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Narendra Modi Speech: विकसित भारत का संकल्प, आखिर दुनिया के मुकाबले कहां खड़े हैं हम, कितनी दूर है मंजिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अगले 25 साल में भारत को विकसित देश (Developed Country) बनाने का संकल्प देशवासियों को दिया है। आजादी के बाद पिछले 75 साल में देश ने कई मोर्चों पर शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। लेकिन यह भी सच है कि भारत आज भी विकासशील देशों (Developing Countries) में आता है। सवाल यह है कि आखिर दुनिया के मुकाबले कहां खड़े हैं हम?

Curated byदिल प्रकाश | नवभारतटाइम्स.कॉम 15 Aug 2022, 12:23 pm

हाइलाइट्स

  • मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत लक्ष्य होना चाहिए
  • पिछले 75 साल में देश ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है
  • लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत अब भी काफी पीछे
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नवभारतटाइम्स.कॉम PM Narendra Modi
नई दिल्ली: आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश के लिए पांच प्रण का जिक्र किया। मोदी ने पहले प्रण का जिक्र करते हुए कहा कि हमें 2047 तक विकसित भारत (Developed India) के लक्ष्य पर काम करना होगा। इसके लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा। विकसित भारत हमारा पहला संकल्प है। यह बड़ा संकल्प है, लेकिन इससे कम हमें मंजूर नहीं है। 75 साल की यात्रा में आशाएं, अपेक्षाएं, उतार-चढ़ाव के बीच हरेक के प्रयास से हम आज यहां तक पहुंच पाए हैं। आजादी के बाद पिछले 75 साल में भारत में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। लेकिन यह भी सच है कि भारत आज भी विकासशील देशों में आता है। सवाल यह है कि आखिर दुनिया के मुकाबले कहां खड़े हैं हम? कितनी दूर है हमारी मंजिल? आइए इन सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं..
जून 2018 में आई एसबीआई (SBI) के एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत के पास अपनी स्थिति को बदलकर विकसित देशों की कतार में शामिल होने के लिए सिर्फ एक दशक का वक्त है। इसके लिए भारत को शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होगी। अगर वह इस मोर्चे पर विफल हुआ तो देश की युवा आबादी का लाभ नुकसान में बदल जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया था कि नीति-निर्माताओं को इस बात का अंदाजा होना चाहिए कि भारत के पास विकसित देश का सेहरा पहनने के लिए बहुत थोड़ा समय है जिसमें यह अपना दर्जा बढ़ा सकता है या फिर हमेशा के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में अटका रहेगा। साथ ही डेमोग्राफिक डिविडेंड को समझने और अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा में निवेश करना चाहिए।

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75 साल में कितनी प्रगति
पिछले 75 साल में देश विकास के ज्यादातर मापदंडों पर काफी आगे बढ़ा है। लेकिन, यह भी सच है कि हम अपने लक्ष्य से वर्षों दूर हैं। देश ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, सोशल सेक्टर, इकॉनमी की दिशा में बहुत काम हुआ है लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर हुए निवेश की रैंकिंग में भारत अफ्रीका के कई देशों से नीचे है। विकसित देशों की कतार में शामिल होने के लिए भारत को ऐसी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए जो सबको आसानी से उपलब्ध हो। क्वालिटी एजुकेशन तक सबकी समान रूप से पहुंच होनी चाहिए। गरीबी से पूरी तरह छुटकारा मिलना चाहिए। सैनिटेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बहुत काम हुआ है, लेकिन उसे लोगों की आदत में शामिल करने की अभी भी आवश्यकता है।

अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा, और वो बड़ा संकल्प है विकसित भारत और उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

साथ ही प्रदूषण पर नियंत्रण और कुपोषण आज भी हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ। जब तक इन चीजों पर ज्यादा निवेश नहीं होगा, भारत को विकास के अगले पायदान पर ले जाना मुश्किल है। किसी भी इकॉनमी के विकास का एक सबसे बड़ा संकेत तेज गति से शहरीकरण को माना जाता है। भारत की अधिकतर आबादी अभी भी गांवों में बसती है। अगर दुनिया के विकसित देशों से तुलना करें तो हम अभी काफी पीछे हैं। लेकिन शहरों में उनके लिए इतना इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अर्बन मिशन और स्मार्ट सिटी योजना की प्रगति बहुत ही धीमी नजर आती है।

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कितना दूर है विकसित भारत का सपना

कोरोना का कारण देश की इकॉनमी प्रभावित हुई हैं उससे भी विकसित भारत का सपना थोड़ा और दूर हो गया है। हालांकि देश की इकॉनमी फिर से पटरी पर लौट रही है और माना जा रहा है कि इस वित्त वर्ष में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकॉनमी होगा। सरकार ने साल 2022 तक सभी के लिए पक्के घर का लक्ष्य तय कर रखा था लेकिन फिलहाल इसे हासिल करना कठिन दिख रहा है। विकसित देशों की जीडीपी में इंडस्ट्रियल और सर्विसेज सेक्टर्स का बड़ा योगदान होता है। भारत में सर्विसेज सेक्टर तो ठीकठाक है लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा इकॉनमी के मॉडर्न सेगमेंट में नहीं आता है। पूरी इकॉनमी की तुलना में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर छोटा है। आधी से अधिक आबादी अब भी खेती से जुड़ी है। इससे बाहर निकलने के लिए देश की महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की जरूरत होगी। इसके लिए मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाना होगा। दूसरी ओर भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में बेहतर कंपनियां हैं और एक विकसित फाइनेंशियल सिस्टम है। लेकिन टोटल इकॉनमी में इसकी पहुंच कम है।

UN Human Development Reports के मुताबिक एक दशक में भारत मानव विकास सूचकांक के मामले में लो से मीडियम कैटगरी में आ चुका है और अगले एक दशक में बारत हाई कैटगरी में जा सकता है। इसमें प्रति व्यक्ति आय, स्कूलों का लेवल और जीवन प्रत्याशा को शामिल किया जाता है। विकसित देश बनने के लिए भारत को अपनी प्रति व्यक्ति आय में काफी इजाफा करना होगा। पिछले 75 साल में भारत की प्रति व्यक्ति आय 500 गुना बढ़ी है। 1950 में यह 265 रुपये थी जो 2020-21 में 1,28,829 रुपये पहुंच गई। हालांकि यह विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। उदाहरण के लिए अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय 2021 में 61280.39 डॉलर थी।

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एक तिहाई अनपढ़ भारत
में
जहां तक साक्षरता की दर है तो इसमें भी भारत कई अफ्रीकी देशों से नीचे है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में जितने निरक्षर लोग हैं, उनमें से एक तिहाई भारत में हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत को अभी कितना काम करना है। जीवन प्रत्याशा के मामले में आजादी के बाद काफी प्रगति हुई है लेकिन यह अब भी करीब 70 साल के आसपास है। दुनिया की 70 से अधिक देशों में यह 75 साल से ऊपर है। अगर भारत को विकसित बनना है तो उसे इन सभी मापंदडों पर खरा उतरना होगा। इसके लिए देश को लक्ष्य तय करने होंगे और उन्हे हासिल करना होगा।
लेखक के बारे में
दिल प्रकाश
दिल प्रकाश नवभारतटाइम्स.कॉम में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। उन्हें पत्रकारिता में 17 साल से अधिक अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत साल 2006 में यूनीवार्ता से की थी। शुरुआत में खेल डेस्क के लिए काम किया। इस दौरान राष्ट्रमंडल खेल (2010), हॉकी वर्ल्ड कप, आईपीएल और वनडे वर्ल्ड कप (2011) को कवर किया। फिर नेशनल ब्यूरो से जुड़े और पार्लियामेंट से लेकर राजनीति, डिफेंस और पर्यावरण जैसे कई विषयों पर रिपोर्टिंग की। इस दौरान तीन साल तक बीबीसी में भी आउटसाइड कंट्रीब्यूटर रहे। यूनीवार्ता में दस साल तक काम करने के बाद साल 2016 में बिजनस स्टैंडर्ड से जुड़े। फरवरी 2020 में ऑनलाइन का रुख किया।... और पढ़ें

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