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Spicejet latest news: 45 मिनट तक नहीं आई स्पाइसजेट की बस, रनवे पर पैदल ही चल दिए पैसेंजर, डीजीसीए ने शुरू की जांच

एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट (SpieceJet) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कंपनी के विमानों में हाल में तकनीकी गड़बड़ी के कई मामले सामने आए हैं। इसके बाद डीजीसीए (DGCA) ने उसे आधी उड़ानों की ही अनुमति दी है। लेकिन इस बीच एक और घटना से कंपनी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

Edited byदिल प्रकाश | भाषा 7 Aug 2022, 5:06 pm
नई दिल्ली: संकट में फंसी एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट (SpiceJet) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए (DGCA) ने स्पाइसजेट के विमानों में हाल में आई तकनीकी गड़बड़ी के मद्देनजर अगले आठ हफ्तों तक उसकी 50 फीसदी उड़ानों पर रोक लगा रखी है। डीजीसीए ने साथ ही कहा है कि इन आठ हफ्तों के दौरान एयरलाइन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। लेकिन इस बीच एक और वाकया सामने आया है। स्पाइसजेट के हैदराबाद से दिल्ली आए विमान से उतरे कई यात्री शनिवार रात हवाईअड्डे की सड़क पर पैदल चलने लगे क्योंकि एयरलाइन उन्हें टर्मिनल तक ले जाने के लिए करीब 45 मिनट तक कोई बस नहीं उपलब्ध करा पाई। सूत्रों के मुताबिक डीजीसीए इस घटना की जांच कर रहा है।
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स्पाइसजेट ने कहा कि बसों के आने में थोड़ी देरी हुई लेकिन उनके आने के बाद सभी यात्रियों को टर्मिनल भवन तक ले जाया गया, जिनमें वे यात्री भी शामिल थे जो हवाईअड्डे की सड़क पर पैदल चलने लगे थे। कंपनी ने कहा, ‘हमारे कर्मचारियों के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कुछ यात्री टर्मिनल की ओर चलने लगे। वे कुछ मीटर ही चले होंगे कि तभी बसें आ गईं। उनके समेत सभी यात्रियों को बसों से टर्मिनल इमारत तक ले जाया गया।’ यात्रियों को दिल्ली हवाईअड्डे के रनवे क्षेत्र की सड़क पर चलने की अनुमति नहीं होती है क्योंकि इससे सुरक्षा खतरा पैदा हो सकता है। रनवे की सड़क केवल वाहनों के लिए चिह्नित मार्ग होती है। यही वजह है कि एयलाइन यात्रियों को विमान से टर्मिनल तक ले जाने या टर्मिनल से विमान तक लाने के लिए बसों का इस्तेमाल करती हैं।

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आधी उड़ानों पर रोक
अभी स्पाइसजेट डीजीसीए के आदेशों के अनुसार अपनी 50 प्रतिशत से अधिक उड़ानों का संचालन नहीं कर रही है। डीजीसीए ने जुलाई में उसकी उड़ानों पर आठ हफ्तों का प्रतिबंध लगाया था क्योंकि 19 जून से पांच जुलाई तक उसके विमानों में तकनीकी खामियों की कम से कम आठ घटनाएं हुई थीं। डीजीसीए ने साथ ही कहा था कि इन आठ हफ्तों के दौरान एयरलाइन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। यानी अगर कुछ गड़बड़ी हुई तो एयरलाइन पर और सख्त कार्रवाई हो सकती है। संभव है कि ऐसी स्थिति में उसकी सभी उड़ानों पर रोक लगा दी जाए। स्पाइसजेट मार्केट शेयर के हिसाब से इंडिगो (Indigo) और गो फर्स्ट (Go First) के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है। इसकी बाजार हिस्सेदारी 9.5 फीसदी है। कंपनी पिछले 17 साल से फ्लाइट्स ऑपरेट कर रही है लेकिन हाल के दिनों में उस पर कई तरह के सवाल उठे हैं।

सूत्रों ने बताया कि स्पाइसजेट की हैदराबाद-दिल्ली उड़ान शनिवार रात करीब 11 बजकर 24 मिनट पर अपने गंतव्य पर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि एक बस तुरंत आ गई और उसने कुछ यात्रियों को टर्मिनल 3 तीन पहुंचाया। सूत्रों ने कहा कि बाकी के यात्रियों ने करीब 45 मिनट तक इंतजार किया और जब उन्हें कोई बस आती हुई नहीं दिखी तो उन्होंने टर्मिनल की ओर पैदल चलना शुरू कर दिया, जो कि 1.5 किलोमीटर दूर था। उन्होंने बताया कि ये यात्री रनवे की सड़क पर करीब 11 मिनट तक पैदल चले, तभी उन्हें टर्मिनल तक ले जाने के लिए करीब 12 बजकर 20 मिनट पर एक बस आई।

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कंपनी ने क्या कहा
इस घटना के बारे में पूछे जाने पर स्पाइसजेट ने एक बयान में कहा, ‘इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है कि स्पाइसजेट की हैदराबाद-दिल्ली उड़ान के यात्रियों को छह अगस्त को टर्मिनल की ओर पैदल जाने पर विवश किया गया।’ एयरलाइन ने कहा, ‘रनवे से टर्मिनल इमारत तक यात्रियों को ले जाने के लिए बस आने में थोड़ी देरी हुई। हमारे कर्मचारियों के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कुछ यात्रियों ने टर्मिनल की ओर चलना शुरू कर दिया। वे कुछ मीटर दूर ही गए होंगे, तभी बसें आ गईं। पैदल चलने वाले यात्रियों समेत सभी यात्रियों को बसों से टर्मिनल इमारत तक ले जाया गया।’
लेखक के बारे में
दिल प्रकाश
दिल प्रकाश नवभारतटाइम्स.कॉम में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। उन्हें पत्रकारिता में 17 साल से अधिक अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत साल 2006 में यूनीवार्ता से की थी। शुरुआत में खेल डेस्क के लिए काम किया। इस दौरान राष्ट्रमंडल खेल (2010), हॉकी वर्ल्ड कप, आईपीएल और वनडे वर्ल्ड कप (2011) को कवर किया। फिर नेशनल ब्यूरो से जुड़े और पार्लियामेंट से लेकर राजनीति, डिफेंस और पर्यावरण जैसे कई विषयों पर रिपोर्टिंग की। इस दौरान तीन साल तक बीबीसी में भी आउटसाइड कंट्रीब्यूटर रहे। यूनीवार्ता में दस साल तक काम करने के बाद साल 2016 में बिजनस स्टैंडर्ड से जुड़े। फरवरी 2020 में ऑनलाइन का रुख किया।... और पढ़ें

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