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महाराष्ट्र के औषधि बिक्रेता पर प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन का मामला नहीं: आयोग

नयी दिल्ली, नौ नवंबर (भाषा) प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा है कि उसे मुंबई के खुदरा दवा कंपनियों के संगठन (रिटेल एंड डिस्पेंसिंग केमिस्ट एसोसिएशन-आरडीसीए) के खिलाफ जांच में प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला है। आरोप था कि एसोसिएशन औषधि कंपनियों से उत्पाद सूचना सेवा के लिये नाजायज शुल्क वसूलती है। अपनी जांच इकाई महानिदेशक की रिपोर्ट तथा विभिन्न इकाइयों के विचारों पर गौर करने के बाद आयोग ने कहा कि इस बात के कोई साक्ष्य नहीं है कि वहां एसोसिएशन द्वारा उत्पादन सूचना सेवाओं (पीआईएस) के लिये शुल्क वसूलना अनिवार्य है।

भाषा 9 Nov 2018, 8:00 pm
नयी दिल्ली, नौ नवंबर (भाषा) प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा है कि उसे मुंबई के खुदरा दवा कंपनियों के संगठन (रिटेल एंड डिस्पेंसिंग केमिस्ट एसोसिएशन-आरडीसीए) के खिलाफ जांच में प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला है। आरोप था कि एसोसिएशन औषधि कंपनियों से उत्पाद सूचना सेवा के लिये नाजायज शुल्क वसूलती है। अपनी जांच इकाई महानिदेशक की रिपोर्ट तथा विभिन्न इकाइयों के विचारों पर गौर करने के बाद आयोग ने कहा कि इस बात के कोई साक्ष्य नहीं है कि वहां एसोसिएशन द्वारा उत्पादन सूचना सेवाओं (पीआईएस) के लिये शुल्क वसूलना अनिवार्य है। सामान्य तौर पर पीआईएस के तहत औषधि कंपनियों की नई दवाओं को अपने ‘बुलेटिन’ और ‘न्यूजलेटर’ में प्रकाशित करने के लिये दवा विक्रेताओं के संगठन कुछ शुल्क लेते हैं। सीसीआई ने यह भी कहा कि मौजूदा मामले में निर्णय का क्रियान्वयन दिल्ली उच्च न्यायालय में कार्यवाही पर निर्भर है। नियामक के मामले की जांच को लेकर 25 अगस्त 2015 को दिये गये आदेश के बाद आरडीसीए ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उसका कहना था कि वह निर्णय से प्रभावित होगा। अदालत ने 19 मार्च 2018 को कहा कि अगर आयोग अंतिम आदेश पारित करता है, यह रिट याचिका में आदेश पर निर्भर करेगा। आयोग ने कहा कि पीआईएस शुल्क गैर-प्रतिस्पर्धी है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है इसे अनिवार्य रूप से लिया जा रहा है या फिर स्वैच्छिक आधार पर। सीसीआई ने कहा कि इस बात के कोई साक्ष्य नहीं है कि आरडीसीए द्वारा औषधि कंपनियों से लिया जाने वाला शुल्क अनिवार्य है।

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