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पिछले साल से बेहतर है मिडकैप फंड्स का परफॉर्मेंस

[ भावना आचार्य ]मिडकैप्स ने पिछले साल जितनी बढ़त हासिल की थी, उसका काफी हिस्सा इस साल गंवा दिया है। कैलेंडर ईयर 2017 जहां मिडकैप्स और स्मॉलकैप्स ...

Navbharat Times 11 Jul 2018, 9:00 am

[ भावना आचार्य ]

मिडकैप्स ने पिछले साल जितनी बढ़त हासिल की थी, उसका काफी हिस्सा इस साल गंवा दिया है। कैलेंडर ईयर 2017 जहां मिडकैप्स और स्मॉलकैप्स के लिए धमाकेदार साल था, वहीं कैलेंडर ईयर 2018 में ऐसी झलक नहीं दिखी है। अकेले जून में ही इन दो सेगमेंट्स के लिए निफ्टी सूचकांकों में क्रमश: 6 पर्सेंट और 10 पर्सेंट की गिरावट आई। साल दर साल आधार पर निफ्टी मिडकैप 100 में 13.8 पर्सेंट और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 20.8 पर्सेंट गिरावट आई है।

मिडकैप्स और स्मॉलकैप्स पर फोकस रखने वाले म्यूचुअल फंड्स का प्रदर्शन भी ऐसे में खराब होना चाहिए। यह बात सही है कि मिडकैप फंड्स ने लॉस ऐवरेज किया है। हालांकि इसमें एक अच्छी बात भी दिख रही है। पिछले साल के मुकाबले इस साल मिडकैप फंड्स का प्रदर्शन बेहतर है।

निफ्टी मिडकैप 100 टीआरआई से उनके प्रदर्शन की तुलना करने पर पता चलता है कि मार्केट में करेक्शन का सामना उन्होंने बेहतर ढंग से किया। पिछले सालभर में मिडकैप फंड्स में औसतन 10 पर्सेंट गिरावट रही, वहीं बीएसई मिडकैप इंडेक्स लगभग 15 पर्सेंट गिरा।

2017 बनाम 2018

मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स के लिए 2017 मुश्किल साल था। मिडकैप फंड्स (कैटेगरी से जुड़े नए नियमों के आधार पर नहीं, बल्कि मिडकैप पर ज्यादा फोकस रखने वाले फंड्स) का ऐवरेज रिटर्न धीरे-धीरे निफ्टी मिडकैप 100 से कमजोर होने लगा। अधिकतर फंड्स का प्रदर्शन इंडेक्स से कमजोर था और चंद आउटपरफॉर्मर्स के चलते ऐवरेज लेवेल कुछ ऊंचा दिखा। साल 2016 में भी इनमें से काफी फंड्स का प्रदर्शन इंडेक्स से कमजोर था।

मिडकैप सेगमेंट में प्राइसेज चढ़ने के साथ फंड्स सतर्क होने लगे। लार्जकैप शेयरों ने एग्रीगेट अर्निंग्स के मामले में मिडकैप के प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। अच्छी ग्रोथ और वाजिब वैल्यूएशंस वाले भी कई शेयर थे, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप स्पेस के अधिकतर शेयरों के वैल्यूएशंस बहुत चढ़ गए।

पिछले सालभर में चढ़ने वाले अधिकतर शेयरों के फंडामेंटल्स दमदार नहीं थे। मिडकैप फंड्स ने लार्जकैप्स का हिस्सा अपने पोर्टफोलियो में बढ़ाना शुरू कर दिया। कई फंड्स ने प्रॉफिट बुकिंग भी की और उन्होंने कम महंगे या बाजार से कम तवज्जो पाने वाले शेयरों में निवेश भी किया। दूसरों ने इनवेस्टर्स से नया निवेश लेना बंद कर दिया।

इस सतर्क रवैये ने इनमें से कई फंड्स को लॉस पर काबू पाने में मदद की क्योंकि जनवरी से ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट आने लगी थी। मिडकैप स्टॉक्स के एक साल के औसत रोलिंग रिटर्न के मुताबिक निफ्टी मिडकैप 100 टीआरआई इंडेक्स के बीच गैप कम हो रहा है। दिसंबर 2017 में करीब 25-35 पर्सेंट फंड्स ने सालभर के रिटर्न के मामले में निफ्टी मिडकैप 100 टीआरआई को पीछे छोड़ा था। वहीं अब यह आंकड़ा लगभग 70 पर्सेंट पर है। पिछले सालभर में इनमें से 80 पर्सेंट फंड्स ने निफ्ट मिडकैप 100 टीआरआई से बेहतर प्रदर्शन किया है। मार्केट के मुकाबले लॉस पर अंकुश रखने में इनमें से कुछ फंड्स ने दूसरों से बेहतर प्रदर्शन किया है। किसी भी फंड की क्षमता का एक पैमाना यह भी होता है कि गिरावट वाले बाजार का असर वह कितना कम से कम रख पाता है। नुकसान जितना कम होगा, रिकवरी उतनी आसान होगी।

(लेखिका फंड्सइंडियाडॉटकॉम में म्यूचुअल फंड रिसर्च की डिप्टी हेड हैं।)

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