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SECI ऑक्शन में सोलर टैरिफ दोबारा ~2.44 के सबसे लो लेवल पर आया

चीन से इम्पोर्ट बना वजह-इंडस्ट्री ने टैरिफ में इस गिरावट के पीछे चीन में हो रही घटनाओं को वजह बताया है, जहां से देश के सोलर प्रोजेक्ट्स में ...

इकनॉमिक टाइम्स 4 Jul 2018, 9:00 am
[ काव्या चंद्रशेखरन | बेंगलुरु ]
नवभारतटाइम्स.कॉम solar tariff in seci auction again came to the lowest level of 2 44
SECI ऑक्शन में सोलर टैरिफ दोबारा ~2.44 के सबसे लो लेवल पर आया


सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसआईसीआई) की ओर से की गई 2000 मेगावॉट की नीलामी में सोलर टैरिफ गिरकर एक बार फिर से ₹2.44 प्रति यूनिट के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। देश के सबसे बड़े सोलर डिवेलपर्स में से एक एक्मे सोलर ने इस नीलामी में 600 मेगावॉट का प्रोजेक्ट जीता है। इससे पहले मई 2017 में भाडला सोलर पार्क के प्रोजेक्ट्स के लिए हुए नीलामी में सोलर टैरिफ गिरकर 2.44 रुपये प्रति यूनिट पर पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद हुए नीलामी में यह काफी तेजी से बढ़ा। इस साल फरवरी में कर्नाटक रिन्यूएबल एनर्जी डिवेलपमेंट्स लिमिटेड (केआरडीईएल) की ओर से कर्नाटक के विभिन्न तालुका के लिए हुए 860 मेगावॉट के प्रोजेक्ट्स की नीलामी में यह 2.94-3.54 रुपये प्रति यूनिट के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। गुजरात, महाराष्ट्र और एनटीपीसी की तरफ से आयोजित इस साल अन्य नीलामियों में टैरिफ 2.50 रुपये प्रति यूनिट के ऊपर रहा है।

इस नीलामी में शापूरजी पालोनजी ने 2.52 रुपये प्रति यूनिट की बोली पर 250 मेगावॉट का प्रोजेक्ट जीता है। अन्य विजेताओं में अजूरे पावर, हीरो सोलर और महिंद्रा सस्टेन के नाम शामिल हैं। तीनों ने 2.53 रुपये प्रति यूनिट के टैरिफ पर बोली लगाई थी। जहां नीलामी में अजूरे पावर को 600 मेगावॉट का प्रोजेक्ट मिला, वहीं हीरो और महिंद्रा में से हरेक को 250 मेगावॉट के प्रोजेक्ट्स मिले हैं। बचे हुए 50 मेगावॉट को महोबा सोलर ने 2.54 प्रति यूनिट की बोली पर हासिल किया है। 2000 मेगावॉट के यह सभी प्रोजेक्ट सीधे इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (आईएसटीएस) से जुड़े हैं।

इंडस्ट्री सूत्रों ने टैरिफ में गिरावट के पीछे चीन में हो रही घटनाओं को वजह बताया है, जहां से देश के सोलर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले करीब 80 पर्सेंट सोलर पैनल और मॉड्यूल्स इम्पोर्ट होते हैं। मई महीने के अंत में चीन की सरकार की लगा कि सोलर सेक्टर काफी तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते उसने किसी अन्य सोलर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देना बंद कर दिया और सोलर डिवेलपर्स को दी जाने वाली सब्सिडी घटा दी। चीन में लोकल डिमांड गिरने से वहां के सोलर मैन्युफैक्चरर के पास इसे एक्सपोर्ट करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा, जिसकी वजह से कीमतों में गिरावट आई है।

चीन चैंबर ऑफ कामर्स फॉर इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट ऑफ मशीनरी एंड इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट्स के मुताबिक 2017 में चीन के कुल सोलर एक्सपोर्ट में भारत का 30.9 पर्सेंट हिस्सा था। पिछले साल, चीन में सोलर पैनल की लागत बढ़ने और चीन के सोलर इंपोर्ट पर सेफगार्ड ड्यूटी लगने की संभावना के चलते टैरिफ में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। हालांकि स्थानीय मैन्युफैक्चरर अभी देश की सोलर इक्विपमेंट्स को लेकर बढ़ती जरूरतों को पूरा कर पाने की स्थिति में नहीं है। भारत ने 2022 तक 100 गीगावॉट की सोलर क्षमता को हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

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