ऐपशहर

अब सस्ते हो रहे हैं बैंक लोन: RBI

[ ईटी ब्यूरो | कोलकाता ]आउटस्टैंडिंग लोन के लिए मॉनेटरी पॉलिसी का असर फरवरी 2019 के बाद पहली बार पॉजिटिव दिख रहा है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा ...

इकनॉमिक टाइम्स 7 Feb 2020, 9:00 am

[ ईटी ब्यूरो | कोलकाता ]

आउटस्टैंडिंग लोन के लिए मॉनेटरी पॉलिसी का असर फरवरी 2019 के बाद पहली बार पॉजिटिव दिख रहा है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा बैंक लोन अब जाकर सस्ता होने लगे हैं। मॉनेटरी ट्रांसमिशन बताता है कि RBI के रेट घटाने के बाद बैंकों ने अपने इंटरेस्ट रेट में कितनी कमी की है। उसने लोन को सस्ता बनाने के लिए सालभर पहले पॉलिसी रेट कट की शुरुआत की थी। नए लोन के मामले में मॉनेटरी ट्रांसमिशन सुस्त रहा है जबकि रिजर्व बैंक ने फरवरी 2019 के बाद कुल 135 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी। इसके बावजूद बैंक मौजूदा बॉरोअर्स का लोन सस्ता नहीं कर रहे थे और कुछ बॉरोअर्स को उस दौरान पहले से ज्यादा रेट से ईएमआई चुकाना पड़ा था। आरबीआई ने बताया कि फरवरी से दिसंबर 2019 के बीच आउटस्टैंडिंग लोन के वेटेड एवरेज लेंडिंग रेट (WALR) में 13 बेसिस प्वाइंट की कमी आई थी।

आरबीआई ने क्रेडिट मार्केट में मॉनेटरी ट्रांसमिशन पर कहा, 'यह धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है। मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) की एक साल की मीडियन मार्जिनल कॉस्ट फरवरी 2019 से जनवरी 2020 के बीच 55 बेसिस प्वाइंट कम हुई है।'

बैंकों की तरफ से जारी किए गए फ्रेश लोन का WALR फरवरी से दिसंबर 2019 के बीच घटकर अब 69 बेसिस प्वाइंट दिख रहा है जिसमें दिसंबर तक के पीरियड में 44 बेसिस प्वाइंट में कमी दिख रही थी। ट्रांसमिशन में सुधार पिछले साल 1 अक्टूबर से एक्सटर्नल बेंचमार्क सिस्टम लागू किए जाने के चलते आया है, जिसने ज्यादातर बैंकों को अपना हाउसिंग, पर्सनल और माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (MSE) लेंडिंग रेट को पॉलिसी रेपो रेट से लिंक करने पर मजबूर कर दिया। आरबीआई ने पॉलिसी रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कमी की थी।

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को रेपो रेट जस का तस रहने देने का एलान करने के बाद कहा, 'कई मनी मार्केट सेगमेंट और प्राइवेट कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में बड़े पैमाने पर मॉनेटरी ट्रांसमिशन हुआ है। एक्सटर्नल बेंचमार्क सिस्टम अपनाए जाने से बैंकों को रेट घटाने में मदद मिली है। इन डिवेलपमेंट से फरवरी 2019 के बाद पॉलिसी रेट में हुई कुल कटौती का असर अब खुलकर दिखेगा और इससे आनेवाले समय में घरेलू बाजार में मांग बढ़ेगी।'

आरबीआई के पॉलिसी रेट कट को लेकर मनी मार्केट का रेस्पॉन्स ज्यादा तेज रहा है। 31 जनवरी 2020 तक मनी मार्केट और कॉरपोरेट डेट मार्केट के कई सेगमेंट में पॉलिसी रेट ट्रांसमिशन 146 बेसिस प्वाइंट (कॉल मनी मार्केट) से 190 बेसिस प्वाइंट (NBFC के तीन महीने के कमर्शियल पेपर) तक रहा है। हालांकि पांच साल की सरकारी सिक्योरिटीज के लिए यह 73 बेसिस प्वाइंट और 10 साल की सिक्योरिटीज के लिए यह 76 बेसिस प्वाइंट रहा।

चेक क्लियरेंस में आएगी तेजी

RBI ने इसके अलावा चेक क्लीयरेंस में तेजी लाने के लिए सितंबर से देशभर में चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) लागू करने का भी फैसला किया है। 2010 में शुरू किया गया यह सिस्टम फिलहाल चुनिंदा बड़े शहरों में है। उसने कहा कि डिजिटल पेमेंट की तेज ग्रोथ को देखते हुए जुलाई से देश में डिजिटल पेमेंट्स इंडेक्स (DPI) शुरू किया जाएगा जो बताएगा कि देश में पेमेंट डिजिटाइजेशन किस हद तक कारगर तरीके से हुआ है।

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग