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पालना घर के बारे में जल्दी ही नियम लाएगा श्रम मंत्रालय

नयी दिल्ली, 16 जुलाई :भाषा: श्रम मंत्रालय मातृत्व कानून को प्रभावी बनाने के मकसद से कार्यस्थलों पर पालना घर :क््रुेश: स्थापित करने के लिये जल्दी ही नियमन लाएगा। इसके तहत 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को छोटे बच्चों के लिये क््रुेश स्थापित करना अनिवार्य होगा।

भाषा 16 Jul 2017, 12:00 pm
नयी दिल्ली, 16 जुलाई :भाषा: श्रम मंत्रालय मातृत्व कानून को प्रभावी बनाने के मकसद से कार्यस्थलों पर पालना घर :क््रुेश: स्थापित करने के लिये जल्दी ही नियमन लाएगा। इसके तहत 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को छोटे बच्चों के लिये क््रुेश स्थापित करना अनिवार्य होगा। अधिकारियों ने पीटीआई भाषा से कहा कि पालना घर को लेकर अधिसूचना और अन्य अनिवार्य आवश्यकताओं को जल्दी ही जारी किया जाएगा। मातृत्व लाभ :संशोधन: कानून, 2017 के प्रावधान के तहत एक जुलाई से 50 या उससे अधिक कर्मचारियों के लिये क््रुेश की सुविधा अनिवार्य की गयी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, फिलहाल कंपनियां छूट ले सकती हैं क्योंकि हमने अभी परिभाषित नहीं किया है कि एक नियोक्ता द्वारा कितनी दूरी पर क््रुेश खोला जाना चाहिए। हमें नियम लाने वाले हैं और उसके बाद इसे अधिसूचित किया जाएगा। हम एक-दो महीने में इसे अधिसूचित करेंगे। हालांकि इस महीने की पहली तारीख से नियम प्रभाव में आ गये हैं लेकिन सरकारी संगठनों समेत देश भर के कई प्रतिष्ठान ने कर्मचारियों को यह सुविधा अबतक नहीं दी हैं संशोधित कानून कहता है कि जिस प्रतिष्ठान में 50 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, उन्हें निर्धारित दूरी के हिसाब से या तो अलग से या साझाा सुविधाओं के जरिये क््रुेश की सुविधा देनी होगी। अधिकारी ने कहा कि श्रम मंत्रालय उन मंत्रालयों या विभागों से भी अनुरोध करेगा जिन्होंने अबतक क््रुेश की सुविधा उपलब्ध नहीं करायी है। मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा, अधिसूचना प्रक््िरुयाधीन है। खान कर्मियों के लिये केंद्र सरकार नियम बनाएगी। अन्य प्रतिष्ठानों तथा निजी कंपनियों के लिये संबद्ध राज्य के विभाग अधिसूचना लाएंगे। यह पूछे जाने पर कि अगर कंपनियां नियमों का अनुपालन नहीं करती है तो क्या कार्वाई की जा सकती है, अधिकारियों ने कहा कि इसके लिये कड़े दंडनीय प्रावधान किये गये हैं। अधिकारी के अनुसार, खान कर्मियों के मामले में केंद्र सरकार उपयुक्त कार्वाई करेगी। अन्य मामलों में संबंधित राज्यों के श्रम आयुक्त कार्वाई करेंगे। भाषा

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