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रिण न चुकाने वाले कर्जदारों से निपटने का नया कानून कल से प्रभावी

नई दिल्ली, 30 नवंबर :भाषा: देश में वसूली में फंसे कर्जों और उनमें उलझी

नवभारतटाइम्स.कॉम 30 Nov 2016, 5:19 pm
नई दिल्ली, 30 नवंबर :भाषा: देश में वसूली में फंसे कर्जों और उनमें उलझी सम्पत्तियों के मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए बनायी गयी एक नयी संहिता कल से लागू होने जा रही है। रिण-शोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता के तहत शोधन अक्षमता पर पेशेवर सलाह देने वाली एजेंसियां का पंजीकरण शुरू हो चुका है। संसद के कानून के तहत गठित दो राष्ट्रीय संस्थानों भारतीय कंपनी सचिव संस्थान :आईसीएसआई: और भारतीय चार्डर्ड एकाउंटेंट संस्थान :आईसीएआई: ने इस संहिता के तहत शोधन-अक्षमता के क्षेत्र में पेशेवर एजेंसी के रूप में काम करने के लिए लाभ-विमुख कंपनियों का पंजीकरण कराया है। यह व्यापक संहिता रिण-शोधन करने में असमर्थ इकाइयों, व्यक्तियां, भागीदारी फर्मों और कंपनियों संबंधित विवादों के समाधान और पुनर्गठन की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पुराने कानूनों की जगह बनायी गयी है। इस संहिता के तहत भारतीय रिण-शोधन अक्षमता एवं दिवाला परिषद :आईबाबीआई: का गठन किया जा चुका है। आईसीएसआई की अध्यक्ष ममता बिनानी ने यहां संवाददाताओं से कहा, पूरी संहिता कल से काम करना शुरू कर देगी। उन्होंने कहा कि दिवाला संहिता से मामलों का निपटान और उनमें फंसी सम्पत्तियों को मुक्त करने का काम शीघ्रता से संपन्न होगा। औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्गठन :बाइफर: अब अनुपयोगी हो चला है। नयी व्यवस्था में कंपनियों के मामलों को राष्ट्रीय कंपनी-विधि न्यायाधिकरण और प्रोपराइटरी तथा भागीदारी फर्मों के दिवालापन के मामलों को रिण वसूली न्याधिकरण देखेगा।

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