ऐपशहर

पैसेंजर कार सेगमेंट पर इनवेस्टर्स को भरोसा, मारुति टॉप पिक

[ आशुतोष आर श्याम | ईटीआईजी ]इनवेस्टर्स की दिलचस्पी इन दिनों पैसेंजर कार सेगमेंट में अधिक दिख रही है। इस सेगमेंट में सेल्स ग्रोथ बढ़िया रहने की ...

इकनॉमिक टाइम्स 6 Apr 2017, 9:01 am

[ आशुतोष आर श्याम | ईटीआईजी ]

इनवेस्टर्स की दिलचस्पी इन दिनों पैसेंजर कार सेगमेंट में अधिक दिख रही है। इस सेगमेंट में सेल्स ग्रोथ बढ़िया रहने की संभावना है। मिसाल के लिए, देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ऑटो सेक्टर में टॉप बाय बनकर उभरी है। पैसेंजर कार सेगमेंट की वॉल्यूम ग्रोथ वित्त वर्ष 2018 में 8-10 पर्सेंट रहने की उम्मीद है, जबकि कमर्शियल व्हीकल्स, ट्रैक्टर्स और टू-व्हीलर्स जैसे दूसरे सेगमेंट की ग्रोथ सुस्त रह सकती है। पैसेंजर कार सेगमेंट की ग्रोथ बढ़ने की संभावना कई वजहों से है। पहली बात तो यह है कि भारत में हर 1,000 लोगों पर सिर्फ 28 के पास ही कारें हैं। जापान, साउथ कोरिया और चीन क्रमश: इस लेवल पर 1962, 1985 और 2006 में पहुंच चुके थे। इन तीनों देशों में करीब 10 साल तक पैसेंजर कारों की मांग 10 पर्सेंट सालाना तक बढ़ी थी। एनालिस्टों का कहना है कि जब तक देश की जीडीपी ग्रोथ 6 पर्सेंट से ऊपर रहेगी, तब तक भारत में भी पैसेंजर कार सेगमेंट की ग्रोथ 10 पर्सेंट तक रह सकती है।

दूसरी वजह यह है कि बड़ी पैसेंजर कार कंपनियां नए एमिशन नॉर्म्स का पालन 2012 से ही कर रही हैं। इसलिए नए नॉर्म्स को अप्रैल 2017 से लागू किए जाने का उन पर असर नहीं पड़ेगा। दूसरी तरफ, टू-व्हीलर्स और कमर्शियल व्हीकल कंपनियों ने पुराने नॉर्म्स वाली गाड़ियों को भारी डिस्काउंट पर बेचा है, जिससे उनके ऑपरेटिंग मार्जिन में गिरावट आएगी। तीसरी बात यह है कि सरकारी एंप्लॉयीज की तरफ से कारों की मांग मजबूत बनी हुई है। मारुति के वॉल्यूम में दिसंबर 2016 क्वॉर्टर में सरकारी एंप्लॉयीज का शेयर बढ़कर 20 पर्सेंट पहुंच गया, जो कुछ साल पहले तक 5 पर्सेंट था। सरकार के 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर अमल से यह ट्रेंड आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने से सरकारी एंप्लॉयीज की सैलरी बढ़ रही है। इसके अलावा, उबर और ओला जैसी कार एग्रीगेटर कंपनियों ने आने वाले कुछ वर्षों में अपने फ्लीट साइज में अच्छी-खासी बढ़ोतरी की योजना बनाई है। उबर ने अगले दो साल में 2 लाख कारें लीज पर देने का प्लान बनाया है। मारुति ने वित्त वर्ष 2017 के पहले 9 महीनों में कैब एग्रीगेटर्स को 60,000 यूनिट्स बेचीं। कंपनी के वॉल्यूम में उनका योगदान 5 पर्सेंट रहा, जबकि उसका मार्केट शेयर 50 पर्सेंट। अभी मारुति के शेयर लॉन्ग टर्म एवरेज वैल्यूएशन से 50 पर्सेंट ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। कंपनी की ग्रोथ की जैसी गुंजाइश दिख रही है, उससे मीडियम टर्म में प्रीमियम वैल्यूएशन बने रहने के आसार हैं।

अगला लेख

Businessकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग