ऐपशहर

Fabindia Share: 50 हजार से भी ज्यादा किसानों और कारीगरों को मुफ्त में शेयर बांटेगी फैबइंडिया, जानें किन्हें मिलेगा

फैबइंडिया (Fabindia) के प्रोमोटर बिमला नंदा बिसेल (Bimla Nanda Bissell) और मधुकर खेरा (Madhukar Khera) अपने हिस्से के शेयर किसानों और कारीगरों (Artisans) को गिफ्ट में देंगे। बिमला नंदा 4 लाख तथा खेरा 3,75,080 इक्विटी शेयरों गिफ्ट करेंगे।

Authored byशिशिर चौरसिया | नवभारतटाइम्स.कॉम 5 Jul 2022, 12:41 pm
नई दिल्ली: आप यदि इथनिक वियर (Ethnic Wear) पसंद करते हैं तो फैबइंडिया (Fabindia) का नाम जरूर सुना होगा। फैबइंडिया देश का पहला ऐसा उद्यम है, जो संगठन से जुड़े किसानों और कारीगरों को कंपनी के शेयर दे रहा है। दरअसल, इस कंपनी से जुड़े आर्टिजनों को इसके प्रोमोटर्स (Fabindia Promoters) अपने हिस्से के शेयर देंगे। वह भी मुफ्त में। हालांकि शेयर किन कारीगरों को मिलेगा, इसके लिए कुछ मानदंड तय किए गए हैं।
नवभारतटाइम्स.कॉम Fab India artisans will get free share
फैब इंडिया के कारीगरों को मिलेगा फ्री में शेयर


कारीगरों के लिए कितने शेयर
मिली जानकारी के अनुसार फैबइंडिया के प्रोमोटर बिमला नंदा बिसेल और मधुकर खेरा अपने हिस्से के शेयर किसानों और कारीगरों को गिफ्ट में देंगे। बिमला नंदा 4,00,000 तथा खेरा 3,75,080 इक्विटी शेयरों गिफ्ट करेंगे। यह शेयर उनके लिए होगा, जो कि एक तयशुदा अवधि से फैबइंडिया से जुड़े होंगे और उनके साथ कारोबार कर रहे होंगे। फैब इंडिया के अधिकतर कारीगर और किसान राजस्थान, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के हैं।

50 हजार से ज्यादा हैं सप्लायर
फैबइंडिया किसानों और कारीगरों से कांट्रेक्ट मैन्यूफैक्चरिंग के जरिए जुड़ा है। इसके पास इस समय समय 50 हजार से भी ज्यादा ऐसे कारीगर हैं। कंपनी का कहना है कि भारत के पारंपरिक कला और कारीगरी को जीवित रखने के लिए इस तरह का करार किया गया है। साथ ही उन्हें उनके सामानों का बेहतर मूल्य प्रदान किया जाता है।

95 से 98 फीसदी प्राकृतिक सामान
फैबइंडिया का दावा है कि उनका अधिकतर सामान पर्यावरण अनुकूल तरीके से तैयार किया जाता है। उनके अपेरल लाइन में 95 से 98 फीसदी प्राकृतिक सामानों का उपयोग होता है। परिधानों की बात करें तो उसमें कपड़ा प्राकृतिक धागों से तैयार होता है। उसमें लगने वाला बटन या तो सीप से बनता है या फिर नारियल से। इसके फर्नीचर शुद्ध रूप से लकड़ी के बने होते हैें। साथ ही उसे बनाने में जूट, बेंत, पत्थर, संगमरमर, एमडीएफ, प्लाई बोर्ड आदि का भी उपयोग होता है।
लेखक के बारे में
शिशिर चौरसिया
शिशिर कुमार चौरसिया इस समय NBT.in के साथ बिजनेस एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें वित्तीय पत्रकारिता में 24 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले, उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, यूनीवार्ता और राजस्थान पत्रिका के लिए केंद्रीय सरकार के मंत्रालयों को कवर किया। वह दिव्य हिमाचल, धर्मशाला और पंचकुला (हरियाणा) में भी काम कर चुके हैं।... और पढ़ें

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग