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लिमिटेड स्क्रूटनी के मामले में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत

[ दीपशिखा सिकरवार | नई दिल्ली ]अगर आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का स्क्रूटनी नोटिस मिला है तो आपको बेवजह डरने की जरूरत नहीं क्योंकि सरकार ऐसे कदम ...

नवभारतटाइम्स.कॉम 18 Jul 2016, 9:00 am

[ दीपशिखा सिकरवार | नई दिल्ली ]

अगर आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का स्क्रूटनी नोटिस मिला है तो आपको बेवजह डरने की जरूरत नहीं क्योंकि सरकार ऐसे कदम उठा रही है, जिनसे ऐसे मामलों में किसी तरह के उत्पीड़न से आपका बचाव होगा। सरकार की तरफ से यह कदम टैक्स डिपार्टमेंट के नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संदेश के मुताबिक उठाया जा रहा है, जिसमें उन्होंने लोगों से कहा है कि उनको ऐसी कार्रवाइयों से डरने की जरूरत नहीं।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने 'लिमिटेड' स्क्रूटनी के दायरे को विस्तार देते हुए इसे कंप्लीट करना असेसिंग ऑफिसर्स के लिए ज्यादा मुश्किल बना दिया है। यानी अब उनको इसके लिए सीनियर ऑफिसर्स से अप्रूवल लेने के साथ यह भी साबित करना होगा कि मामले में इनकम की सही रिपोर्टिंग नहीं हुई है और सरकारी खजाने को टैक्स का लॉस हो रहा है।

मामले के जानकारी रखने वाले सूत्र ने बताया कि CBDT की तरफ से हाल में जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, असेसिंग ऑफिसर्स को इस बारे में वाजिब राय बनानी होगी कि मामले में इनकम का अंडर स्टेटमेंट होने की आशंका है। साथ ही, स्क्रूटनी के लिए मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के किसी केस के मैनुअल सेलेक्शन में मेट्रो शहरों के लिए मिनिमम लिमिट 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। यानी अगर असेसिंग ऑफिसर को लगता है कि डिक्लेरेशन में कुछ इनकम को ऐड किया जाना चाहिए तो रिटर्न तभी खोला जा सकता है, जब अंडर रिपोर्टिंग की एडिशनल रकम 25 लाख रुपये से ज्यादा होगी।

सरकार ने पिछले दो साल में डिपार्टमेंट के रेवेन्यू कलेक्शन के प्रयासों को कम आक्रामक बनाने और कथित टैक्स टेररिज्म से दूरी बनाने की कोशिश की है। प्राइम मिनिस्टर मोदी ने पिछले महीने हुई मीटिंग में टैक्स ऑफिसर्स को कमोबेश ऐसा ही संदेश दिया था। सरकार की तरफ से टैक्स असेसमेंट प्रोसेस में असेसिंग ऑफिसर्स के विवेक का इस्तेमाल घटाया जा रहा है और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर ज्यादा भरोसा किया जा रहा है। ई-स्क्रूटनी शुरू की गई है जिसमें मेट्रो के पेयी को स्क्रूटनी के सवालों के जवाब ईमेल के जरिए देने की सुविधा है।

सरकार के हालिया दिशानिर्देशों का मकसद यह सुनिश्चत करना है कि टैक्स ऑफिसर्स कंप्यूटर ऐडेड स्क्रूटनी सेलेक्शन (CASS) में लिमिटेड स्क्रूटनी होने पर उन मामले में ठोस सुराग नहीं होने पर गहराई में जाकर जांच पड़ताल न करने लगें, जिनमें रिस्क किसी खास ट्रांजैक्शन एरिया में लिमिटेड हो।

टैक्स एक्सपर्ट्स ने इन कदमों का स्वागत किया है। चार्टर्ड एकाउंटेंट्स अशोक माहेश्वरी एंड एसोसिएट्स एलएलपी में पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा कि इनको नए स्क्रूटनी फॉर्मैट के साथ मिलाने से टैक्स डिपार्टमेंट की जवाबदेही बढ़ेगी। उन्होंने कहा, 'इससे डिपार्टमेंट का बहुमूल्य समय बचेगा, जल्द एसेसमेंट क्लोजर हो सकेगा और लोगों का उत्पीड़न से बचाव होगा। आनेवाले समय में टैक्सपेयर्स असेसिंग ऑफिसर्स से राय बनाने की वजह के बारे में पूछ सकेंगे और उनको मेरिट के आधार पर चुनौती दे सकेंगे।'

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