ऐपशहर

क्रूड ऑइल मार्केट पर दूरगामी असर डालेगा सऊदी प्रिंस सलमान का प्रमोशन

सऊदी अरब में मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनाए जाने का असर आने वाले वक्त में तेल मार्केट पर भी देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले बड़े देश पिछले कई सालों से कीमतों में इजाफे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में मोहम्मद बिन सलमान की भूमिका अहम होगी।

NYT न्यूज़ सर्विस 22 Jun 2017, 10:28 pm
रियाद
नवभारतटाइम्स.कॉम mohammad-salman

सऊदी अरब में मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनाए जाने का असर आने वाले वक्त में तेल मार्केट पर भी देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले बड़े देश पिछले कई सालों से कीमतों में इजाफे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में मोहम्मद बिन सलमान की भूमिका अहम होगी। बुधवार को सऊदी किंग सलमान ने अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद को क्राउन प्रिंस बनाए जाने का ऐलान किया था। बीते 2 से ढाई साल के दौरान मोहम्मद बिन सलमान अपने पिता के शासक रहते हुए सऊदी अरब के एनर्जी मॉडल को बदलने का काम करते रहे हैं।

सऊदी अरब की इकॉनमी कच्चे तेल की कीमतों में लगातार कमजोरी के संकट से जूझ रही है। क्राउन प्रिंस बने सलमान डेप्युटी क्राउन प्रिंस रहते हुए बीते करीब दो सालों से ओपेक देशों के साथ मिलकर क्रूड प्रॉडक्शन में कटौती कर कीमतों को बढ़ाने के प्रयासों में जुटे थे। हालांकि अमेरिका में शेल ऑइल और लीबिया के उत्पादन के चलते मार्केट में यह रणनीति सफल नहीं हो पा रही है। सऊदी अरब की घरेलू इकॉनमी की बात करें तो क्राउन प्रिंस सलमान एनर्जी सेक्टर को मजबूत करने के लिए काम करते रहे हैं। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के आईपीओ बेचने के लिए वॉल स्ट्रीट बैंकर्स को आमंत्रित किया। इसके जरिए सऊदी अरब सरकार को सैकड़ों अरब डॉलर की राशि मिलने की उम्मीद है।

यही नहीं मोहम्मद बिन सलमान ने लंबे समय से काम कर रहे तेल मंत्री को हटाकर नए व्यक्ति को इस जिम्मेदारी के लिए चुना ताकि वह अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहना सकें। मोहम्मद बिन सलमान के समर्थकों को कहना है कि वह किंगडम में ऑइल एक्सपोर्ट को मजबूत कर सकेंगे और इकॉनमी में विविधता लाएंगे। हालांकि उनके आलोचकों का कहना है कि वे अनुभवहीन हैं, अधिकारियों को नजरअंदाज करते हैं और अचानक बड़े फैसले ले लेते हैं। लंदन स्थित मिडल ईस्ट एनर्जी एनालिस्ट के पॉल स्टीवन्स ने कहा, 'समस्या यह है कि उनके बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता और यह स्पष्ट नहीं है कि वह किसकी राय को महत्व देते हैं।'

जानें, मोहम्मद बिन सलमान के राजनीतिक उभार से तेल कीमतों, वैश्विक ऊर्जा उत्पादन और सऊदी कंपनी अरामको के शेयरों की बिक्री पर होगा क्या असर:

क्रूड की गिरती कीमतें
कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल 45 अरब डॉलर प्रति बैरल के करीब है। सलमान के प्रमोशन की खबर के बाद इसमें गिरावट और बढ़ी है। अप्रैल मध्य के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 20 पर्सेंट की गिरावट आ गई है। इसका बड़ा कारण यह है कि ओपेक देशों की ओर से प्रॉडक्शन में कमी करने की कोशिशों के बाद भी सप्लाइ में कमी नहीं आई है और कच्चे तेल के रेट में गिरावट जारी है। ओपेक देशों की ओर से उत्पादन में कमी के फैसले को अमेरिकी शेल ऑइल के प्रॉडक्शन ने लगातार कमजोर किया है।

कीमतें रोकने में फ्लॉप होती सऊदी अरब की रणनीति
सलमान एक बार फिर से अपनी रणनीति पर काम करते हुए तेल की कीमतों में इजाफे के प्रयास शुरू कर सकते हैं। शुरुआत में उन्होंने ऐलान किया था कि कीमतें मायने नहीं रखतीं। लेकिन पिछले साल जब कीमतों में तेज गिरावट का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने ओपेक समेत रूस जैसे देश से क्रूड के प्रॉडक्शन में कमी का समर्थन किया था। अब एक बार फिर से सऊदी अरब और ओपेक देश प्रॉडक्शन में कमी की ओर बढ़ सकते हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि सऊदी अरब प्रॉडक्शन में कमी के रास्ते पर बढ़ सकता है, इससे अरामको के आईपीओ के लिए अच्छा माहौल तैयार हो सकेगा।

प्रॉडक्शन कम करने की रणनीति पर फिर करेंगे कामसबसे बड़ा सवाल यह है कि सऊदी अरब कब तक क्रूड के प्रॉडक्शन में कमी पर अड़ा रहेगा, जबकि उसके चलते कीमतों में कोई इजाफा देखने को नहीं मिल रहा है। 2014 में सऊदी के तत्कालीन तेल मंत्री अली अल-नाइमी ने कहा था कि ओपेक देशों की ओर से प्रॉडक्शन कम करने की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसा किया जाएगा तो दूसरे देश उनकी जगह ले सकते हैं। हालांकि जब पिछले साल की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें 30 अरब डॉलर से भी नीचे पहुंच गईं तो सऊदी अरब ने अस्थायी तौर पर प्रॉडक्शन में कटौती की मांग की थी। अब तक इस नीति के चलते कीमतों में इजाफा हुआ है और उत्पादक देशों के रेवेन्यू में इजाफा हुआ है। कच्चे तेल की गिरती कीमतों के चलते सऊदी हितों को देखते हुए मोहम्मद बिन-सलमान एक बार फिर से प्रॉडक्शन कम करने का कदम उठा सकते हैं।

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग