ऐपशहर

बिल बनवाओ स्कीम पर आया दूसरे राज्यों का भी दिल

वैट कलेक्शन में आम आदमी को भागीदार बनाने की दिल्ली सरकार की स्कीम इस कदर लोकप्रिय हो रही...

ईटी 23 Mar 2016, 4:29 pm
प्रमोद राय, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम other states including bjp ruled praises dvatbill scheme of kejriwal govt
बिल बनवाओ स्कीम पर आया दूसरे राज्यों का भी दिल

वैट कलेक्शन में आम आदमी को भागीदार बनाने की दिल्ली सरकार की स्कीम इस कदर लोकप्रिय हो रही है कि दूसरे राज्य भी इसे लागू करने का मन बना रहे हैं। हरियाणा सरकार अगले महीने 'बिल जमा करो, इनाम पाओ' स्कीम लॉन्च करने जा रही है, जबकि यूपी कमर्शल डिपार्टमेंट इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

दिल्ली सरकार ऑड-ईवन के बाद 'बिल बनवाओ, इनाम पाओ' को दूसरी सबसे कामयाब स्कीम बता रही है। हालांकि, अब तक किसी भी इनामी स्कीम के मुकाबले इस पर ज्यादा रकम खर्च हो रही है, लेकिन इससे होने वाली रिकवरी उस खर्च से कई गुना ज्यादा है और यही बात दूसरे राज्यों को आकर्षित कर रही है। दो महीनों में दिल्ली सरकार ने इनामों पर 7 लाख रुपये से भी कम खर्च किया है, लेकिन अब तक वह एक-डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा टैक्स एवं पेनल्टी वसूल चुकी है और जांच के दायरे में आए सैकड़ों अवैध डीलर्स से रिकवरी अभी बाकी है।

हरियाणा सरकार ने सोमवार को पेश अपने बजट में इस स्कीम को लॉन्च करने का ऐलान किया, जबकि पिछले दिनों दिल्ली वैट विभाग ने नोएडा और गाजियाबाद के ग्राहकों की ओर से गलती से भेजे गए सैकड़ों बिलों को यूपी के वैट कमिश्नर को भेज दिया था। यूपी कमर्शल टैक्स डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग इसी तरह की एक स्कीम लाने पर विचार कर रहा है और बैठकों में इस पर चर्चा हुई है।

पढ़ें: केजरीवाल सरकार की अनोखी योजना के बारे में यहां क्लिक कर जानें

दिल्ली के वैट कमिश्नर एस एस यादव ने बताया, 'देश में पहली बार इस स्कीम के जरिए एक-एक ग्राहक को वैट इंस्पेक्टर बनाने की पहल की गई थी। इसे जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला है। पहले महीने 4000 बिल मिले थे, तो दूसरे महीने 8000 से ज्यादा। लोग इनाम के लिए बिल जमा करा रहे हैं, लेकिन हम उनके जरिए सैकड़ों टैक्स डिफॉल्टर्स को पकड़ रहे हैं।' विभाग के एक स्पेशल कमिश्नर ने बताया कि कई राज्यों ने स्कीम में दिलचस्पी दिखाई है और वे पूछताछ भी कर रहे हैं। इनमें राजस्थान भी शामिल है।

स्कीम के तहत ग्राहकों को खरीदारी के बाद अपना बिल कुछ डीटेल्स के साथ स्कीम के ऐप पर अपलोड करना होता है। विभाग हर महीने लकी ड्रॉ के जरिए कुल बिलों के एक पर्सेंट के बराबर लोगों को इनाम के लिए चुनता है। इनाम की राशि खरीद वैल्यू का पांच गुना होती है। विभाग इनाम देने से पहले सभी बिलों के टीआईएन नंबर की जांच कर पता लगाता है कि डीलर ने काटा गया टैक्स जमा कराया है या नहीं। विभाग ने सैकड़ों ऐसे डीलर्स को पकड़ा है, जिनका रजिस्ट्रेशन कैंसल हो चुका है या जो दूसरे के नंबर से फर्जी ट्रेड कर रहे हैं। यादव ने बताया कोई भी एन्फोर्समेंट टीम इतने व्यापक स्तर पर दुकान-दुकान का सर्वे नहीं कर सकती। ग्राहक के किसी दबाव या लालच में आने की संभावना भी नहीं होती और न ही दुकानदार को पता होता है कि उसका बिल हमारे रेडार पर आ रहा है।

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग