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क्या आपको महंगे दालों और खाद्य तेलों से जल्द राहत मिलने वाली नहीं है?

खाद्य तेलों की कीमतों में जल्द कमी आने की उम्मीद नहीं है। Reserve Bank of India ने कहा है कि दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।

भाषा 27 May 2021, 7:42 pm

हाइलाइट्स

  • Demand और Supply में अंतर से दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव है।
  • वित्त वर्ष 2020-21 में बंपर पैदावार की वजह से कीमतों में जल्द नरमी की उम्मीद।
  • Reserve Bank ने कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर का असर महंगाई पर पड़ेगा।
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मुंबई
दालों और खाद्य तेलों के दाम में तेजी बने रहने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने यह अनुमान जताया है।केंद्रीय बैंक ने कहा है कि मांग-आपूर्ति असंतुलन की वजह से दलहन (pulses) और खाद्य तेल (Edible oil) जैसे खाद्य पदार्थों पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि वर्ष 2020-21 की बम्पर पैदावार (bumper harvest) को देखते हुए आने वाले समय में अनाज की कीमतों में नरमी आ सकती है।
महंगाई पर कोरोना की दूसरी लहर का असर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिजर्व बैंक ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर (Second wave of Corona) का असर मार्च में संक्रमण मामलों के बढ़ने के कारण आगे चलकर महंगाई पर भी दिख सकता है। इसके साथ ही केन्द्रीय बैंक का मानना है कि कच्चे तेल के दाम में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

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डब्ल्यूपीआई और सीपीआई के बीच अंतर का क्या मतलब?
रिपोर्ट में कहा गया है कि थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale price index) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer price index) आधारित मुद्रास्फीति के बीच का अंतर, खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति व्यवहार को दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ((Consumer price index)) आधारित खाद्य मुद्रास्फीति पिछले साल देशव्यापी ‘लॉकडाऊन’ (lockdown) के बाद बढ़ गयी, जब कि थोकमूल्य सूचकांक (Wholesale price index) में शामिल उत्पादों की मुद्रास्फीति इस दौरान कम हो गई।

लॉकडाउन से खाद्य कीमतों में ज्यादा वृद्धि
Reserve Bank of India ने यह भी कहा कि लॉकडाउन के बाद की अवधि में खुदरा कीमतों में वृद्धि खाद्य कीमतों में गर्मियों के मौसम में होने वाली सामान्य वृद्धि तुलना में बहुत अधिक थी। आरबीआई की रिपोर्ट में कहा है कि साल के दौरान थोक और खुदरा मुद्रास्फीति के बीच पर्याप्त अंतर लगातार आपूर्ति बाधाओं और खुदरा मार्जिन अधिक रहने की ओर इशारा करता है। इससे माल एवं सामग्री का बेहतर आपूर्ति प्रबंधन महत्वपूर्ण हो गया है।

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कच्चे तेल की कीमतों में जारी रहेगा उतार-चढ़ाव
कच्चे तेल की कीमतों के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में मांग बढ़ने की उम्मीद में दाम बढ़ने लगे हैं जबकि दूसरी तरफ तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) सदस्य और उनके सहयोगी दूसरे देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती को जारी रखा हुआ है। रिजर्व बैंक ने कहा कि निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की उम्मीद है।

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