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Gold Hallmarking: गोल्ड हॉलमार्किंग जरूरी होने के बाद अब पुरानी ज्वेलरी पर हॉलमार्क होगा या नहीं, यहां दूर कीजिए सारे कनफ्यूजन!

Gold Hallmarking: पूरे देश में सोने की हॉलमार्किंग करना जरूरी हो गया है। इससे ग्राहकों को बहुत फायदा (Benefits of Gold Hallmarking) होगा। जब भी वह सोना वापस बेचने जाएंगे, उन्हें अच्छी कीमत मिलेगी। साथ ही ज्वेलर मिलावट भी नहीं कर सकेंगे और ग्राहक ठगी से बच जाएंगे। पहले हॉलमार्किंग 1 जून से लागू होने वाली थी, लेकिन ज्वेलर्स के आग्रह पर कोरोना के असर को देखते हुए इसे 16 जून तक बढ़ा दिया गया।

नवभारतटाइम्स.कॉम 17 Jun 2021, 3:14 pm
Gold Hallmarking: देश में सोने की हॉलमार्किंग अनिवार्य हो गई है। ये नई व्यवस्था 16 जून से लागू हो चुकी है। इसका मतलब है कि अब ज्वेलर्स सिर्फ हॉलमार्क वाली ज्वेलरी ही बेचेंगे। इससे पहले हॉलमार्किंग 1 जून से अनिवार्य होने वाली थी, लेकिन देश में कोरोना की दूसरी लहर (Second wave of corona) को देखते हुए इसके लागू होने की तारीख बढ़ा दी गई। हॉलमार्किंग से ग्राहकों को बहुत फायदा (Benefits of Gold Hallmarking) होगा। यहां एक सवाल ये है कि पुरानी ज्वेलरी का क्या? क्या उसे बेचने से पहले ज्वेलर्स को उसकी भी हॉलमार्किंग करनी होगी? अगर नहीं किया तो क्या होगा? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब।
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Gold Hallmarking: गोल्ड हॉलमार्किंग जरूरी होने के बाद अब पुरानी ज्वेलरी पर हॉलमार्क होगा या नहीं, यहां दूर कीजिए सारे कनफ्यूजन!


क्या पुरानी ज्वेलरी की भी होगी हॉलमार्किंग?

केंद्रीय वाणिज्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने घोषणा की थी कि 1 सितम्बर 2021 तक पुराने स्टॉक पर हॉलमार्क लगाने को लेकर किसी भी व्यापारी पर कोई पेनल्टी नहीं लगेगी और कोई माल भी जब्त नहीं होगा। यानी ज्वेलर्स 1 सितंबर तक अपना पुराना स्टॉक निकाल सकते हैं और उसके बाद नई ज्वेलरी को हॉलमार्क के साथ ही बेचना होगा। हालांकि, बिना हॉलमार्क वाली जो ज्वेलरी आम लोगों के पास है, उसकी हॉलमार्किंग ना होने को लेकर किसी पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

कई बार बढ़ चुकी है लागू होने की तारीख

देशभर में हॉलमार्किंग (hallmarking) लागू करने की तारीख कई बार बढ़ाई जा चुकी है। इसे इस साल जनवरी में लागू होना था, लेकिन कोरोना की वजह से तारीख कई बार बढ़ने के बाद अब 16 जून से इसे लागू किया जा रहा है। खुद ज्वेलरी इंडस्ट्री (jewellery industry) से जुड़े ज्वेलर्स ने सरकार से हॉलमार्किंग लागू होने की तारीख बढ़ाने की गुजारिश की थी।

पहले चरण के तहत 256 जिलों में हॉलमा​र्किंग होगी अनिवार्य

गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्य करने के पहले चरण में देश के 256 जिलों में, जहां पर पहले से ही हॉलमार्किंग सेंटर्स हैं, वहां अनिवार्य रूप से हॉलमार्किंग लागू होगी। सभी ज्वेलरी व्यापारियों को केवल एक बार रजिस्ट्रेशन लेना होगा, जिसका कोई नवीनीकरण नहीं कराना होगा। कुंदन एवं पोल्की की ज्वेलरी और ज्वेलरी वाली घड़ियों को हॉलमार्क के दायरे से बाहर रखा गया है।

हॉलमार्क देखने के बाद ही खरीदें सोना

सोना खरीदते समय सबसे पहले आपको उस पर हॉलमार्क जरूर देखना चाहिए। हॉलमार्क सर्टिफिकेशन का मतलब है कि सोना असली है। यह सर्टिफिकेशन ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड की तरफ से दिया जाता है। जाने-माने ब्रांड्स में तो आपको सभी गहने हॉलमार्क वाले ही मिलेंगे, लेकिन स्थानीय ज्वैलर्स कई बार बिना हॉलमार्क के गहने भी बेचते हैं, जिनके असली या नकली होने की पहचान आपको खुद करनी होगी।

हॉलमार्किंग के फायदे

हॉलमार्किंग ग्राहकों के लिए काफी फायदेमंद है। अगर आप हॉलमार्क वाली ज्वेलरी खरीदते हैं तो जब आप इसे बेचने जाएंगे तो किसी तरह की डेप्रिसिएशन कॉस्ट (depreciation cost) नहीं काटी जाएगी। इसका मतलब है कि आपको अपने सोने की पूरी-पूरी कीमत मिलेगी। इसके अलावा आप जो सोना खरीदेंगे उसकी गुणवत्ता (quality) की गारंटी होगी। इससे देश में मिलावटी सोना बेचने पर रोक लगेगी। ग्राहकों को ठगे जाने का डर नहीं होगा।

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