ऐपशहर

खतरे में अमेरिकी इकॉनमी! फेडरल रिजर्व के इस झटके से मंडराया बैंकों पर खतरा, संकट अभी और बाकी

अमेरिकी फेडरल ने ब्याज दर में बढ़ोतरी कर दी है। अमेरिका में बढ़ रहे बैंकिंग संकट के बीच ये बढ़ोतरी की गई है, जिसने बैंकिंग सेक्टर की चिंता और बढ़ा दी है। फेड के इस ऐलान के बाद ब्याज दर बढ़कर अब 4.75% से 5% हो गई। वहीं अमेरिका के बैंकों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है

Curated byबविता झा | नवभारतटाइम्स.कॉम 23 Mar 2023, 6:17 am

हाइलाइट्स

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फेड रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की.
ब्याज दर बढ़कर अब 4.75% से 5% हो गया.

अमेरिका के 186 बैंकों पर संकट मंडरा रहा है.

सारी खबरें हाइलाइट्स में पढ़ने के लिए ऐप डाउनलोड करें
नवभारतटाइम्स.कॉम fed rate hike effect
फेडरल ने बढई ब्याज दर
नई दिल्ली: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार देर रात ब्याज दर में फिर से बढ़ोतरी कर दी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फेड रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर संकट से जूझ रहे बैंकों को झटका दिया। फेड के इस ऐलान के बाद ब्याज दर बढ़कर अब 4.75% से 5% हो गया है। ये फैसला उस वक्त आया जब अमेरिका भारी बैंकिंग संकट से जूझ रहा है। हाल ही में अमेरिका के दो बड़े बैंक सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक दिवालिया हो गए। अमेरिका के 186 बैंकों पर संकट मंडरा रहा है। बैंकिंग संकट के बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने राहत देने के बजाए ब्याज दर में बढ़ोतरी का ऐलान किया। फेडरल ने कहा कि इस साल में एक और बार ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है।


बैंकों को नहीं मिली राहत

जहां अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर को उम्मीद थी कि फेडरल रिजर्व इस बाद उन्हें ब्याज दरों में कटौती कर राहत दे सकता है, उनकी उम्मीद पर पानी फिर गया। फेडरल रिजर्व ने कहा कि उनका दायित्व महंगाई पर नियंत्रण पाना है। ब्याज दर में बढ़ोतरी कर रहे हैं ताकि महंगाई पर काबू पा सके। मार्च 2022 से फेडरल लगातार ब्याज में बढ़ोतर कर रहा है। इसका असर बैंकों पर पड़ रहा है। फेडरल रिजर्व ने कहा कि महंगाई रोकना उनका मुख्य फोकस है। उन्होंने कहा कि इस साल एक बार फिर से ब्याज में बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिकी फेडरल की ओर से ब्याज दर में बढ़ोतरी से बॉन्ड यील्ड बढ़ना शुरू हो जाता है। जिससे बैंकों को बॉन्ड निवेश को नुकसान होता है।


डूब रहे अमेरिका के बैंक

दुनिया की सबसे बड़ी और मजबूत इकॉनमी कहलाने वाली अमेरिका की बैंकें डूब रही हैं। दो बैंक डूब चुके हैं। एक दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गए हैं। सोशल साइंस रिसर्च नेटवर्क स्‍टडी ने मॉनिटरी टाइटनिंग एंड यूएस बैंक फ्रेजिलिटी इन 2023 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका के 186 और बैंकों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है। ग्राहकों के रहमो-करम पर चल रहे इन इन बैंकों पर फेडरल के ब्याज बढ़ोतरी का असर पड़ेगा। अगर बैंक के ग्राहकों ने खाते से अपने पैसे निकालने शुरू कर दिए तो इन बैंकों पर ताला लटकना तय है। फेडरल की ओर से लगातार ब्‍याज दरों में हो रही बढ़ोतरी और अनशिक्योर्ड जमाओं के बढ़ने से खतरा बढ़ रहा है।


संकट में अमेरिकी इकोनॉमी

अमेरिका के 186 बैंकों पर खतरा मंडरा रहा है। जिस तरह से ब्याज दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी से अमेरिकी के बड़े बैंक सिलिकॉन वैली और सिग्नेचर बर्बाद हो गए, इन बैंकों पर भी वो खतरा मंडरा रहा है। आपको बता दें कि कोरोना काल के दौरान यूएस फेडरल ने ब्याज दरों को घटाकर शून्य कर दिया था, लेकिन जब स्थिति सुधरी ब्याज में लगातार बढोतरी होने लगी। मार्च 2022 के बाद से अमेरिकी फेडरल ने ब्याज दरों में 4.5 फीसदी की बढ़ोकरी कर दी। जिसकी वजह से यील्ड बढ़ता चला गया। बैंकों की पुरानी सिक्योरिटीज का मार्केट वैल्यू घटता चला गया जिसके कारण बैंकों को भारी नुकसान हुआ है।
लेखक के बारे में
बविता झा
बवीता झा नवंबर 2022 से नवभारतटाइम्स.कॉम के साथ कार्यरत हैं। टीवी के साथ पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 10 सालों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। बिजनस जगत की खबरों को रोचकता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी खासी रुचि है। दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद टीवी और डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। पढ़ने- लिखने के साथ उन्हें स्टेज शो का अनुभव है।... और पढ़ें

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग