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पोर्टफोलियो चेंज, इनफ्लो बढ़ने से FPI, MF पर चढ़ा निवेश का बुखार

[ आशुतोष श्याम | ईटीआईजी ] पोर्टफोलियो में तेजी से बदलाव और अधिक पैसा आने की वजह से भारतीय शेयर बाजार में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही ...

इकनॉमिक टाइम्स 10 May 2019, 9:00 am

[ आशुतोष श्याम | ईटीआईजी ]

पोर्टफोलियो में तेजी से बदलाव और अधिक पैसा आने की वजह से भारतीय शेयर बाजार में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है। अप्रैल 2019 में कुल टर्नओवर में विदेशी पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (एफपीआई) और म्यूचुअल फंड (एमएफ) का पार्टिसिपेशन बढ़कर क्रमशः 17.5 और 7.8 पर्सेंट हो गया। वहीं, कुल टर्नओवर में उनके पार्टिसिपेशन का लॉन्ग टर्म एवरेज क्रमशः 15.5 और 7.7 पर्सेंट रहा है। संस्थागत निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में भागीदारी बढ़ना मार्केट डेप्थ के लिए अच्छा संकेत है। इससे किसी घटना पर शेयरों के दाम में उतार-चढ़ाव की आशंका कम होती है।

संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पोर्टफोलियो में बदलाव है। एफपीआई ने इधर लार्ज कैप कंपनियों में निवेश बढ़ाया है, जबकि म्यूचुअल फंड्स लार्ज कैप से अब मिड कैप शेयरों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। चुनाव से पहले बाजार में जो तेजी आई, उसमें वैल्यू और मिड कैप शेयरों का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर रहा। इसी वजह से म्यूचुअल फंडों ने मिड कैप शेयरों की खरीदारी बढ़ाई है। पहले जिन निवेशकों ने सुरक्षित माने जाने वाले या क्वॉलिटी स्टॉक्स में पनाह ली हुई थी, वे वैल्यू और साइक्लिकल स्टॉक्स में शिफ्ट हो रहे हैं क्योंकि चुनाव संबंधी अनिश्चितता धीरे-धीरे कम हो रही है।

इस साल की शुरुआत से एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 9.83 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह एशियाई देशों में किसी बाजार में लगाई गई सबसे अधिक रकम है। इससे पहले अक्टूबर 2018 के बाद कई विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियो में भारतीय स्टॉक्स का वेटेज 8.6 पर्सेंट के बेंचमार्क वेटेज से कम हो गया था। तब लोकसभा चुनाव को लेकर काफी अनिश्चितता थी। हालांकि, इस साल एफपीआई ने भारतीय बाजार में निवेश इसलिए बढ़ाया है क्योंकि वे 23 मई को चुनाव के नतीजे आने के बाद वाली तेजी को हाथ से नहीं निकलना देना चाहते। जापान को छोड़कर एशियाई फंड्स ने भारत में मार्च में 13 पर्सेंट अधिक रकम लगाई, जबकि फरवरी में उन्होंने 11.8 पर्सेंट ज्यादा निवेश किया था। जीईएम फंड्स का एलोकेशन मार्च में भारतीय बाजार में 10.1 पर्सेंट बढ़ा, जिसमें फरवरी में 9.4 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई थी।

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