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दिसंबर तक MSP से अधिक रह सकता है कपास का दाम

[ जयश्री भोसले | पुणे ]कपास के दाम अभी भले ही पिछले वर्ष से कम हैं, लेकिन ये न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अब भी अधिक हैं। अधिक उत्पादन होने, ...

Navbharat Times 24 Nov 2017, 9:00 am

[ जयश्री भोसले | पुणे ]

कपास के दाम अभी भले ही पिछले वर्ष से कम हैं, लेकिन ये न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अब भी अधिक हैं। अधिक उत्पादन होने, कीड़ों के हमले के कारण क्वॉलिटी और यील्ड पर प्रतिकूल असर पड़ने के बावजूद इसकी कीमतें दिसंबर तक MSP से अधिक रह सकती हैं।

कपास का मौजूदा मार्केट प्राइस पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 10-15 पर्सेंट कम है। हालांकि, किसानों के लिए राहत की बात यह है कि दाम MSP से अभी भी अधिक है, जबकि बहुत से अन्य कृषि उत्पादों के दाम MSP से नीचे चल रहे हैं।

खरीफ की फसल से कपास की मौजूदा आवक चरम पर है। देशभर में मंडियों में रोजाना कपास की लगभग 1.60 लाख गांठें आ रही हैं।

महाराष्ट्र के गिनर बी एस राजपाल ने बताया, 'हमें दिसंबर तक दाम MSP से अधिक रहने की उम्मीद है।'

अच्छी क्वॉलिटी के कपास (बीजों के साथ कच्चा कपास) की कीमत अभी 4,300-4,600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, जबकि इसका MSP 4,320 रुपये प्रति क्विंटल है।

कपास के व्यापारियों के संगठन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने 2016-17 में कपास का उत्पादन 375 लाख बेल रहने का अनुमान दिया है। एक बेल में 170 किलोग्राम कपास होता है। यह उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 11 पर्सेंट अधिक होगा।

अच्छी कीमतें मिलने के कारण किसानों ने कपास का रकबा लगभग 19 पर्सेंट बढ़ाया है। रकबा बढ़ने के बावजूद उत्पादन में बहुत अधिक वृद्धि होने की संभावना नहीं है क्योंकि विशेषतौर पर महाराष्ट्र में पिंक बॉल नाम के कीड़े के हमले के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है।

कपास के बीज के दाम बढ़ने से भी कपास की कीमतें मजबूत हुई हैं। बीज का दाम अभी लगभग 1,850 रुपये रुपये प्रति क्विंटल है, जो कुछ सप्ताह पहले 1,500 रुपये प्रति क्विंटल का था। बीजों की क्वॉलिटी में सुधार के कारण इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

उद्योग और किसान पिंक बॉल कीड़े के हमले से असर से चिंतित हैं। महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने कीड़े के हमले के कारण फसल को हुए नुकसान के लिए सरकार से 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा देने की मांग की है।

कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने महाराष्ट्र और तेलंगाना में कपास की खरीद के लिए केंद्र खोले हैं। हालांकि, व्यापार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि CCI के केंद्रों को लेकर किसानों में उत्साह नहीं है क्योंकि कपास के दाम अभी MSP से अधिक हैं।

तेलंगाना में कपास की क्वॉलिटी खराब होने की समस्या और बीजों के दाम कम होने से किसानों को मुश्किल हो रही है क्योंकि वे क्वॉलिटी से जुड़े मानकों को पूरा नहीं कर पाने के कारण CCI को अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं।

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