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चीन की आर्मी से कनेक्शन वाली कंपनी के हाथों में एथेंस से लेकर एम्सटर्डम तक की सेक्युरिटी, खुलासे से यूरोप में खलबली

चीन (China) दुनिया में टेक्नोलॉजी सुपरपावर बनना चाहता है और इसके लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। वह अपनी कंपनियों को भारी सब्सिडी दे रहा है ताकि वे दुनिया में ज्यादा से ज्यादा ठेके हासिल सकें। उसकी कई कंपनियों पर जासूसी के आरोप लगे हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम 22 Jan 2022, 4:33 pm

हाइलाइट्स

  • यूरोप के कई संवेदनशील स्थानों पर लगे हैं चीनी कंपनी के उपकरण
  • कार्गो और वीकल स्कैनर्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी
  • यूरोपीय यूनियन के 27 देशों में में से 26 में इसी कंपनी के उपकरण
  • अमेरिका ने कई साल पहले ही लगा दिया था इस कंपनी पर बैन
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नवभारतटाइम्स.कॉम The Chinese flag
चीन टेक्नोलॉजी सुपरपावर बनना चाहता है।
नई दिल्ली: चीन की कंपनियों पर दुनियाभर में जासूसी के आरोप लगते रहे हैं। अब चीन की एक और कंपनी के बारे में खुलासे से यूरोपीय देशों में हड़कंप मचा हुआ है। दुनिया के कुछ सबसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा जांच के लिए चीन की एक कंपनी के बनाए उपकरण लगे हैं। समस्या यह है कि इस कंपनी की चीन के सेना और सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ गहरे संबंध हैं।
एपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (World Economic Forum), यूरोप के बड़े बंदरगाहों, एम्सटर्डम से लेकर एथेंस तक अहम एयरपोर्ट्स से लेकर रूस और नाटो (NATO) की सीमा तक चीन की कंपनी Nuctech के उपकरण लगे हैं। यह कंपनी कार्गो और वीकल स्कैनर्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस चीनी कंपनी पर कई साल पहले बैन लगा दिया था लेकिन वह यूरोप में बड़ा बिजनस हासिल करने में सफल रही।

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क्या है चिंता
आज यूरोपीय यूनियन (EU) के 27 देशों में से 26 में इसी कंपनी के उपकरण लगे हैं। सार्वजनिक खरीद, सरकारी और कॉरपोरेट रेकॉर्ड में यह बात सामने आई है। Nuctech का मालिकाना हक किसके पास है, इसका पता लगाना आसान नहीं है। लेकिन दुनियाभर में इस कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है जिससे खासकर पश्चिमी देशों में इसे लेकर चिंता बढ़ने लगी है।

इन देशों की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों और नीति निर्माताओं को आशंका है कि चीन इस कंपनी के जरिए उनके सरकारी, इंडस्ट्रियल और पर्सनल डेटा को हासिल कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि चीन की सरकार ने Nuctech को भारी सब्सिडी दी है ताकि कंपनी दुनियाभर में ठेके हासिल कर सके। चीन खुद को टेक्नोलॉजी सुपरपावर के रूप में स्थापित करना चाहता है और इसके लिए वह पश्चिमी देशों की संवेदनशील जानकारी पर नजर रखना चाहता है।

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ट्रेड सीक्रेट को खतरा
हॉलैंड के रक्षा मंत्रालय में डायरेक्टर ऑफ साइबरसिक्योरिटी रहे और अब यूरोपियन पार्लियामेंट के मेंबर Bart Goothuis ने कहा कि चीन की कंपनी के उपकरण जो डेटा प्रोसेस कर रही है, वह बेहद संवेदनशील है। यह पर्सनल डेटा, मिलिट्री डेटा और कार्गो डेटा है। हमारे ट्रेड सीक्रेट को खतरा है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह सही हाथों में रहे। हम एक ऐसे देश पर निर्भर हैं जो हमारा जियोपॉलिटिकल दुश्मन और रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी है।

उन्होंने कहा कि चीन की कंपनी संवेदनशील डेटा को अपने देश की सरकार के हवाले कर सकती है और यूरोप के पास इसकी निगरानी की व्यवस्था नहीं है। Nuctech से सिक्योरिटी खतरे के बारे में अलग-अलग देशों की राय जुदा है। किसी भी देश के पास इस बात का व्यापक डेटा नहीं है कि पूरे यूरोप में इस कंपनी के कितने उपकरण लगाए गए हैं।

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कौन है मालिक
कंपनी लोगों और उनके सामान के लिए स्कैनिंग सिस्टम बनाने के साथ ही विस्फोटकों का पता लगाने वाले उपकरण और चेहरे की पहचान, शरीर का तापमान, आईडी कार्ड और टिकट की पहचान करने के लिए इंटरकनेक्टेड डेवाइस बनाती है। चीन के कानूनों के मुताबिक अगर सरकार डेटा की मांग करती है तो चीन की कंपनियों के लिए इसे मुहैया कराना जरूरी है।

आलोचकों का कहना है कि चीन की सरकार Nuctech से मिले डेटा का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर सकती है। लंदन, एम्सटर्डम, ब्रसेल्स, एथेंस, फ्लोरेंस, पीसा, वेनिस, ज्यूरिख, जेनेवा और दूसरे कई शहरों के एयरपोर्ट्स पर इस चीनी कंपनी के डेवाइस लगे हैं। इस कंपनी का ऑनरशिप स्ट्रक्चर इतना जटिल है कि इसके असली मालिकों का पता लगाना मुश्किल है। लेकिन एक बात साफ है कि इसके चीन सरकार, एकडेमिक और मिलिट्री के साथ संबंध हैं।

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कंपनी का दावा
इस कंपनी की स्थापना Tsinghua University की सहयोगी कंपनी के रूप में हुई थी। चीन सरकार की मदद से इसने तेजी से प्रगति की और कई साल तक इसकी कमान देश के पूर्व नेता हू जिंताओ के हाथों में रही। आज इस कंपनी में Tongfang Co की 71 फीसदी हिस्सेदारी है। Tongfang में सबसे बड़ी हिस्सेदारी चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्प (CNNC) की है। अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट के मुताबिक CNNC चीन की मिलिट्री कंपनी है क्योंकि यह चीन की सेना के साथ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और एक्सपरटाइज साझा करती है।

हालांकि Nuctech ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह स्थानीय नियमों का पालन करती है। इसमें सिक्योरिटी चेक और डेटा प्राइवेसी के नियम शामिल हैं। हॉलैंड में कंपनी के डिप्टी जनरल मैनेजर Robert Bos ने कहा कि कंपनी को बेबुनियाद आरोपों के कारण नुकसान हुआ है। 2109 के बाद यूरोप में कंपनी का मार्केट शेयर आधा रह गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 साल में हमारे इक्विपमेंट के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है।

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