछ आरकैप निवेश से अच्छी वैल्यू मिलने की संभावना है। Vistra ITCL बॉन्ड्स के लिए डिबेंचर ट्रस्टी है। यह आरबीआई के फैसले के बाद सभी हितधारकों के साथ बातचीत में है।

​अनिल अंबानी से ज्यादा LIC के पास हैं रिलायंस कैपिटल के शेयर

एलआईसी के पास रिलायंस कैपिटल के 2.98 फीसदी शेयर हैं। इस तरह एलआईसी, रिलायंस कैपिटल की सिंगल लार्जेस्ट इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर है। वहीं अनिल अंबानी और उनके परिवार के पास रिलायंस कैपिटल के 1.51 फीसदी शेयर हैं। दिसंबर 2018 में अनिल अंबानी के पास कंपनी के 52 फीसदी से ज्यादा शेयर थे। रिलायंस कैपिटल में पब्लिक शेयरहोल्डर्स की होल्डिंग 97 फीसदी से ज्यादा है।

​रिलायंस कैपिटल के एसेट्स

रिलायंस कैपिटल की लगभग 20 सब्सिडियरी ऐसी हैं, जिनमें कंपनी की बहुलांश हिस्सेदारी है। वहीं 4 कंपनी ऐसी हैं, जिनमें रिलायंस कैपिटल की अप्लांश हिस्सेदारी है। रिलायंस कैपिटल के प्रमुख एसेट्स में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी में 100 फीसदी हिस्सेदारी, रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस में 49 फीसदी हिस्सेदारी, रिलायंस सिक्योरिटीज में 100 फीसदी हिस्सेदारी, रिलायंस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी में 49 फीसदी हिस्सेदारी और रियल एस्टेट सेक्टर के कुछ अन्य छोटे निवेश शामिल हैं। रिलायंस हेल्थ भी रिलायंस कैपिटल की 100 फीसदी स्वामित्व वाली कंपनी है।

आगे क्या होने वाला है

रिजर्व बैंक का कहना है कि रिजर्व बैंक जल्दी ही इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी (वित्तीय सेवा प्रदाताओं की दिवाला और परिसमापन कार्यवाही और न्यायनिर्णय प्राधिकरण को आवेदन) नियम, 2019 के तहत कंपनी को लेकर समाधान प्रक्रिया शुरू करेगा। रिजर्व बैंक राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), मुंबई से भी ऋण शोधन समाधान पेशेवर के रूप में प्रशासक नियुक्त करने का आग्रह करेगा।

रिलायंस कैपिटल का रिजॉल्यूशन थोड़ा अलग होगा क्योंकि कंपनी की ज्यादातर वैल्यू, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस समेत ऑपरेटिंग ग्रुप कंपनियों में किए गए इन्वेस्टमेंट में है। TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिवाला कार्यवाही का तत्काल प्रभाव, संपूर्ण परिसंपत्ति बिक्री प्रक्रिया पर फिर से विचार करना होगा। यह लेनदारों द्वारा रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस होम फाइनेंस की ऑटम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर को होने वाली बिक्री को भी प्रभावित कर सकती है। इसकी बिकी की घोषणा अंबानी ने सितंबर एजीएम में की थी।

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