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रिटेल में विदेशी निवेश की सीमा खत्म कर सकती है मोदी सरकार

मोदी सरकार विदेशी रिटेलर्स द्वारा भारत के सुपरमार्केट्स में किए जाने वाले निवेश की सीमा को खत्म करने पर विचार कर रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में होने वाली एक मीटिंग में इस प्रपोजल पर अंतिम मुहर लगेगी। वॉलमार्ट और करफॉर जैसे बड़े रिटेलर्स के लिए शर्त यह होगी कि वे भारत में बने प्रॉडक्ट्स बेचेंगे और कम से कम 100 मिलियन डॉलर का निवेश करेंगे।

एजेंसियां 14 Jul 2017, 9:14 pm
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम modi government considering plan to lift cap on foreign investment in supermarkets
रिटेल में विदेशी निवेश की सीमा खत्म कर सकती है मोदी सरकार

मोदी सरकार विदेशी रिटेलर्स द्वारा भारत के सुपरमार्केट्स में किए जाने वाले निवेश की सीमा को खत्म करने पर विचार कर रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में होने वाली एक मीटिंग में इस प्रपोजल पर अंतिम मुहर लगेगी। वॉलमार्ट और करफॉर जैसे बड़े रिटेलर्स के लिए शर्त यह होगी कि वे भारत में बने प्रॉडक्ट्स बेचेंगे और कम से कम 100 मिलियन डॉलर (करीब 6 अरब रुपये) का निवेश करेंगे।

ब्लूमबर्ग की एक खबर के मुताबिक, मीटिंग में वित्त मंत्री अरुण जेटली और उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद होंगे। पीएम मोदी अगर इस प्रपोजल पर हामी भरते हैं तो साफ है कि वह अपनी पार्टी के मुख्य वोट बैंक छोटे-बड़े व्यापारियों को नाराज कर सकते हैं। पीएम मोदी का इस समय जोर नौकरियां पैदा करने पर है और वह ट्रेडर्स को नाराज कर भी यह कदम उठा सकते हैं।

लोकसभा चुनाव में सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए मल्टी ब्रैंड रिटेल में विदेशी निवेश पर रोक लगा दी थी। बीजेपी ने कांग्रेस नीत यूपीए सरकार की रिटेल में एफडीआई नीति का काफी विरोध किया था। प्रपोजल की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि नियमों में ढील देने के साथ-साथ कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। रिटेलर्स को कम से कम 50 मिलियन डॉलर (करीब 3 अरब रुपये) स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स पर खर्च करने होंगे वहीं, हर 100 मिलियन डॉलर के निवेश पर 1000 लोगों को रोजगार देना होगा। इसके अलावा 30 प्रतिशत माल की पूर्ति छोटी कंपनियों से करनी होगी।

छोटे व्यापारियों का मानना रहा है कि विदेशी रिटेलर्स के स्टोर खोलने से उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी। अभी की एफडीआई नीति के मुताबिक मल्टी-ब्रैंड के लिए विदेशी कंपनियां भारतीय मल्टी-ब्रैंड कंपनियों में 52 प्रतिशत तक हिस्सा रख सकती हैं। हालांकि यह पॉलिसी अभी तक लागू नहीं हो पाई है।

फूड रिटेलर्स
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय रिटेलर्स के लिए नियमों में ढील देने पर सरकार पर काफी दिन से दबाव बना रहा है। भारतीय फूड और ग्रॉसरी मार्केट दुनिया का छठा सबसे बड़ा बाजार है। भारत के रिटेल सेक्टर में फूड सबसे बड़ा सेगमेंट है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर ने मई में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि इस सेक्टर में अगले 2 से 3 सालों में कम से कम 10 बिलियन डॉलर (करीब 643 अरब रुपये) का निवेश हो सकता है।

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