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स्टेशन के स्टॉल IRCTC को देने के विरोध में उतरे रेल फूड वेंडर्स

रेलवे फूड वेंडर्स और कैटरर्स ने नई कैटरिंग पॉलिसी के कई प्रस्तावों पर चिंता जताई है और सरकार से गुजारिश की है कि बजट में इसे लागू करने को लेकर जल्दबाजी न की जाए। उनका आरोप है कि नई पॉलिसी से पूरे रेलवे की खानपान व्यवस्था पर बड़ी कंपनियों का कब्जा हो जाएगा और हजारों वेंडर बेरोजगार हो जाएंगे।

इकनॉमिक टाइम्स 20 Jan 2017, 9:40 am
नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम rail food vendors against the catering policy
स्टेशन के स्टॉल IRCTC को देने के विरोध में उतरे रेल फूड वेंडर्स

रेलवे फूड वेंडर्स और कैटरर्स ने नई कैटरिंग पॉलिसी के कई प्रस्तावों पर चिंता जताई है और सरकार से गुजारिश की है कि आगामी बजट में इसे लागू करने को लेकर जल्दबाजी में कोई ऐलान न किया जाए। उनका आरोप है कि नई पॉलिसी से पूरे रेलवे की खानपान व्यवस्था पर कुछ बड़ी कंपनियों का कब्जा हो जाएगा और हजारों वेंडर बेरोजगार हो जाएंगे। सामाजिक संगठनों ने भी वेंडर्स का साथ देते हुए कहा है कि नई पॉलिसी से मुसाफिरों का खाना कई गुना महंगा हो जाएगा।

अखिल भारतीय रेलवे खानपान लाइसेंसीज असोसिएशन की अगुवाई में गुरुवार को कई संगठनों की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई पॉलिसी को जनविरोधी करार दिया गया। असोसिएशन के प्रेजिडेंट रवींद्र गुप्ता ने बताया, 'पिछले महीने जारी कैटरिंग ड्राफ्ट पॉलिसी में ट्रेनों के भीतर पैंट्री कार के साथ स्टेशनों और प्लेटफॉर्मों के स्टॉल और फूड वेंडिंग लाइसेंसियों को भी IRCTC को सौंपने का प्रस्ताव है। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी और बड़ी कैटेरिंग कंपनियों का सिस्टम पर कब्जा हो जाएगा।'

उन्होंने बताया कि नई पॉलिसी के लागू होने पर स्टेशनों के सभी लाइसेंसियों से एक से ज्यादा स्टॉल ले लिए जाएंगे, जबकि नई टेंडरिंग और फीस रेट के तहत एक व्यक्ति को हर डिविजन में पांच स्टॉल लेने की छूट होगी। इससे हर कंपनी सभी डिवीजनों को मिलकर करीब 300 स्टॉल हथिया लेगी। पॉलिसी के तहत खोमचे वाले और 60 वर्गफुट स्टॉल वाले, दोनों को एक यूनिट करार दिया गया है और उनकी लाइसेंस फीस भी बराबर होगी। ऐसे में छोटा वेंडर कंपनियों के मुकाबले नहीं टिक पाएगा।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और अब वेंडर्स के सरोकार से जुड़ीं मेधा पाटेकर ने कहा कि सरकार पर जनहित में दोबारा सोचना चाहिए और छोटे कामगारों और यात्रियों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा रेलवे में गरीब से गरीब आदमी सफर करता है और कैटरिंग सिस्टम पर बड़ी कंपनियों की मोनोपॉली बढ़ने से खानपान उसकी पहुंच से बाहर हो जाएगा।

साल 2000 में सबसे पहले नीतीश कुमार ने मूविंग कैटरिंग को IRCTC के हवाले किया था। उसके बाद लालू यादव ने सभी कैटरिंग उसके हवाले कर दी थी, लेकिन साल 2010 में ममता बनर्जी ने सभी कैटरिंग IRCTC से लेकर रेलवे बोर्ड को दे दी थी। वेंडर्स का कहना है कि स्टेशनों पर सीधे संपर्क में होने से रेलवे बोर्ड बेहतर प्रशासन दे सकता है।

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